देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि मिली जो किसी सौगात से कम नहीं। देश के नागरिकों में खुशी की लहर। सिंधु नदी का पानी अब पाकिस्तान नहीं, बल्कि देश के अंदर मरुस्थल का दंश झेल रहे राजस्थान की धरती को मिलेगा।
भारत ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए सिंधु जल संधि को हमेशा के लिए निलंबित कर दिया है। गृहमंत्री अमित शाह ने साफ शब्दों में कहा है – “संधि को अब कभी बहाल नहीं किया जाएगा।” पाकिस्तान की हरकतों के चलते जो पानी दशकों से मुफ्त में जा रहा था, अब उसी पानी से राजस्थान की बंजर धरती हरी-भरी होगी।
सरकार ने तय किया है कि सिंधु और चिनाब जैसी पश्चिमी नदियों का पानी अब नहरों के ज़रिए श्रीगंगानगर तक पहुंचाया जाएगा। जलशक्ति मंत्रालय ने इस दिशा में काम भी शुरू कर दिया है। 200 किलोमीटर लंबी नहरें और 12 सुरंगें बनेंगी, जो पाकिस्तान की तरफ जाने वाले पानी को मोड़कर भारत में उपयोग करेंगी।
गृहमंत्री शाह ने पहले भी कहा था कि तीन साल के भीतर राजस्थान तक सिंधु का पानी पहुंचेगा, जिससे लाखों किसानों को सिंचाई की सुविधा मिलेगी और हर बूँद देश के काम आएगी। अब न तो पाकिस्तान को एक बूँद पानी मिलेगा, और न ही भारत किसी पुराने समझौते के बोझ तले दबेगा।
ये सिर्फ एक नीतिगत बदलाव नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की तरफ एक बड़ा कदम है। अब सिंधु का पानी भारत का है और भारत ही इसे तय करेगा कि उसे कहाँ और कैसे बहाना है। राजस्थान को उसका अधिकार मिलने जा रहा है और पाकिस्तान को अब पानी के लिए तरसना पड़ेगा।