श्रीराम कथा कराकर राजनीतिक पारी प्रारंभ करने की योजना बना रहे हैं, कथा आयोजक आनंद पाण्डेय
प्रतापगढ़। देश ही नहीं विदेशों में कुंडा का नाम यदि विख्यात हुआ तो वह राजा भईया की वजह से… कहावत भी है कि बदनाम होंगे तो क्या नाम नहीं होगा। फिल्म लावारिश में एक गीत भी है, जिसकी बोल है- जो है नाम वाला, वही तो बदनाम है।
कुंडा का एक गाँव परानुपुर है। इसी गाँव के आनंद पाण्डेय हैं जो देश की राजधानी मुंबई में ब्यवसायी हैं। कुंडा में भी उन्हें कम लोग ही जानते रहे। परन्तु ईश्वर ने उन्हें दौलत दिया तो वह उसी दौलत के जरिये अंतर्राष्ट्रीय कथा ब्यास श्री राजन जी महराज के मुखारविंद से अपने पैतृक गाँव परानुपुर में श्री राम कथा का आयोजन आज के दो वर्ष पहले गोवा में श्री राजन जी महराज के समक्ष अपना प्रस्ताव रखा और श्रीराम कथा के आयोजन का संरक्षक स्वयं राजा भईया को बनाया।
दौलत तो बहुत लोगों के पास है। दौलत का सही इस्तेमाल हर इंसान नहीं कर पाता। दौलत होने से बात नहीं बनती, बल्कि उसे बिना झिझक खर्च करने की कला इंसान में होनी चाहिए। शायद वह कला आनंद पांडेय में है। प्रतापगढ़ में पहले भी ऐसे कई लोगों का उदय हुआ और वह धार्मिक काम करवाकर राजनीति में आना चाहे, परन्तु वो सफल न हो सके। फिर वह अपने ब्यवसाय में लग गए और राजनीति को साइड लाइन रख दिया।
इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि परानुपुर का नाम आज विख्यात हुआ तो वह आनंद पांडेय की वजह से हुआ। यह भी उतना ही सच है कि परानुपुर के साथ-साथ आनंद पांडेय का नाम हुआ तो वह परानुपुर में श्रीराम कथा का आयोजन कराकर ही संभव हो सका है। श्रीराम कथा का आयोजन बहुत सूझ-बूझ के साथ आनंद पांडेय ने गोवा में एक कथा के दौरान कथा ब्यास श्री राजन जी महराज से ये कहकर लिया कि वह श्रृंगबेरपुर धाम से हैं।
यही नहीं श्रृंगबेरपुर धाम और राजा भईया का नाम भी आनंद पांडेय ने एक सोची समझी राजनीति के तहत लिया। ताकि कथा ब्यास श्री राजन जी महराज के दिलोदिमाग पर उसकी गहरी छाप पड़े और कथा का समय अतिशीघ्र मिल सके। हुआ भी वही, कथा ब्यास राजन जी महराज ने आनंद पांडेय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। श्री राजन जी महराज भी चाहते थे कि उन्हें श्रृंगबेरपुर धाम में राजा भईया के संरक्षण में कथा कहने का अवसर प्राप्त हो।
अपने पैतृक गाँव परानुपुर में श्रीराम कथा का आयोजन कराकर परानुपुर का नाम आनंद पांडेय इस समय सुर्खियों में है। वजह कथा ब्यास श्री राजन जी महराज द्वारा अमृत रूपी श्रीराम कथा का सोपान कराकर क्षेत्र ही नहीं बल्कि अगल बगल के जिलों से भी श्रीराम कथा के प्रेमियों को परानुपुर बरबस खींच लाया। श्रद्धा भाव से लोग बिना आमंत्रण के ही श्रीराम कथा में पहुँचे। वजह कथा ब्यास राजन जी महराज के मुखारविंद से कथा का सोपान करना ही कथा प्रेमियों का एक मात्र लक्ष्य था।
अभी श्रीराम कथा के विश्राम में दो दिन शेष बचे हैं। करवा चौथ के दूसरे दिन यानि 11 अक्टूबर से कथा प्रारम्भ हुई। 19 अक्टूबर को कथा विश्राम ले लेगी। इसीबीच सोशल मीडिया में ये बातें होने लगी कि आनंद पांडेय कथा के बहाने फेमस होना चाहते थे। असल उद्देश्य उनका राजनीति में प्रवेश करना है। वह विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। कम से कम श्रीराम। कथा का समापन तो होने देते। फिर जमाने को बताते कि हम भी चुनाव लड़ना चाहते हैं।
श्रीराम कथा अभी विश्राम भी नहीं ली और राजनीतिक पटकथा की शुरुआत हो चली है। क्या राजा भईया बनना चाहते हैं, आनंद पांडेय ? श्रीराम कथा के आयोजन में राजा भईया समर्थक और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक से जुड़े पदाधिकारी और कार्यकर्त्ता भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते दिखे। राजा भईया के बेटे शिवराज सिंह भी कथा स्थल पर कथा के आयोजक आनंद पांडेय के बगल बैठे दिखे थे। फिलहाल 7 दिन की कथा के बीच राजा भईया अभी कथा स्थल तक नहीं पहुँच सके हैं।
राजनीति करना कोई बुरी बात नहीं। परंतु श्रीराम कथा के माध्यम से राजनीति में आना और चुनाव लड़ना ये अच्छी बात नहीं। श्रीराम कथा कराने से कोई समाज सेवक नहीं हो जाता। न ही चुनाव लड़ने से कोई राजनेता बन जाता है। राजनेता बनने के लिए भी क्षेत्र की जनता के समक्ष तपस्या करना पड़ता है। समाज सेवक बनने के लिए भी जनता के बीच मे सेवा करना पड़ता है। ऐसे तो समाज में पहले से ही हर दसवां घर में एक समाजसेवक बन कर समाज में घूम रहा है।