अमेरिकी टैरिफ भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती, सरकार को करनी होगी ठोस पहल
आज मध्य रात्रि से लागू हुआ 50% अमेरिकी टैरिफ संक्रमण काल के दौर से गुजर रही भारत की अर्थ व्यवस्था के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। भारत द्वारा अमेरिका को निर्यात होने वाले 8000 करोड़ रुपए के निर्यात पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप भारत से अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करने के लिए अमेरिका के डेयरी उत्पादों के लिए भारत का बाजार खुलवाना चाहते हैं। जो कि भारत में संभव नहीं है। भारत अमेरिका को इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, फार्मास्यूटिकल्स, रत्न और आभूषण, वस्त्र, तेल और पेट्रोलियम उत्पाद। इनमें मशीनरी, कंप्यूटर, सर्किट बोर्ड, रेडीमेड गारमेंट्स (विशेष रूप से कॉटन आधारित), कटिंग और पॉलिश किए हुए हीरे, तथा दवाएं शामिल हैं। पर्यटक द्वारा खरीदी गई वस्तुएँ और हस्तशिल्प भी भेजे जाते हैं। कृषि उत्पादों में भारत अमेरिका को बड़ी मात्रा में चावल का एक्सपोर्ट करता है। कुल मिलाकर अभी भारत के लिए सदमे की स्थिति है। लेकिन भारत अपनी आर्थिक नीतियों को घरेलू अर्थव्यवस्था को बढ़ाने वाली नीतियां बनाकर इस घाटे से ऊबर सकता है। इस स्थिति में भारत में जीएसटी की मैक्सिमम स्लैब दरें 15% से अधिक नही होनी चाहिए, डीजल के दामों में तुरंत प्रभाव से कटौती होनी चाहिए, देश में महंगी टोल दरों को घटाया जाना चाहिए। आवश्यक सुधार के लिए वह सभी जरूरी कदम उठाने चाहिए, जिससे देश में उत्पादन लागत दरें कम हो, बेहतर ट्रांसपोर्टेशन हो इन सभी बातों के लिए सरकार को बड़ा दिल दिखाना होगा।