चांदी की चेन पहनकर स्कूल गया था छठवीं का छात्र, शिक्षिका ने जमा कराई तो घर आकर फंदे पर झूला
जन्मदिन पर पिता की गिफ्ट दी हुई चांदी की चेन शिक्षक ने स्कूल में जमा कराई तो कक्षा छह के छात्र स्वास्तिक शर्मा (11) ने फंदा लगाकर जान दे दी। एक घंटे बाद दादी घर पहुंचीं तो फंदे पर लटका शव देख चीख पड़ीं। पिता ने बताया कि बेटा कई दिनों से चेन दिलाने की बात कह रहा था। इसलिए 27 मई को उसके जन्मदिन पर चांदी की चेन दिलाई थी। पुलिस ने जांच-पड़ताल कर शव पोस्टमाॅर्टम के लिए भेज दिया। वहीं, स्वास्तिक के हमउम्र दोस्त ने बताया कि वह उसके घर आया था। कह रहा था कि स्कूल में शिक्षक ने उसकी चेन ले ली है। डर रहा था कि पता चलने पर मम्मी मारेंगी। शायद इसी वजह से उसने फंदा लगा लिया।
दादानगर कॉलोनी निवासी चार भाइयों में सबसे बड़े ऋषि शर्मा नमकीन बनाने वाली कंपनी का मार्केटिंग का काम करते हैं। उनकी पत्नी पूजा इलाके के निजी विद्यालय में शिक्षिका हैं। वह पत्नी पत्नी और इकलौते बेटे स्वास्तिक संग नगर महापालिका काॅलोनी में रहते हैं। उनके तीन भाई कृष्णा, सागर, सपा के नगर महासचिव सुकांत व मां शैल घर से कुछ दूर बने दूसरे मकान में रहते हैं। स्वास्तिक गोविंदनगर स्थित श्री मुनि इंटर कॉलेज में कक्षा कक्षा छात्र था। इसे रोजाना सुकांत ही स्कूल से लेने जाते थे। सुकांत के अनुसार, मंगलवार दोपहर स्कूल पहुंचने पर शिक्षक ने उनसे शिकायत की थी कि आपका भतीजा चांदी की चेन पहन कर स्कूल आया है। यह चेन बाहर निकाल कर घूम रहा था, बच्चों की शिकायत पर उसकी चेन उन्होंने लेकर रख ली है। इसे इसकी मां को स्कूल बुलाकर उन्हें ही वापस की जाएगी। बताया कि जरूरी काम से कहीं जाना था तो उन्होंने उसे रुपये देकर घर चले जाने के लिए कहा।
स्कूल से लौटने के करीब एक घंटे बाद पड़ोस में रहने वाली दादी उसे खाना खाने के लिए बुलाने गई थी। कमरे मेें गेट की चौखट से दुपट्टे के फंदे के सहारे मासूम को लटकते देखा तो चीख पड़ीं। पड़ोसी व परिजन बच्चे को आनन-फानन फंदे से उतारकर पहले निजी अस्पताल और फिर हैलट ले गए। वहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के वक्त पिता इटावा और मां स्कूल में पढ़ाने गई थी। दादी के अनुसार रोजाना वह कपड़े बदलकर खाना खाने घर आता था। करीब एक घंटे तक न आने पर वह उसे बुलाने गईं थीं। गोविंदनगर इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि शव बुधवार सुबह पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाएगा। बेटे के आत्महत्या की सूचना जब पिता ऋषि को मिली, वह काम के सिलसिले में इटावा में थे। घर आने पर बेटे का शव देख बिलख पड़े।