अयोध्या के पगलाभारी गांव में मलबे को हटाने के दौरान हुआ धमाका । उत्तरप्रदेशआयोध्या सड़क के पार जाकर गिरी लाश, खेतों में गिरा घर का सामान; मलबे में दफन धमाके के कई राज By Khulasa India News Desk Last updated Oct 11, 2025 104 अयोध्या के पूराकलंदर के पगलाभारी में हुए विस्फोट के बाद 24 घंटे तक बचाव कार्य चला। इस दौरान गांव में जगह-जगह बैरिकेडिंग रही। ग्रामीणों में बारुद से धमाके की चर्चा होती रही। अयोध्या के पूराकलंदर के पगलाभारी में हुए विस्फोट के बाद 24 घंटे बाद भी बचाव कार्य जारी रहा। इस दौरान पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया। बगैर अनुमति किसी को भी नजदीक फटकने नहीं दिया गया। अभी भी घटना के वास्तविक राज मलबे में दबे हैं और पुलिस नमूनों की रिपोर्ट न मिलने की बात कह रही है। पगलाभारी निवासी रामकुमार गुप्ता के मकान में बृहस्पतिवार की शाम 07:30 बजे तेज धमाका हुआ था। विस्फोट की तीव्रता इतनी थी कि कई किलोमीटर तक इसकी तेज आवाज सुनी गई। ग्रामीणों ने विस्फोट की तीव्रता से दीवारें हिलने का दावा किया। उधर, विस्फोट के बाद रामकुमार सड़क के उस पार स्थित खेत में जा गिरा। मकान की छत उड़ गई। घर के सारे सामान सौ मीटर दूर तक आसपास के खेतों में पहुंच गए। घटना के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस ने रेस्क्यू शुरू किया। मलबे के नीचे दबे चार लोगों को बाहर निकाला गया। जेसीबी से मलबा हटाने का सिलसिला शुरू हुआ, जो रात तक चलता रहा। युवती की लाश रात तक न मिलने पर सुबह फिर रेस्क्यू शुरू हुआ, जो शाम तक जारी रहा। प्रभारी मंत्री ने परिजनों को बंधाया ढांढस पगलाभारी में हुए विस्फोट में मृतक राम सजीवन निषाद का शुक्रवार की देर शाम नंदीग्राम भरतकुंड के अंत्येष्टि स्थल पर अंतिम संस्कार किया गया। शाम को प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही मृतक के घर पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया। साथ ही आर्थिक सहयोग दिलाने का आश्वासन दिया। एसडीएम ने बताया कि मृतक के परिजनों को मुख्यमंत्री किसान दुर्घटना बीमा के तहत पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद के लिए फाइल तैयार की गई है। मृतक राम सजीवन का परिवार गरीब है। पुलिस की लापरवाही से हुई घटना: अवधेश प्रसाद पगलाभारी में हुए विस्फोट के बाद सांसद अवधेश प्रसाद शुक्रवार की दोपहर घटनास्थल पहुंचे और मामले की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने कहा कि पहले भी रामकुमार पटाखों का कारोबार करते थे। गत वर्ष घटना होने पर गांव के दबाव से वह गांव के बाहर मकान बनाकर रहने लगे। बाहर आने पर वह बड़े पैमाने पर वही धंधा करने लगे। थाने पर आठ नंबर रजिस्टर होता है, जिसमें इसका नाम भी दर्ज रहा होगा तो पुलिस को इसकी गतिविधियों की निगरानी करनी थी। थाने से तीन किलोमीटर दूरी पर बड़े पैमाने पर इस तरह काम हो रहा था, जो पुलिस की कार्यशैली को संदिग्ध बताता है। पुलिस की लापरवाही से ही इस तरह की घटना हुई है। पुलिस ने इस पर सख्ती की होती तो छह लोगों की जान न जाती। पहले भी सिलिंडर से विस्फोट के किए जाते रहे दावे गतवर्ष हुए विस्फोट के बाद भी तत्कालीन एसपी सिटी मधुबन सिंह सिलिंडर फटने से घटना की जानकारी देते रहे। जबकि, अमर उजाला