UP: हरदोई के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) डॉ. अजीत सिंह तत्काल प्रभाव से किये गए निलंबित

हरदोई: BSA डॉ. अजीत सिंह भ्रष्टाचार के आरोपों में निलंबित, 61 शिक्षकों की भर्ती में अनियमितता
हरदोई के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. अजित सिंह को गुरुवार को उत्तर प्रदेश शासन ने निलंबित कर दिया है। उन पर 5 लाख रिश्वत मांगने के आरोप लगे थे। FIR भी दर्ज हुई थी। बीएसए ने डीएम अनुनय झा पर जाल बिछाकर फंसाने का आरोप लगाया था।
डीएम के निर्देश पर टीम ने आकर की थी, जांच
बीएसए पर शिक्षक भर्ती से जुड़े कागजात गायब होने पर लापरवाही का आरोप लगा था। शुरुआती जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है। निलंबन के साथ ही बीएसए को बेसिक शिक्षा निदेशालय से अटैच कर दिया गया है। वहीं विभागीय जांच संयुक्त शिक्षा निदेशक (षष्ठ मंडल) को सौंपी गई है।
दरअसल बेसिक शिक्षा विभाग में 29 हजार शिक्षक भर्ती से संबंधित 61 गणित शिक्षकों की नियुक्ति के मूल डॉक्यूमेंट मिले थे। डीएम अनुनय झा के निर्देश पर मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई गई थी। 19 जून को 5 बजे कमेटी के अध्यक्ष सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह समेत एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रामेंद्र सिंह बीएसए कार्यालय पहुंचे थे। टीम ने यहां भर्ती, नियुक्ति और अन्य महत्वपूर्ण कागजात की जांच की।
जांच में नहीं मिले 61 शिक्षकों के मूल अभिलेख
जांच में सामने आया कि 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े 61 शिक्षकों के मूल कागजात उपलब्ध नहीं हैं। इस मामले में तत्कालीन पटल प्रभारी अनुपम मिश्रा के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया का दायित्व भी बीएसए के ही पास था।
टीम ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बीएसए कार्यालय में भर्ती संबंधी कागजात रखने वाली कई अलमारियों और दो कमरों को सील कर दिया गया था। जांच कमेटी ने 20 जून को अपनी रिपोर्ट में डीएम अनुनय झा को सौंपी। इसमें बीएसए डॉ अजित सिंह को दोषी पाया गया था। इसी रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई।
5 लाख की रिश्वत मांगने पर दर्ज हुई थी एफआईआर
19 जून को बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. अजीत सिंह पर 5 लाख रिश्वत मांगने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप है कि अजीत सिंह ने एजुकेटर भर्ती से जुड़ी एक संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की धमकी देकर 5 लाख रुपए की मांग की थी। संस्था अध्यक्ष ने 2 लाख रुपए ले भी लिए थे।
हालांकि बीएसए ने आरोपों को झूठा बताया। उन्होंने कहा था डीएम अनुनय झा ने जाल बिछाकर मुझे फंसाया है। वह मुझ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते थे, लेकिन साबित नहीं कर पाए। एडीएम प्रफुल्ल त्रिपाठी भी मिले हुए हैं। मुझे बैठकों में गालियां दी गईं। धमकाया गया कि जिला छोड़ दो।
पेंशन फाइल के लिए 20 हजार रिश्वत मांगने, फाइलें घर ले जाने और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भर्ती में देरी के आरोप
डीएम अनुनय झा और एडीएम प्रफुल्ल त्रिपाठी मिलकर मुझे पिछले 4 महीने से मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। मुझे पर भ्रष्टाचार के झूठे आरोप लगवा रहे हैं। मेरे माता–पिता को भी विवाद में घसीट लिया है। कहा था–मेरे खिलाफ की जा रही कार्रवाई एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। मेरे ऊपर जिला छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा है। मेरे खिलाफ भ्रष्टाचार का एक भी सबूत नहीं है। अगर है तो इसे सार्वजनिक किया जाए।
बीएसए ने मांग करते हुए कहा था– भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई फैसले प्रशासनिक स्तर पर लिए गए थे। इसलिए पूरे मामले को एकतरफा नजरिए से देखने के बजाय सभी संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए। निष्पक्ष जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा कि वास्तविक जिम्मेदारी किसकी है और किन परिस्थितियों में निर्णय लिए गए थे।
BSA डॉ. अजीत सिंह आरोपों की सूची…
- भर्ती घोटाला: 61 शिक्षकों की भर्ती और नियुक्ति में अनियमितता बरती गई।
- रिश्वतखोरी: रिटायर्ड शिक्षक की पेंशन फाइल पास करने के लिए 20 हजार रुपये रिश्वत मांगने की शिकायत।
- फाइल गायब: भर्ती से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलें आवास ले जाकर कार्यालय में वापस न करने का आरोप।
- जानबूझकर देरी: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भर्ती प्रक्रिया और काउंसलिंग में जानबूझकर देरी की गई।