लखनऊ में सपा पार्षद को 100 मीटर घसीटा, फिर किया अरेस्ट, वाल्मीकि समाज ने घेरा थाना, 4 घंटे चला हंगामा
लखनऊ के गाजीपुर इलाके में पार्षद को जबरन गिरफ्तार करने के विरोध में तमाम वाल्मीकि समाज के लोग थाने पर पहुंचकर प्रदर्शन करने लगे। लवकुश नगर के पार्षद सुरेंद्र वाल्मीकि पिछले तीन दिन से प्रदर्शन कर रहे थे। तभी पार्षद को पुलिस ने जबरदस्ती गिरफ्तार कर लिया। जिसके बाद आक्रोषित लोगों ने थाना घेर लिया। प्रदर्शनकारी पार्षद की तत्काल रिहाई की मांग कर रहे थे।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई थानों की पुलिस फोर्स को मौके पर बुलाया गया। एसीपी और डीसीपी स्तर के अधिकारी भी थाने पर मौजूद रहे। यह पूरा मामला बस्तौली गांव के रामचंद्र वाल्मीकि के परिवार से जुड़ा है। रामचंद्र वाल्मीकि ने बताया कि उनका परिवार दशकों से इस घर में निवास कर रहा था। घर खाली कराए जाने के विरोध में परिवार ने दो दिनों तक सड़क पर प्रदर्शन किया था।
प्रदर्शन स्थल पर राजस्व और पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौजूद थे। स्थानीय पार्षद सुरेंद्र वाल्मीकि और एक अधिवक्ता भी प्रदर्शनकारियों के साथ सड़क पर दरी बिछाकर बैठ गए थे और “वाल्मीकि समाज को न्याय दो” के नारे लगा रहे थे। प्रशासन ने घर का सामान बाहर निकलवा दिया था और मकान में ताला लगा दिया।
यह कार्रवाई कोर्ट के आदेश के बाद की गई थी। इस दौरान भी पुलिस प्रशासन, राजस्व टीम और भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा था। महिलाएं और बच्चे सड़क पर बैठकर “दलित समाज को न्याय दो” के नारे लगा रहे थे।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि बिना किसी ठोस कारण के जनप्रतिनिधि को थाने में रोका गया, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। थाने पर जुटे लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और पार्षद को तत्काल रिहा करने की मांग की।
मौके पर स्थिति को संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला जांच के अधीन है और कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद थाना गाजीपुर की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है।
लखनऊ के बस्तौली गांव में वाल्मीकि समाज के एक परिवार ने अपने घर को खाली कराए जाने के विरोध में सड़क पर प्रदर्शन किया। परिवार का आरोप है कि वे लगभग 50 वर्षों से इस मकान में रह रहे थे, जिसे आज अचानक खाली कराया जा रहा है।
कोर्ट के आदेश पर 50 साल पुराने मकान खाली कराया
पीड़ित रामचंद्र वाल्मीकि ने बताया कि उनका परिवार दशकों से इस घर में निवास कर रहा था। प्रदर्शन स्थल पर राजस्व और पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे। स्थानीय पार्षद सुरेंद्र वाल्मीकि और एक अधिवक्ता भी प्रदर्शनकारियों के साथ सड़क पर दरी बिछाकर बैठ गए और “वाल्मीकि समाज को न्याय दो” के नारे लगाए। सैकड़ों की संख्या में लोग इकट्ठा हुए, जिन्होंने बिना बताए घर खाली कराने और रहने के लिए जगह उपलब्ध कराने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक अधिकारी उनकी बात नहीं सुनेंगे, वे वहीं बैठे रहेंगे।
प्रदर्शन कर रहे लोगों के सामने प्रमुख समस्या यह आ गई कि वे लोग अब कहां निकलकर जाएंगे। परिवार के साथ सड़कों पर आने के लिए मजबूर हो गए है। प्रशासन द्वारा घर का सामान बाहर निकलवा दिया गया है। महिलाएं और बच्चे सड़क पर बैठकर “दलित समाज को न्याय दो” के नारे लगा रहे थे। पुलिस प्रशासन, राजस्व टीम और भारी संख्या में पुलिस बल ने यह कार्रवाई की। इस दौरान कई थानों की पुलिस फोर्स मौजूद रही। यह कार्रवाई कोर्ट के आदेश के बाद की गई है और प्रशासन ने मकान में ताला लगा दिया है।