बीएसए प्रतापगढ़ के कार्यालय में तैनात बीईओ पट्टी का फरमान: शिक्षिकाएँ हर साल बदल-बदल कर व्रत का अवकाश न लें
प्रतापगढ़। खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) पट्टी का एक आदेश जिले में तीखी प्रतिक्रिया का कारण बन गया है। आदेश के अनुसार महिला शिक्षिकाएँ हर वर्ष केवल एक ही धार्मिक अवकाश लें। यदि किसी शिक्षिका ने पिछले वर्ष जीवित्पुत्रिका व्रत पर अवकाश लिया है तो इस वर्ष अहोई अष्टमी पर अवकाश नहीं ले सकतीं। आदेश में लिखा गया है कि महिलाएँ “बदल-बदल कर व्रत का अवकाश नहीं लें।”
सचिव बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा जारी अवकाश तालिका के अनुसार जीवित्पुत्रिका व्रत और अहोई अष्टमी व्रत में महिला शिक्षिकाएं कोई एक व्रत का अवकाश ले सकती हैं, परंतु पिछले वर्ष लिए अवकाश के अनुसार इस वर्ष भी उसी व्रत पर अवकाश लेने को विवश किया जा रहा है।
कानूनी जानकारों ने इस आदेश को संविधान के अनुच्छेद 14, 15(3), 21 और 25 का सीधा उल्लंघन बताया है। उनका कहना है कि यह न केवल समानता और स्वतंत्रता के अधिकारों पर प्रहार है, बल्कि महिलाओं की धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत निर्णय की स्वतंत्रता को भी सीमित करता है।
शिक्षिकाओं ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि व्रत आस्था और श्रद्धा का विषय है, जिसे किसी अधिकारी के आदेश से नहीं बाँधा जा सकता। उन्होंने इस आदेश को “धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रशासनिक अंकुश” बताया है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश अधिकार-सीमा से परे (Ultra Vires) है और इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है। जिला प्रशासन तत्काल इस आदेश की जांच करे और सुनिश्चित करे कि कोई अधिकारी नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप न करे।
कुछ वर्ष पूर्व किसी जनपद में एक मुस्लिम शिक्षिका ने करवाचौथ व्रत का अवकाश लिया था तो बीएसए ने एक दिन का वेतन रोक दिया था। जिस पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बीएसए को कड़ी फटकार लगाई थी और मुस्लिम शिक्षिका का वेतन बहाल कर दिया था। तब से मुस्लिम महिलाएं भी हिन्दू को मिलने वाले व्रत पर अवकाश पर रहती हैं।
खंड शिक्षा अधिकारी पट्टी के रवैए को देखकर लगता है कि कहीं वह ईद, बकरीद और मुस्लिम त्यौहारों पर हिंदू शिक्षकों के लिए विद्यालय खोलने का फरमान न जारी कर दें तथा गुड फ्राइडे और क्रिसमस की छुट्टी ही बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों से समाप्त कर दें।