विधानसभा चुनाव से पहले जोड़ तोड़ की राजनीति शुरू, भाजपा को बड़ा झटका, पूर्व विधायक राम शिरोमणि शुक्ला ने समर्थकों के संग थामा सपा का दामन
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक राम शिरोमणि शुक्ला को अखिलेश यादव ने लखनऊ में दिलाई पार्टी की सदस्यता…

पूर्व विधायक राम शिरोमणि शुक्ला द्वारा सपा की सदस्यता लेते ही रानीगंज के सियासत में नए समीकरणों पर अन्य दलों के उम्मीदवारों एवं समर्थकों के बीच मंथन हुआ तेज…
प्रतापगढ़। जिले की राजनीति में शनिवार को उस समय हलचल तेज हो गई, जब भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक राम शिरोमणि शुक्ला ने अपने समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। लखनऊ स्थित सपा कार्यालय में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उन्हें विधिवत पार्टी की सदस्यता दिलाई और उनका स्वागत किया। राम शिरोमणि ने अखिलेश यादव को चांदी का मुकुट और भगवान गणेश जी की प्रतिमा को भेंट किया।
नई पीडीए में राम शिरोमणि शुक्ला की सपा में एंट्री से प्रतापगढ़ में कितने ब्राह्मण जुड़ते हैं, ये तो वक्त तय करेगा। फ़िलहाल विधानसभा चुनाव 2027 में समूचे उत्तर प्रदेश में जो समीकरण दिख रहा है, उसमें भाजपा बनाम सपा की ही लड़ाई दिख रही है। इसलिए चुनाव लड़ने के इच्छुक उमीदवार अभी से अपने टिकट का जुआड़ साधने में लग गए हैं। सपा में शामिल हुए राम शिरोमणि शुक्ला भी उसी में से एक हैं।
रानीगंज विधानसभा का नाम पूर्व में बीरापुर विधानसभा था। रानीगंज विधानसभा होने से पहले साल- 2007 से 2012 तक राम शिरोमणि शुक्ला बसपा के टिकट पर पहली बार विधायक निर्वाचित हुए थे। साल- 2012 में सपा से प्रो शिवाकांत ओझा को टिकट मिला और वह राम शिरोमणि शुक्ला को को पटखनी देते हुए रानीगंज से विधायक निर्वाचित हुए और सूबे में अखिलेश सरकर बनी तो वह कैबिनेट मंत्री भी बने।
साल-2017 में सूबे में भाजपा की ऐसी लहर आई कि रानीगंज विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने जमीन से जुड़े कार्यकर्ता धीरज ओझा को टिकट दिया और उन्होंने कैबिनेट मंत्री प्रो शिवकांत ओझा को चुनाव में शिकस्त देकर विधायक निर्वाचित हो गए। हालांकि साल-2017 में राम शिरोमणि शुक्ला बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे और रानीगंज से उम्मीदवार बनना चाह रहे थे, परन्तु उन्हें टिकट नहीं मिला तो वह बागी होकर चुनावी रणभूमि में कूद पड़े थे।
हालांकि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के मान मनौवल पर राम शिरोमणि शुक्ल ने अपना चुनावी प्रचार नहीं किया और नामांकन करने के बाद घर बैठ गए थे। साल-2022 के चुनाव में एक बार फिर राम शिरोमणि शुक्ला के मन में बसपा प्रेम जागा और वह बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चन्द्र मिश्रा को रानीगंज बुलाकर उनकी जनसभा कराई और उन्हें अखिलेश की तरह ही उनका स्वागत किया था, टिकट बंटवारे में उन्हें टिकट नहीं मिला तो वह निराश व हताश हुए थे।
विधानसभा चुनाव के बाद राम शिरोमणि शुक्ल पुनः भाजपा में वापस लौट आये थे। भाजपा में इस बार भी टिकट की लम्बी फेहरिस्त को देखते हुए राम शिरोमणि शुक्ल चुनावी रणनीति को देखते हुए नई राजनीतिक पारी की शुरुवात करने के उदेश्य से सपा का दमन थामा है। अब देखना यह होगा कि सपा के वर्तमान विधायक डॉ आर के वर्मा जो रानीगंज से ही विधायक हैं, उन्हें सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव टिकट देते हैं अथवा उन्हें किसी अन्य विधानसभा से टिकट देते हैं ?
प्रत्येक चुनाव से पहले कुछ पूर्व विधायक इस दल से उस दल में जाते हैं और टिकट न मिलने पर शांत होकर बैठ जाते हैं और समय को देखकर नई राजनीतिक पृष्ठभूमि बनाने का प्रेस करते हैं। कुछ तो जिस दल की सरकार रहती हैं, उस दल में चले जाते हैं और पांच साल तक अपनी राजनीति और अपना ब्यवसाय करते हैं। पूर्व विधायक राम शिरोमणि शुक्ल भी दलबदलू किस्म के नेताओं में शुमार हैं। उम्मीदवार बनने के लिए दल बदलते हैं।
राम शिरोमणि शुक्ला सरीखे नेताओं को टिकट की तलाश होती है और जब टिकट नहीं मिलता तो उस दल से उनकी आस्था खत्म हो जाती है। कुछ लोग राम शिरोमणि शुक्ला के सपा में शामिल होने को प्रतापगढ़ की सियासत में भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। खासकर रानीगंज क्षेत्र में उनके राजनीतिक प्रभाव और समर्थकों के बीच पकड़ को देखते हुए इस दल-बदल ने आगामी चुनाव को लेकर नए सियासी समीकरणों की चर्चा छेड़ दी है।
पूर्व विधायक राम शिरोमणि शुक्ला पेशे से अधिवक्ता हैं और इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं। वह रानीगंज विधानसभा क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर पहली बार बसपा की लहर में विधायक चुने गये थे। क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ और लंबे समय से सक्रिय राजनीतिक संपर्कों के चलते उनके सपा में जाने को महज व्यक्तिगत राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि क्षेत्र की राजनीति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
सपा में शामिल होने के दौरान उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थक भी मौजूद रहे। अखिलेश यादव की मौजूदगी में हुए इस घटनाक्रम के बाद सपा खेमे में उत्साह है, वहीं भाजपा के लिए इसे संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण झटका माना जा रहा है। अब देखना होगा कि राम शिरोमणि शुक्ला के सपा में आने का असर रानीगंज की राजनीति पर कितना पड़ता है और आगामी चुनाव में इसका लाभ समाजवादी पार्टी को कितना मिल पाता है ?