नजूल सरकार की सम्पत्ति पर कब्जाधारक के अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण का उप जिला मजिस्ट्रेट एवं नियत प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ ने दिया आदेश

प्रतापगढ़। तहसील सदर, जनपद प्रतापगढ़ के राजस्व ग्राम बेल्हाघाट स्थित गाटा संख्या-1016 की भूमि पर विपक्षी द्वारा बिना स्वीकृत मानचित्र एवं सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के निर्माण कार्य कराया जा रहा है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि उक्त भूमि नजूल प्रकृति की है तथा उस पर अवैध निर्माण किया जा रहा है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने प्रार्थना-पत्र में यह भी अभिकथित किया गया है कि संबंधित गाटा संख्या-1016 की भूमि शत्रु सम्पत्ति (Enemy Property) की प्रकृति की है।
पांच दिन में स्वयं गिराने का आदेश दिया गया है, निर्धारित अवधि में अनुपालन न किए जाने की दशा में संबंधित अनधिकृत निर्माण को नियमानुसार हटाया जाएगा तथा इस पर होने वाला समस्त व्यय विपक्षी से भू-राजस्व की भाँति किया जाएगा, वसूल…
शिकायतकर्ता का कथन है कि उक्त भूमि के मूल पट्टाधारक के पाकिस्तान जाकर वहां की नागरिकता ग्रहण कर लेने के कारण यह संपत्ति शत्रु सम्पत्ति की श्रेणी में आ गई। शिकायतकर्ता ने यह भी उल्लेख किया है कि इस संबंध में पाकिस्तान से निष्पादित शपथ-पत्र सहित विभिन्न अभिलेख उपलब्ध हैं तथा उक्त संपत्ति के संबंध में पूर्व में विभिन्न न्यायालयों में वाद संस्थित हुए। शिकायतकर्ता के अनुसार उक्त संपत्ति वर्तमान में भी सरकारी अभिलेखों में नजूल के रूप में दर्ज है तथा विपक्षी द्वारा उक्त भूमि पर निर्माण कार्य कर अपना अधिकार स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
प्राप्त शिकायत के क्रम में तथ्यात्मक परीक्षण हेतु अवर अभियन्ता, विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ से स्थल निरीक्षण कर आख्या आहूत की गयी। तदनुसार अवर अभियन्ता द्वारा दिनांक- 25.04.2026 को निरीक्षण कर प्रस्तुत आख्या में उल्लेख किया गया कि संबंधित स्थल पर बिना स्वीकृत मानचित्र एवं सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के निर्माण कार्य किया जा रहा है। उक्त आख्या के आधार पर दिनांक- 11.05.2026 को उत्तर प्रदेश भवन संचालन विनियमन अधिनियम, 1958 की धारा-10 के अंतर्गत विपक्षी को कारण बताओ नोटिस निर्गत किया गया। नोटिस के अनुपालन में विपक्षी द्वारा लिखित उत्तर प्रस्तुत किया गया, जिसमें कहा गया कि उसके द्वारा कोई नया निर्माण नहीं।
मानचित्र, निर्माण अनुमति अथवा सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रदत्त स्वीकृति प्रस्तुत नहीं की गयी। विपक्षी का यह कथन कि केवल मरम्मत का कार्य किया गया है, उपलब्ध तकनीकी आख्या एवं निरीक्षण प्रतिवेदन से नहीं होता,पुष्ट…
उत्तर प्रदेश भवन संचालन विनियमन अधिनियम, 1958 की धारा-10 के अंतर्गत यदि किसी भवन का निर्माण, पुनर्निर्माण अथवा भौतिक परिवर्तन बिना आवश्यक स्वीकृति के किया जाता है, तो विहित प्राधिकारी ऐसे निर्माण के विरुद्ध आवश्यक आदेश पारित कर सकता है। उपलब्ध अभिलेखों, अवर अभियन्ता की रिपोर्ट, तहसीलदार की आख्या तथा विपक्षी को दिए गए अवसरों पर विचार करने के उपरान्त मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचती हूँ कि विपक्षी द्वारा संबंधित स्थल पर बिना विधिक स्वीकृति प्राप्त किए निर्माण कार्य कराया गया है।
चूँकि संबंधित भूमि राजस्व अभिलेखों में नजूल भूमि के रूप में दर्ज है तथा विपक्षी द्वारा निर्माण हेतु कोई स्वीकृत मानचित्र अथवा सक्षम प्राधिकारी की अनुमति प्रस्तुत नहीं की गयी है। उक्त निर्माण नियमितीकरण अथवा कम्पाउण्डिंग के योग्य नहीं पाया जाता। फलस्वरूप धारा-10, उत्तर प्रदेश भवन संचालन विनियमन अधिनियम, 1958 के अंतर्गत अनधिकृत निर्माण को हटाया जाना आवश्यक है। धारा-10, उत्तर प्रदेश भवन संचालन विनियमन अधिनियम, 1958 के अंतर्गत यह आदेशित किया जाता है कि विपक्षी उक्त अनधिकृत निर्माण, जिसमें निरीक्षण आख्या में वर्णित टिन शेड एवं अन्य अनधिकृत निर्माण भाग सम्मिलित हैं, को इस आदेश की तिथि से 5 दिवस के भीतर स्वयं हटाना सुनिश्चित करे।
उप जिला मजिस्ट्रेट एवं नियत प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ ने दिनांक- 23/06/2026 को अपने आदेश में उल्लेखित किया है कि निर्धारित अवधि में अनुपालन न किए जाने की दशा में संबंधित अनधिकृत निर्माण को नियमानुसार हटाया जाएगा तथा इस पर होने वाला समस्त व्यय विपक्षी से भू-राजस्व की भाँति वसूल किया जाएगा। विपक्षी की तरफ से सुल्तान हसन के पुत्र शेख खलील उर्फ शेखू आज विनायमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ के दफ्तर से आदेश की नकल प्राप्त कर चुके हैं। अब अपनी टीम के साथ अगली रणनीति पर काम करेंगे। ताकि नजूल सरकार की सम्पत्ति पर अवैध कब्जा हटाया न जा सके।