स्कूल मर्जर पर जीत: बच्चों और अभिभावकों के संघर्ष ने बदला सरकार का फैसला

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सरकारी स्कूलों के विलय के फैसले पर बड़ा बदलाव किया है। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने स्पष्ट किया है कि एक किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित कोई भी स्कूल अब मर्ज नहीं होगा। इसके अतिरिक्त, जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या 50 से अधिक है, उन्हें भी विलय नहीं किया जाएगा।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विद्यालय विलय (स्कूल मर्जर) को लेकर अभिभावकों, छात्रों और शिक्षकों के निरंतर संघर्ष ने आखिरकार रंग ला दिया। राज्य सरकार ने अपने उस निर्णय को वापस ले लिया है, जिसमें एक किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित स्कूलों का विलय किया जाना था।
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत तब हुई जब सरकार ने स्कूलों के मर्जर की योजना लागू की। इसका उद्देश्य संसाधनों का समेकन बताया गया, लेकिन इससे ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों, विशेष रूप से दिव्यांग और बालिकाओं की पढ़ाई पर खतरा मंडराने लगा।
इस निर्णय के खिलाफ माननीय उच्च न्यायालय में दो याचिकाएं दाखिल की गईं, जिन्हें एकल पीठ ने खारिज कर दिया। इसके बाद गुलाबसा नामक एक दिव्यांग छात्रा समेत ज्योति यादव, शिवेंद्र यादव और त्रिभुवन ने न्यायालय में विशेष अपील (SPLA No. 228/2025) दायर की। अधिवक्ता डी.पी. शुक्ला द्वारा मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष मेंशन करने पर इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया।
गुलाबसा ने बाद में याचिका वापस ले ली, क्योंकि उसका मर्ज स्कूल पुराने की अपेक्षा पास था और शिक्षक भी वही थे। परंतु ज्योति, शिवेंद्र और त्रिभुवन का नया स्कूल उनके मूल विद्यालय और घर से डेढ़ किलोमीटर अधिक दूर था। इन बच्चों ने संघर्ष जारी रखा। माननीय मुख्य न्यायाधीश ने अंतरिम आदेश में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए। इस कानूनी लड़ाई को टीम वीआरवन के शिक्षकों ने अपने निजी आर्थिक संसाधनों से समर्थन दिया, वह भी बिना किसी सार्वजनिक चंदे के यह कार्य किया।
इस जन-संघर्ष की गूंज संसद तक पहुंची, जहाँ उत्तर प्रदेश के सांसदों ने इस मुद्दे को पुरजोर ढंग से उठाया। अंततः सरकार को झुकना पड़ा और उसने ऐलान किया कि यदि दो स्कूलों की दूरी एक किलोमीटर से अधिक है, तो मर्ज नहीं होगा। यदि दूरी एक किलोमीटर से कम है और छात्रों की संख्या 50 से अधिक है, तो भी मर्ज नहीं होगा और यदि ग्राम पंचायत में केवल एक स्कूल है, तो वह भी मर्ज नहीं किया जाएगा।
अब केवल उन्हीं स्कूलों का मर्जर होगा, जहाँ 50 से कम छात्र हैं और वहीं पंचायत में कोई पास के स्कूल में उसे मर्ज किया जाएगा। टीम वीआरवन का यह प्रयास शिक्षा के अधिकार की रक्षा का एक प्रेरणास्पद उदाहरण बन गया है। यह एकजुटता और संघर्ष यह दर्शाता है कि यदि बच्चे, अभिभावक और शिक्षक एकजुट हों, तो नीतियों में भी बदलाव संभव है। सरकार को मजबूर होकर अपने निर्णय में बदलाव लाना पड़ेगा।