प्रतापगढ़ में नाले में डूबकर 14 माह के बच्चे की दर्दनाक मौत, नगर पंचायत की लापरवाही पर ग्रामीण आक्रोशित
प्रतापगढ़। जनपद के कुंडा इलाके में गुरुवार सुबह दर्दनाक हादसा हुआ। नगर पंचायत की लापरवाही की भेंट एक मासूम चढ़ गया। जल निकासी के लिए खोदे गए नाले में डूबने से 14 माह के बच्चे की मौत हो गई। बच्चे के परिवार के सदस्यों के साथ ग्रामीणों ने नगर पंचायत पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए आक्रोश जताया है।
हादसे के समय मां घर के काम में व्यस्त थी
कुंडा क्षेत्र के सद्दू का पुरवा तिलौरी गांव निवासी जितेंद्र पटेल ट्रैक्टर चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करता है। उसके दो बेटा व एक बेटी थी।गुरुवार की सुबह वह किसी काम से घर से बाहर निकला हुआ था। घर पर उसकी पत्नी कल्पना देवी घर के काम में व्यस्त थी।
नाले में पुवाल के नीचे डूबा था सुयांश
सुबह करीब 9:00 बजे उसका 14 वर्षीय बेटा सुयांश घर के सामने खेल रहे था खेलते समय वह अचानक गायब हो गया। घर के बाहर जब सुयांश नहीं मिला तो परिवार के लोग व ग्रामीण उसकी खोजबीन करने लगे। इस दौरान वह नगर पंचायत द्वारा जल निकासी के लिए खोदे गए घर के सामने से निकले हुए नाले में बह रहे पुवाल के नीचे डूबा दिखाई दिया।
बेढंगे तरीके से खोदे गए नाले से आक्रोश
नाले में सुयांश को डूबा देखते ही चीख-पुकार मच गई। उसे तत्काल नाले से बाहर निकाल कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुंडा ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने उसे मृत बताया। सुयांश की मौत की खबर सुनते ही मां कल्पना देवी, पिता जितेंद्र कुमार समेत स्वजन करुण क्रंदन करने लगे। भाई को खोने के गम में सात वर्षीय बहन जाह्नवी और पांच वर्षीय सूर्य भी गमगीन थे। ग्रामीणों में बेढंगे तरीके से खोदे गए नाले को लेकर काफी आक्रोश है।
कांपते हाथों से कलेजे के टुकड़े का शव दफनाया
घर में सुयांश के पैदा होने पर खुशियां छा गईं थीं। दो बेटे व एक बेटी का यह परिवार मिलकर रहता था, लेकिन गुरुवार को काल ने मासूम बच्चे के रूप में परिवार की खुशियों को निगल लिया। कांपते हाथों से स्वजन ने कलेजे के टुकड़े का शव मानिकपुर में गंगा की गोद में दफनाया। कुंडा के सद्दू का पुरवा तिलौरी गांव में गुरुवार सुबह जितेंद्र पटेल के डेढ़ साल के बेटे सुयांश की नाले में डूबने से मौत ने सबको गमगीन कर दिया।
मां-बाप का विलाप
अब घर में छोटू की किलकारी की जगह मां-बाप का विलाप सुनाई दे रहा है, जो हर किसी के को झकझोर रहा है। नगर पंचायत द्वारा जलनिकासी के लिए बनाए गए खुले नाले में गिरे बच्चे की जान चली गई। घर वालों की खुशियां व उम्मीदें डूब गईं। मां कल्पना देवी को कभी ऐसे हादसे की कल्पना नहीं रही होगी कि उसके कलेजे के टुकड़े को काल चक्र इस तरह छीन लेगा।
तीन माह पूर्व जन्मदिन मनाया गया था
अभी तीन महीने पहले ही छोटे का जन्मदिन मनाया गया था। जिस हाथ से उसे केक खिलाया था, उन्हीं हाथों से उसको कफन में लपेटना पड़ा। यह देख गांव के लोगों व रिश्तेदारों का भी कलेजा कांप गया। जितेंद्र पटेल के घर के सामने वाले हिस्से के नाले पर तो पटिया रखी थी, लेकिन आगे वह खुला था। नाले पर अगर अन्य स्थानों की जगह पटिया रखी गई होती तो शायद यह घटना न होती।