स्व. अरुण प्रताप सिंह तो एटीएल स्कूल के बच्चों को स्कूल लाने व छोड़ने के लिए जो जगदीश ट्रेवेल्स की बस लगाई गई थी, उसके वह स्वामी थे, फिर स्कूल के प्रबंधक कैसे बन बैठे...??? उत्तरप्रदेशप्रतापगढ़ जब प्रतापगढ़ जनपद में ATL फैक्ट्री बन्द हो गई तो उस कैम्पस में नियम विरुद्ध कैसे संचालित हो रहा है, ATL स्कूल By Ramesh Tiwari Rajdar Last updated Sep 4, 2023 1,355 एक स्कूल के संचालन में शिक्षा विभाग से लेकर जिला प्रशासन सहित अग्नि शमन से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना पड़ता है, तब कहीं जाकर स्कूल की मान्यता मिलती है, फिर ATL स्कूल की मान्यता नियम-कानून को ताक पर रखकर किसके प्रभाव में आज तक दिया जाता रहा… नब्बे के दशक में बंद पड़ी एटीएल फैक्ट्री के कैम्पस में नियम विरुद्ध ढंग से संचालित होता रहा, ATL स्कूल… उद्योग विहीन जनपद प्रतापगढ़ में बन्द पड़ी एटीएल फैक्ट्री के लिए सांसद संगम लाल गुप्ता परेशान हैं कि उसमें कोई दूसरी इकाई लगाई जाए। इसके लिए वह प्रदेश में योगी सरकार और केंद्र में मोदी सरकार से पत्राचार करके उसके बकाये प्रकरण को समाप्त कराया तो जिले के विकास में कोढ़ जैसा कार्य करने वाले नगरपालिका के अध्यक्ष हरी प्रताप सिंह उसमें पेंच फंसाने के लिए आगे आ गये। हलांकि पूर्व सांसद कुंवर हरिवंश सिंह भी एटीएल परिसर में नए उद्योग की स्थापना के लिए चिंतित थे और उनके द्वारा प्रयास भी किया गया था। परन्तु इस जिले को नर्क बनाने वाले नपाध्यक्ष हरि प्रताप सिंह का परिवार प्रतापगढ़ के विकास में बाधा उत्पन्न करता है। आम जनता में विकास पुरुष बनकर घूमने वाले हरी प्रताप सिंह भाजपा के टिकट पर एक बार प्रतापगढ़ से विधायक रहे और पांच बार स्वयं और एक बार उनकी पत्नी प्रेमलता सिंह नगरपलिका अध्यक्ष निर्वाचित हुई। फिर भी स्वयं का ही विकास किया और जिले के विकास में हर समय रोड़ा अटकाने का कार्य किया है। ताजा मामला बंद पड़ी एटीएल फैक्ट्री का है। नब्बे के दशक में बंद पड़ी एटीएल फैक्ट्री जो अब खंडहर में तब्दील हो चुकी है। बंद पड़ी एटीएल फैक्ट्री के बहुत सारे क्षेत्र में अतिक्रमण भी कर लिया गया है। मामला हाईकोर्ट में चला गया तो कई वर्षों तक वहाँ लटका रहा। अब निस्तारण हुआ तो एटीएल स्कूल के प्रबंधक उसमें पेंच लगाकर उसको रोकने के लिए आगे आये हैं। अब नया मामला उत्पन्न किया गया है। एटीएल की जर्जर बिल्डिंग में जो स्कूल संचालित है, वह मानक की धज्जियां उड़ाकर बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहा है। शासन व प्रशासन सहित शिक्षा विभाग अपनी आँखों पर पट्टी बाँध रखा है। कोई पूँछने वाला नहीं है कि इस जर्जर भवन में एटीएल स्कूल कैसे संचालित किया जा रहा है ? यक्ष प्रश्न यह है कि जब एटीएल फैक्ट्री बन्द हो गई तो एटीएल स्कूल का संचालन कैसे किया जाता रहा ? अब यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि एटीएल स्कूल में पिछले दरवाजे से कूट रचना करके नपाध्यक्ष हरी प्रताप सिंह के भाई स्व अरुण प्रताप सिंह प्रबंध समिति में शामिल होकर एटीएल स्कूल के प्रबंधक बन बैठे और उसका नियम विरुद्ध ढंग से संचालन करने लगे। सवाल उठता है कि एक स्कूल के संचालन में शिक्षा विभाग से लेकर जिला प्रशासन सहित अग्नि शमन से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना पड़ता है। तब कहीं जाकर स्कूल की मान्यता मिलती है। परन्तु एटीएल स्कूल में रसूखदार नपाध्यक्ष हरी प्रताप सिंह के भाई स्व अरुण प्रताप सिंह एटीएल की मान्यता किस आधार पर लेते रहे ये तो वही जाने, परन्तु सिस्टम को वह अवश्य कटघरे में खड़ा कर दिए हैं। आज वह इस दुनिया में जीवित नहीं हैं, परन्तु उनके इस खेल पर लोग सवाल खड़ा कर रहे हैं। लोग सवाल खड़ा कर रहे हैं कि नपाध्यक्ष हरी प्रताप सिंह के भाई स्व अरुण प्रताप सिंह एटीएल स्कूल के प्रबंधक कैसे बन कर उसका संचालन करने लगे ? अरुण प्रताप सिंह तो एटीएल स्कूल के बच्चों को स्कूल लाने व छोड़ने के लिए जो जगदीश ट्रेवेल्स की बस लगाई गई थी, उसके वह स्वामी थे। आज भी छोटे-छोटे बच्चे एटीएल स्कूल में पढ़ते हैं। उनके अभिभावक भी स्कूल कैम्पस में जाते हैं। अपने बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ कोई दूसरा करे तो एक बार समझ मे आता है, परन्तु स्वयं माँ-बाप यदि अपने कलेजे के टुकड़े के जीवन को दाँव पर लगा रहे हैं तो यह बात समझ के परे है। समाचार 1,355 Share