अब इससे ज्यादा क्या कोई खुद को बेनकाब/नंगा, कर सकता है

अखिलेश गुड़ तो खायेंगे, परन्तु गुलगुले से करेंगे परहेज…
लखनऊ। तीन सौ सत्तावन साल पहले काशी में बाबा विश्वनाथ के धाम पर और मथुरा में श्रीकृष्ण के धाम पर हमला कर के उनको लूटने वाले, ध्वस्त कर कब्जा करने वाले मुसलमान लुटेरे/डकैत औरंगज़ेब और उसकी उस डकैती लूट के खिलाफ़ एक शब्द बोलने में जो लोग आज भी मुसलमानों के डर से थरथर काँपते हैं।
वही लोग राम मंदिर में हुई कुछ करोड़ की चोरी पर घड़ों आंसू बहाने का ढोंग पाखंड बेशर्मी से कर रहे हैं। ओवर फ्लो कर रहे गटर की तरह उनके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। याद दिलाना जरूरी है कि साल- 1957 में श्रीनाथ जी के मंदिर से 9.33 किलोग्राम से अधिक सोना चोरी हुआ था। आज जिसकी कीमत लगभग 14 करोड़ रूपये है।
यूनेस्को की रिपोर्ट कहती है आजादी के बाद साल- 1947 से साल- 1989 तक भारत के प्राचीन मंदिरों से देवी देवताओं की 50000 मूर्तियां चोरी हुईं, जिनकी कीमत आज लगभग 70,000 करोड़ से एक लाख करोड़ रुपए आंकी जाती है। 42 वर्ष की इस समयावधि में 38 वर्ष देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर राहुल गांधी के बाप, उसकी दादी और उसके बाप का नाना ही बैठा करते थे।
अखिलेश यादव के बाप ने राम मंदिर को वापस मांग रहे 200 से अधिक राम भक्तों को पुलिस की गोली से मरवा दिया था। लेकिन आज इन लोगों का कलेजा राम मंदिर चोरी पर चाक हुआ जा रहा है, क्या इससे ज्यादा बड़ा ढोंग पाखंड कुछ और हो सकता है ? क्या इससे ज्यादा कोई खुद को बेनकाब/नंगा कर सकता है ? क्योंकि बिना तथ्यों और साक्ष्यों के बात नहीं करता इसलिए।