पट्टी गोलाकाण्ड पर पाँच दिन बाद पूर्व मंत्री राजेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह ने तोड़ी चुप्पी, पुलिस प्रशासन को आरोपियों के बराबर का दोषी बताया

भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री मोती सिंह भले ही अपने दुलरुआ प्रमुख सुशील सिंह को कानून हाथ में न लेने की सलाह दे दिया हो, परन्तु एक समय वह भी था, जब पूर्व मंत्री अपने लाव लश्कर के साथ पट्टी कोतवाली में स्वर्गीय पूर्व सांसद सीएन सिंह को पटक-पटक कर मारा था और पट्टी कोतवाली की पुलिस के जवान बाउंड्रीवाल कूदकर तहसील के कैम्पस में जा छिपे थे। जबकि सूबे में सपा की सरकार थी और सीएन सिंह सपा के पूर्व सांसद रहे। पूर्व सांसद सीएन सिंह की तहरीर पर पट्टी कोतवाली में मुकदमा लिखा गया था और उनका मेडिकल मोयना भी हुआ था। पूर्व सांसद सीएन सिंह अपनी ही सरकार में अलग-थलग पड़ गए और मजबूर होकर बसपा में चले गए थे। पूर्व मंत्री मोती सिंह जी सलाह तो अच्छी दिये, परन्तु यह भूल गए कि वो स्वयं कई बार कानून को हाथ में लिए हैं। फिर चेले को नसीहत कैसे दे रहे हैं ? अब चेला भी गुरु की भाँति आगे बढ़ रहा है…

प्रतापगढ़। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पट्टी के जननायक पूर्व मंत्री राजेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह पट्टी गोली कांड के बाद राजधानी लखनऊ से लेकर प्रतापगढ़ तक सारी गतिविधियों पर नजर बनाये हुए थे। कानून को जेब में रखकर दबंग और बेख़ौफ़ अपराधी की तरह सुशील सिंह अपने पोषित गुण्डों के साथ पट्टी के उप निबंधक कार्यालय के अंदर से लेकर सड़क तक आतंक फैलाकर दो लोगों को गोली मारकर सड़क पर लहूलुहान कर बैनामा करने के लिए रजिस्ट्री दफ्तर पहुँचे जमीन के विक्रेता जगन्नाथ विश्वकर्मा को गाड़ी में भर कर अगवा कर ले गए।

ये घटना पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं थी। क्योंकि ब्लॉक प्रमुख सुशील सिंह ने सीधे कानून को ललकारा था और पट्टी में जंगलराज कायम करके पुलिस के लिए सिर दर्द बन गया था। घटना को पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार और प्रयागराज जोन के आईजी अजय मिश्रा ने गंभीरता से लिया और थोड़ी ही देर में पट्टी कोतवाली दोनों अफसर पहुँच गए थे। घटना के समय से ही जनमानस में आम चर्चा होने लगी थी कि हर बार की तरह इस बार भी पूर्व मंत्री मोती सिंह अपने प्रमुख को बचाने का काम करेंगे। जबकि पूर्व मंत्री जी सार्वजानिक रूप से कहा था कि उनके रहते पट्टी में गुंडई नहीं हो सकती, परन्तु यहाँ तो उनका चेला ही गुंडई किया।

पुलिस ने घटना को गंभीरता से लिया और प्रमुख के घर से उनकी गाड़ियां उसी दिन उठा लाई और उनके घरवालों को भी पूंछतांछ के लिए कोतवाली पट्टी उठा लाई। पुलिस का मानना था कि उसके ऐसा करने से प्रमुख सुशील सिंह सरेंडर कर देगा, परन्तु राजनीतिक संरक्षण में जीने वाला प्रमुख सुशील सिंह सरेंडर न करके अपने परिजनों को छुड़ाने में कामयाब रहा। घटना के अन्य आरोपियों को पुलिस ने दबोचना शुरू किया और अगवा किया गया जगन्नाथ विश्वकर्मा को पुलिस ने प्रयागराज से बरामद कर लिया। फिर पुलिस दबंग प्रमुख सुशील सिंह को उठाने के लिए दबिश देना शुरू किया।

अब गिरफ्तारी की बारी घटना के प्रमुख आरोपी सुशील सिंह की थी। पूर्व मंत्री मोती सिंह अपने स्तर से सारी गुणा गणित लगाने के बाद हताश व निराश होकर बैठ गए और इसी बीच राजधानी लखनऊ से प्रमुख सुशील सिंह की गिरफ्तारी पुलिस को करने में सफलता मिल गई। उधर प्रमुख सुशील सिंह का मेडिकल मोयना हो रहा था और इधर पूर्व मंत्री अपने शहर आवास प्रतापगढ़ में दरबार लागए थे। प्रमुख सुशील सिंह के चाचा डॉ राम अवध सिंह भी दरबार में बैठे देखे गए। प्रमुख सुशील सिंह के बहुत सारे समर्थक प्रतापगढ़ से पट्टी पहुँचे थेऔर किसी ने प्रमुख सुशील सिंह किसी की बात भी कराई थी, जो चर्चा का विषय रहा।

