स्वरचित लूट काण्ड और षड्यंत्र करके अपने ऊपर फायरिंग कराने के आरोपी और षड्यंत्रकारी दोनों आरोपियो को अदालत ने दी जमानत
यक्ष प्रश्न- 1- किसी को झूठे मुकदमें में फंसाने के लिए लूट और जानलेवा जैसा हमला कराने का षड्यंत्र रचना और पुलिस को गुमराह करके झूठा मुकदमा लिखाना एसीजीएम कोर्ट संख्या- 13 प्रतापगढ़ की नजर में अपराध नहीं है।
2- स्वरचित लूटकांड में षड्यंत्रकारी को धन देकर अपने ऊपर दो युवकों से गोली चलवाना ताकि अपनी प्रेमिका को फंसाकर उससे छुटकारा मिल सके। यह भी एसीजीएम कोर्ट संख्या- 13 प्रतापगढ़ की नजर में अपराध नहीं है।
3- दोनों युवक जो किसी तमंचे से फायर किये और घटना स्थल पर पुलिस ने कारतूस के खोखे बरामद भी किये हैं। यह भी एसीजीएम कोर्ट संख्या- 13 प्रतापगढ़ की नजर में अपराध नहीं है। सवाल उठता है कि फिर अपराध किसे माना जाए ?
प्रतापगढ़ के रानीगंज थाना क्षेत्र के पचरास में स्वरचित लूट की घटना और एक षड्यंत्र के तहत अपने ऊपर फायरिंग कराने वाले डॉ. आशीष गुप्ता और इस षड्यंत्र की पटकथा तैयार करने वाले शातिर अपराधी गोलू सिंह उर्फ शेखर सिंह को रानीगंज पुलिस और जिले की स्वाट/सर्विलांस टीम के संयुक्त प्रयास से गिरफ्तार कर लिया गया।
लूट की झूठी कहानी और अपने ऊपर अपने ही आदमियों से गोली चलवाने वाले डॉ. आशीष गुप्ता और उनके साथी गोलू सिंह उर्फ शेखर सिंह जो षड्यंत्र के तहत घटना को अंजाम दिलाये थे। दोनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर उनके खिलाफ रानीगंज में दर्ज मुकदमें में आरोपी बनाकर एसीजीएम की अदालत के समक्ष पेश करने के बाद अदालत ने पुलिस की रिमांड स्वीकार नहीं की, स्व रचित लूट की घटना को स्वीकार न करते हुए सिर्फ साक्ष्य गढ़ने का दोषी माना।
एसीजीएम ने पुलिस से पूछा कि आरोपियों को धारा- 309 (4) का कैसे बना दिया आरोपी ? विवेचक और थाना प्रभारी के जवाब से एसीजीएम संतुष्ट न हुई और आरोपियों को मुचलके पर जमानत दे दिया। ऐसे ही अन्य कई घटनाओं में पुलिस रिमांड को अदालतें स्वीकार कर आरोपियों को जेल भेजा था। एक मामला पट्टी क्षेत्र का है और दूसरा रानीगंज का है, परन्तु इस मामले में एसीजीएम ने अलग ही राय रखी, जिससे पुलिस भी हैरान है।
अदालत ने आरोपियों के खिलाफ पुलिस को विवेचना करने की छूट दी है। वहीं एसीजीएम की अदालत से मुचलके पर दोनों आरोपियों को छोड़ दिया गया। पुलिस ने बड़ी मेहनत से स्व रचित लूटकांड का पर्दाफाश किया, परन्तु पुलिस की सारी मेहनत पर अदालत ने पानी फेर दिया। पुलिस की एक भी दलील एसीजीएम ने नहीं सुनी। पुलिस ने ढाई बजे ही दोनों आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश कर दिया था, परन्तु एसीजीएम जब सभी कोर्ट बंद हो गई तब जाकर अपना निर्णय सुनाया, ताकि पुलिस उक्त मामले में रिवीजन न कर सके।