की पड़ताल में उस समय एक सिलिंडर सही-सलामत रखा मिला था। उसमें रेगुलेटर भी लगा था। स्थानीय गैस एजेंसी संचालक से बात की गई तो उसने भी रामकुमार का एक ही सिलिंडर का कनेक्शन होने की जानकारी दी थी। तब भी सिलिंडर फटने की बात ग्रामीणों के गले नहीं उतर रही थी। सौ मीटर दूर रोक लिए मीडिया कर्मियों के वाहन घटना के बाद से ही पुलिस ने घटनास्थल को अपने कब्जे में ले लिया। सुबह छह बजे से लोग घटनास्थल की तरफ कूच करने लगे, लेकिन जगह-जगह बैरिकेडिंग होने से लोगों को लौटना पड़ा। ग्रामीण भी रास्ता बदलकर आवागमन करने को विवश हुए। मीडिया के वाहनों को घटनास्थल से लगभग सौ मीटर दूर रोक लिया गया। कार्ड दिखाकर उन्हें पैदल जाने की अनुमति दी गई, लेकिन मकान से पहले ही रस्सा लगाकर फिर से रोक लिया गया। घटना छिपाने की होती रही पुरजोर कोशिश घटना के बाद से ही कई जगहों पर पुलिस मामले को दबाने की कोशिश करती दिखी। दोपहर लगभग 12 बजे मलबे के नीचे छठे शव की सूचना मिली। सभी मीडियाकर्मी मौके पर पहुंचे, लेकिन उन्हें शव से लगभग 50 मीटर की दूरी पर रोक लिया गया।शव ले जाने आई एंबुलेंस को उत्तर-दक्षिण में खड़ा कर दिया गया। एक अन्य एंबुलेंस को भी उसी के बगल खड़ा करवाया जाने लगा तो मीडियाकर्मियों ने विरोध जताया। बाद में जेसीबी और मलबे की आड़ में ही शव को पैक किया गया और सीधे एंबुलेंस में लादकर ले जाया गया। किसी भी मीडियाकर्मी को शव देखने तक की अनुमति नहीं मिली। बचाव कार्य के दौरान हुआ दूसरा धमाका, लेखपाल गंभीर घायल अयोध्या के पूराकलंदर इलाके के पगलाभारी गांव में बृहस्पतिवार शाम हुए पहले धमाके के चार घंटे बाद बचाव कार्य के दौरान फिर धमाका हुआ। धमाका इतना जबर्दस्त था कि 50 मीटर दूर खड़े लेखपाल आकाश सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें लखनऊ के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं 17 घंटे बाद मलबे के नीचे से एक महिला का शव बरामद हुआ। इससे धमाकों में मरने वालों की संख्या छह हो गई है। गांव निवासी रामकुमार गुप्ता के मकान में बृहस्पतिवार शाम तेज धमाका हुआ था। इसमें रामकुमार, उनकी बेटी ईशा (10), बेटा लव (7) और यश (5) के अलावा बीकापुर के लुत्फाबाद बछौली निवासी राम सजीवन की मौत हो गई थी। वहीं, रामकुमार की साली व सुल्तानपुर के कूरेभार क्षेत्र के चंदौर निवासी वंदना (22) मलबे के नीचे दब गई थीं। 11 बजे तक बचाव कार्य के बावजूद वंदना का अता-पता नहीं चला। रात भर उसकी खोज जारी रही। शुक्रवार सुबह से ही जेसीबी से मलबा हटाने का कार्य शुरू हुआ। दोपहर लगभग 12 बजे मलबे के नीचे वंदना दबी मिली। आनन-फानन उसे जिला अस्पताल भिजवाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद से पुलिस गैस सिलिंडर धमाके का दावा कर रही है, लेकिन ग्रामीण मानने को तैयार नहीं हैं। उनके अनुसार ये धमाके बारूद की वजह से हुए हैं। वहीं बचाव कार्य के दौरान दूसरा धमाका कैसे हुआ, इस पर पुलिस का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कारणों का पता चलेगा। प्रथम दृष्टया गैस सिलिंडर से विस्फोट की जानकारी मिली है। बम डिस्पोजल स्क्वायड और फोरेंसिक समेत कई टीमों ने मौके से नमूने लिए हैं। उनकी रिपोर्ट मिलने पर ही तस्वीर साफ होगी।-डॉ. गौरव ग्रोवर, एसएसपी, अयोध्या समाचार 104 Share