बेटी की हत्या कर पिता ने प्रेमी को भिजवाया जेल, 7 साल बाद 2 युवक बाइज्जत बरी
झांसी। युवती से छेड़छाड़ और उसको आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में 2 आरोपियों को झांसी की अदालत ने बाइज्जत बरी कर दिया। साथ ही कोर्ट ने युवती के पिता के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने के पुलिस को आदेश दिए हैं। दरअसल, कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह साबित हो गया कि युवती के पिता ने रंजिश में 2 युवकों के खिलाफ झूठा केस दर्ज कराया था। यह आदेश विशेष न्यायधीश पॉक्सो एक्ट मोहम्मद नेयाज अहमद अंसारी की अदालत ने दिया है। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए विशेष शासकीय अधिवक्ता विजय सिंह कुशवाह ने बताया कि बड़ागांव के हाजीपुरा निवासी मातादीन ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि गांव के युवक आकाश उर्फ कल्लू पाण्डे व अंकित मिश्रा 9 जुलाई 2002 से उसकी बेटी को रास्ते में आते-जाते समय छेड़खानी करते थे।
यह बात उसकी बेटी ने अपनी मां को बताई। कई बार पुलिस में शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 8 जून 2018 को शाम जब कोई घर पर नहीं था, उसी समय उसकी बेटी ने दोनों से परेशान व प्रताड़ित होकर आत्महत्या कर ली। न्यायालय के आदेश पर 17 अगस्त 2018 बड़ागांव पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते हुए बयानों के आधार पर दोनों युवकों को जेल भेजते हुए न्यायलय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। 8 माह जेल में बताने के बाद दोनों को जमानत पर छोड़ दिया गया। शासकीय अधिवक्ता विजय सिंह कुशवाह ने बताया कि इस बीच न्यायालय में चली सुनवाई में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि युवती के शरीर पर काफी चोट के निशान थे, जिसको परिजनों द्वारा और पंचनामे के समय छिपाया गया।
कोर्ट में सुनवाई के समय युवती की मां ने आरोपियों की पहचान नहीं की। लगातार पिता, पत्नी और बहन अपने बयान बदलते रहे। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा शरीर पर आए चोट के निशान से साबित हो रहा है कि पिता ने ही अपनी बेटी की हत्या की। रंजिश और सरकार से मिलने वाली राहत राशि का लाभ लेने लिए दोनों अभियुक्तों को फंसाया गया। ऐसा कोई साक्ष्य वादी की तरफ से नहीं रखा गया जिसमें आरोपियों द्वारा छेड़खानी और आत्महत्या के लिए उकसाने जैसा मामला बन रहा हो। इसलिए दिनों अभियुक्तों को दोषमुक्त किया जाता है। न्यायालय ने थाना बड़ागांव पुलिस को निर्देशित किया है कि वादी मुकदमा व उपस्थित परिजनों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर विवेचना करते हुए आख्या से न्यायालय को अवगत कराया जाए। साथ ही जिलाधिकारी को निर्देशित किया गया है कि वादी मुकदमा द्वारा उत्पीड़न की सरकार से ली गई राहत राशि राजस्व विभाग की टीम बनाकर वसूली कर कोष में जमा कराई जाए।
शासकीय अधिवक्ता विजय सिंह कुशवाह ने बताया कि कोर्ट ने युवती के पिता के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट में सुनवाई के दौरान ये भी पता चला कि आरोपी आकाश का युवती के साथ प्रेम संबंध था। दरअसल, आरोपी आकाश और युवती एक ही गांव के रहने वाले थे। दोनों एक दूसरे को पसंद किया करते थे और छिपछिप कर मिला भी करते थे। घटना के दो दिन पहले पिता ने प्रेमी को अपनी बेटी के साथ मिलते हुए देख लिया था, जिसके बाद पिता अपनी लड़की को घर ले गया और उसको पीटने लगा। जिससे उसकी मौत हो गई। इस पर पिता ने खुद को बचाने और प्रेमी को फंसाने की योजना बनाई और बेटी के शव को लटका दिया।
घटना के दो दिन बाद पिता ने आरोपियों के खिलाफ तहरीर दे डाली। तहरीर पर लिखे आरोप पुलिस के गले नहीं उतरे और मुकदमा नहीं लिखा गया। बाद पिता ने न्यायालय से मामला दर्ज कराया। पोस्टमार्टम में शरीर पर कई चोट के निशान होने की रिपोर्ट पर गहन ध्यान किया गया तब कहीं जाकर पूरी कहानी सामने आती चली गई, जिसे आधार बनकर न्यायालय में एक के बाद एक परिजनों कई सवाल किए गए। जिसके जवाब पहले दिए बयानों से बिल्कुल अलग थे। घटना में अभियुक्त बनाए गए आरोपियों से हुई पूछताछ में दोनों का इस घटना में बिल्कुल शामिल न होना पाया गया। जिस पर न्यायालय ने दोनों को बरी कर दिया।