गोलीकांड के प्रमुख आरोपी सुशील सिंह के जेल जाने के बाद दूसरे दिन पूर्व मंत्री मोती सिंह अपनी विधानसभा पट्टी भ्रमण के लिए निकले और एक यूट्यूबर के चैनल पर पट्टी गोलीकांड पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पुलिस प्रशासन पर अपनी जमकर भड़ास निकाली। पहले तो पूर्व मंत्री अपने सधे हुए अंदाज में पट्टी गोलीकांड की घटना पर दुःख जताया और स्थानीय पुलिस के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की। पूर्व मंत्री ने कहा कि बाहरी लोगों का जमीनी मामले में हस्तक्षेप करना ही घटना की वजह बनी। जो दो लोग गोलीकांड में घायल हुए हैं, उनकी भी आपराधिक इतिहास है। वो लोग क्या करने आये थे, जबकि वो जमीन नहीं खरीद रहे थे।

पूर्व मंत्री के निशाने पर स्थानीय पुलिसकर्मियों की लापरवाही रही। पूर्व मंत्री का कहना है कि स्थानीय पुलिस अगर सतर्क होती तो ये घटना टाली जा सकती थी। पत्रकार के सवाल पर कि प्रकरण एसपी प्रतापगढ़ डॉ अनिल कुमार के संज्ञान में था, घटना से पहले विक्रेता और क्रेता एसपी प्रतापगढ़ से मिलकर बैनामा कराने में सुरक्षा की मांग की थी। इस सवाल पर तो पूर्व मंत्री मोती सिंह ने कहा कि जब एसपी साहब को घटना से पहले जानकारी थी तो इस बात का बेहतर जबाब वही दे सकते हैं। बातों ही बातों में पूर्व मंत्री मोती सिंह सीओ पट्टी पर भी निशाना साधा और उन्हें भी पट्टी कोतवाल के साथ-साथ घटना का जिम्मेदार माना।

जिला मुख्यालय पर प्रेस कांफ्रेंस न करके पट्टी के एक स्थानीय यूट्यूबर के चैनल पर पूर्व मंत्री जी का साक्षात्कार स्क्रिपटेड लग रहा था। जैसे ही पत्रकार ने सवाल किया कि मंत्री जी पट्टी गोलीकांड का मुख्य आरोपी बाबा बेलखरनाथ धाम के ब्लाक प्रमुख सुशील सिंह तो आपके करीबी माने जाते हैं। पूर्व मंत्री मोती सिंह बड़े सधे हुए अंदाज में चांदा के पूर्व विधायक संतोष पाण्डेय को भी अपना खास बताकर मामले को मोड़ दिया। चूँकि पट्टी गोलीकांड के बाद सोशल मीडिया पर ठाकुर बनाम पंडित होने लगा था। इसलिए पूर्व मंत्री मोती सिंह बहुत ही माप तौलकर अपनी बात रखा।

पूरे साक्षात्कार में पूर्व मंत्री सिर्फ एक बात पर अड़े दिखे कि जब स्थानीय पुलिस सतर्क नहीं रही तो उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई ? पूर्व मंत्री मोती सिंह  तो प्रमुख को बचाने के लिए यहाँ तक कहा कि हो सकता हो कि सुशील सिंह अपने बचाव में गोली चलाई हो। फिर मामले को बैलेंस करते हुए ये भी कहा कि सुशील सिंह को कानून के दायरे में रहकर किसी की मदद करनी चाहिए, न कि कानून अपने हाथ में लेना चाहिए थे। पूरे साक्षात्कार में पूर्व मंत्री मोती सिंह अपने दुलरुआ प्रमुख सुशील सिंह का बचाव करते दिखे और पट्टी स्थानीय पुलिस को गोलीकांड में शामिल आरोपियों के बराबर दोषी करार दिया।

पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ़ डॉ अनिल कुमार ने प्रभारी निरीक्षक पंकज कुमार राय, उप निरीक्षक बैकुण्ठ नाथ पाण्डेय व उप निरीक्षक संतोष कुमार पासवान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। उक्त कार्यवाही क्षेत्राधिकारी पट्टी की जांच/रिपोर्ट के आधार पर कार्य सरकार में लापरवाही, शिथिलिता बरते जाने पर निरीक्षक/उप निरीक्षक उपरोक्त को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। एसपी प्रतापगढ़ ने रानीगंज के कोतवाल अर्जुन सिंह को भी रानीगंज से हटा दिया गया और दर्जनों उप निरीक्षकों का भी कार्य क्षेत्र बदलते हुए बड़े पैमाने पर तवादला कर पुलिसिंग को चुस्त व दुरुस्त बनाये रखने का कार्य किया।

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