सनकी प्रेमी का खूनी इश्क: शादीशुदा प्रेमिका की कुल्हाड़ी से की हत्या, पति बोला- भागता नहीं तो बेटे को भी मार डालता
उन्नाव जिले के सफीपुर कोतवाली क्षेत्र में शादीशुदा प्रेमिका के घर पहुंचे युवक ने मारपीट कर जमीन पर गिरा दिया और कुल्हाड़ी से उसकी गर्दन पर ताबड़तोड़ वार कर हत्या कर दी। घर के बाहर शौचालय में मौजूद पति भागा तो हत्यारा उसी घर के एक कमरे में छिप गया। पति ने बाहर से कमरे की कुंडी लगा दी और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने हत्यारोपी को कुल्हाड़ी सहित गिरफ्तार कर लिया। मृतका के पति की तहरीर पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई है। सफीपुर कस्बे के मोहल्ला बाकरगंज निवासी राम सिंह की पत्नी रिंकी (40) तीन साल पहले होली के दिन अपने तीन बच्चों और पति को छोड़कर पड़ोसी अनिल के साथ चली गई थी। दोनों उन्नाव शहर में किराए का कमरा लेकर साथ रहने लगे।रिंकी एक फैक्टरी में काम करती थी और अनिल फल का ठेला लगाता था। एक माह पहले अनिल से अनबन होने पर रिंकी अपने पति व बच्चों के पास लौट गई थी। वह दोबारा अनिल के साथ नहीं रहना चाहती थी, लेकिन अनिल लगातार उस पर साथ रहने का दबाव बना रहा था। अनिल ने दस दिन पहले चंडीगढ़ में रह रहे अपने परिचित सुरजन के घर की चाभी ले ली।
कमरे में वह अक्सर आने-जाने लगा…
राम सिंह ने कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर लिया और पुलिस को घटना की जानकारी दी। कोतवाली प्रभारी श्याम नारायण सिंह फोर्स के साथ पहुंचे और मामले की जांच की। हत्यारोपी को गिरफ्तार करते हुए कुल्हाड़ी भी बरामद की। मृतका की बड़ी बेटी अंशिका का विवाह हो चुका है। बड़ा बेटा रवि मुंबई में और छोटा आयुष यहां पिता के साथ रहता है।
भागता नहीं तो बेटे को भी मार डालता…
प्रेम-प्रसंग के साथ रुपयों का लेनदेन भी वजह…
पूछताछ में हत्यारोपी अनिल ने पुलिस को बताया कि तीन साल पहले जब रिंकी उसके साथ जाने को राजी हुई तब उसने पैसों के लिए अपनी जमीन बेची थी। उसका एक लाख तीन हजार रुपये उसने रिंकी को रखने को दिया था लेकिन जब वह अपने पति के साथ चली गई, तो पैसों की मांग कर रहा था। रिंकी उसके पैसे नहीं लौटाना चाहती थी। उसने मिलना तो दूर बात तक करना बंद कर दिया था।
हत्यारोपी तीन महिलाओं से कर चुका था विवाह…
हत्यारोपी अनिल ने पुलिस को बताया कि उसने तीन विवाह किए लेकिन कुछ दिन बाद सभी उसे छोड़कर चली गईं। उसके बाद पड़ोसी रिंकी उसके संपर्क में आई। वह साथ जाने को राजी हुई तो उसे लेकर पहले लखनऊ, फिर दिल्ली गया। वहां काम न मिलने पर उन्नाव आकर रहने लगा। रिंकी ने फैक्टरी में मजदूरी की और हत्यारोपी फल का ठेला लगाकर जीवन यापन करने लगा।