अध्यक्ष/नियंत्रक प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ ने नजूल सरकार की सम्पत्ति पर किये गये अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण का दिया आदेश

अवैध कब्जाधारक सुल्तान हसन नोटिस प्राप्त होते ही हाईकोर्ट इलाहाबाद खंडपीठ खंडपीठ लखनऊ की ली थी, शरण
प्रतापगढ़। तहसील सदर, जनपद प्रतापगढ़ के राजस्व ग्राम बेल्हाघाट स्थित गाटा संख्या-1016 की भूमि पर विपक्षी द्वारा बिना स्वीकृत मानचित्र एवं सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना कराये गए निर्माण कार्य को पहले नियत प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ ने अवैध मानते हुए उसके ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। अवैध निर्माण करने वाले सुल्तान हसन के पास राजस्व ग्राम बेल्हाघाट स्थित गाटा संख्या-1016 की भूमि का स्वामित्व का कोई वैध अभिलेख नहीं थे। इसलिए सुल्तान हसन द्वारा प्रस्तुत अपील में नियत प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ का आदेश बरकरार रखा और अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के लिए 15 दिन का समय निर्धारित किया है।

सदर तहसील के राजस्व गाँव बेल्हाघाट की गाटा संख्या- 1016 राजस्व अभिलेखों में नजूल सरकार के रूप में है, दर्ज
राजस्व ग्राम बेल्हाघाट स्थित गाटा संख्या-1016 की भूमि के संबंध में पूर्व में विभिन्न न्यायालयों में वाद संस्थित हुए। परन्तु उक्त संपत्ति वर्तमान में भी सरकारी अभिलेखों में नजूल सरकार की भूमि के खाते में दर्ज है। नजूल सरकार की भूमि पर राम नारायन रावत और उनके बेटे गोपाल रावत व लालजी रावत से दुरभि संधि करके मोहिउद्दीन व उनके बेटे सुल्तान हसन ने उसे हथियाने के लिए एक किरायेदारी का मुकदमा न्यायालय में किया। चूँकि उक्त नजूल सरकार की भूमि पर गोपाल हिन्दू होटल संचालित होता था। लिहाजा मोहिउद्दीन व उनके बेटे सुल्तान हसन मकान मालिक बन गए और राम नारायन रावत और उनके बेटे गोपाल रावत व लालजी रावत को अपना किरायेदार बना लिया।

मानचित्र, निर्माण अनुमति अथवा सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रदत्त स्वीकृति प्रस्तुत नहीं की गयी
नजूल भूमि पर किये गये अवैध निर्माण की शिकायत पर तथ्यात्मक परीक्षण हेतु अवर अभियन्ता, विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ से स्थल निरीक्षण कर आख्या आहूत की गयी। तदनुसार अवर अभियन्ता द्वारा दिनांक- 25.04.2026 को निरीक्षण कर प्रस्तुत आख्या में उल्लेख किया गया कि संबंधित स्थल पर बिना स्वीकृत मानचित्र एवं सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के निर्माण कार्य किया जा रहा है। उक्त आख्या के आधार पर दिनांक- 11.05.2026 को उत्तर प्रदेश भवन संचालन विनियमन अधिनियम, 1958 की धारा-10 के अंतर्गत विपक्षी को कारण बताओ नोटिस निर्गत किया गया। नोटिस के अनुपालन में विपक्षी द्वारा लिखित उत्तर प्रस्तुत किया गया, जिसमें कहा गया कि उसके द्वारा कोई नया निर्माण नहीं।

अवर अभियन्ता की रिपोर्ट, तहसीलदार की आख्या को आधार मानकर ध्वस्तीकरण की कार्यवाही का नियत प्राधिकारी ने दिया था, आदेश
उत्तर प्रदेश भवन संचालन विनियमन अधिनियम, 1958 की धारा-10 के अंतर्गत यदि किसी भवन का निर्माण, पुनर्निर्माण अथवा भौतिक परिवर्तन बिना आवश्यक स्वीकृति के किया जाता है, तो विहित प्राधिकारी ऐसे निर्माण के विरुद्ध आवश्यक आदेश पारित कर सकता है। उपलब्ध अभिलेखों, अवर अभियन्ता की रिपोर्ट, तहसीलदार की आख्या तथा विपक्षी को दिए गए अवसरों पर विचार करने के उपरान्त मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचती हूँ कि विपक्षी द्वारा संबंधित स्थल पर बिना विधिक स्वीकृति प्राप्त किए निर्माण कार्य कराया गया है। नियत प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ के आदेश के खिलाफ डॉ सुल्तान हसन ने अध्यक्ष/नियंत्रक प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ के यहाँ अपील दाखिल किया था।

15 दिनों में अवैध निर्माण को हटाया जाये, अन्यथा की दशा में इस पर होने वाला समस्त व्यय विपक्षी से भू-राजस्व की भाँति किया जाएगा, वसूल
चूँकि संबंधित भूमि राजस्व अभिलेखों में नजूल भूमि के रूप में दर्ज है तथा विपक्षी द्वारा निर्माण हेतु कोई स्वीकृत मानचित्र अथवा सक्षम प्राधिकारी की अनुमति प्रस्तुत नहीं की गयी है। उक्त निर्माण नियमितीकरण अथवा कम्पाउण्डिंग के योग्य नहीं पाया जाता। फलस्वरूप धारा-10, उत्तर प्रदेश भवन संचालन विनियमन अधिनियम, 1958 के अंतर्गत अनधिकृत निर्माण को हटाया जाना आवश्यक है। धारा-10, उत्तर प्रदेश भवन संचालन विनियमन अधिनियम, 1958 के अंतर्गत यह आदेशित किया जाता है कि विपक्षी उक्त अनधिकृत निर्माण, जिसमें निरीक्षण आख्या में वर्णित टिन शेड एवं अन्य अनधिकृत निर्माण भाग सम्मिलित हैं, को इस आदेश की तिथि से 15 दिवस के भीतर स्वयं हटाना सुनिश्चित करे।

विपक्षी का यह कथन कि केवल मरम्मत का कार्य किया गया है, उपलब्ध तकनीकी आख्या एवं निरीक्षण प्रतिवेदन से पुष्ट नहीं होता – उप जिला मजिस्ट्रेट, सदर प्रतापगढ़
उप जिला मजिस्ट्रेट एवं नियत प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ ने दिनांक- 23/06/2026 को अपने आदेश में उल्लेखित किया है कि निर्धारित अवधि में अनुपालन न किए जाने की दशा में संबंधित अनधिकृत निर्माण को नियमानुसार हटाया जाएगा तथा इस पर होने वाला समस्त व्यय विपक्षी से भू-राजस्व की भाँति वसूल किया जाएगा। उक्त आदेश के खिलाफ सुल्तान हसन ने अध्यक्ष/नियंत्रक प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ के यहाँ दाखिल किया था, जिसमें दिनांक- 17 अगस्त, 2026 को आदेश पारित करते हुए नियत प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ के आदेश दिनांक- 23/06/2026 को यथावत रखा और आदेश दिनांक- 17 अगस्त, 2026 से 15 दिवस के भीतर विपक्षी को अनाधिकृत निर्माण को स्वयं से हटाना सुनिश्चित किया जाए।