जमीनी रंजिश में दो पट्टीदारों के बीच हुई मारपीट में एक किशोर की इलाज के दौरान हो गई, मौत

कंधई पुलिस की घोर लापरवाही हुई उजागर, अपराध संख्या- 0152/2026 के तहत दिनांक-08/07/2026 को समय 17:45 पर यानि शाम 5 बजकर 45 मिनट पर दर्ज किया गया मुकदमा। जबकि प्रवेश पटेल की इलाज के दौरान 4 से 5 बजे के बीच हो गई थी, मौत…
प्रतापगढ़। थाना कंधई क्षेत्रान्तर्गत ग्राम कोनी में दो पट्टीदारों के मध्य भूमि विवाद को लेकर कल दोपहर समय लगभग 12 बजे मारपीट की घटना हुई। घटना की वजह एक पक्ष द्वारा जबरन जमीन पर खूंटा गाड़कर और मेड़ बांधकर कब्जा करने की बताई जा रही है। दूसरे पक्ष से मना करने पर विवाद शुरू हुआ जो मारपीट में तब्दील हो गया।
घटना के चश्मदीद गवाहों ने बताया कि मारपीट करने वाला पक्ष मानो सुनियोजित था। क्योंकि जिस तरह घर में घुसकर माँ और बेटी व बेटे को कुल्हाड़ी, सरिया, रॉड और लाठी से मारकर लहूलुहान कर रहे थे, वह बहुत ही भीभत्स स्वरूप रहा। कंधई थाना क्षेत्र के कोनी गाँव में पटेल विरादरी की घनी बस्ती है। दो पट्टीदारों के मध्य जमीन का विवाद है।
कंधई थाने में दी गई तहरीर जिस पर मुकदमा दर्ज हुआ है, उसके मुताविक पृथ्वीपाल पटेल और सोनू, राहुल और रोहित पुत्रगण स्व रामअचल पटेल के बीच जमीनी विवाद था, जिसका तहसील पट्टी में बँटवारे का मुकदमा चल रहा था। कल उस मुकदमें में पैरवी के लिए पृथ्वीपाल पटेल तहसील पट्टी गया हुआ था। उसे क्या पता कि उसके न रहने पर उसके नाबालिक बच्चों एवं पत्नी को उसके पट्टीदार लोग इस कदर मारपीट करेंगे कि उसके बेटे की जान चली जायेगी।

सुसंगत धाराओं में हत्या की धारा न हो सकी दर्ज, अब विवेचना के दौरान विवेचक हत्या की धारा को जोड़कर घटना की विवेचना करेगा। साथ ही 4 नामजद अभियुक्तों में सोनू, राहुल रोहित व मंजू का नाम FIR में है, दर्ज। मारपीट की घटना में शामिल हीरावती देवी का नाम FIR से है, बाहर…
प्राप्त तहरीर के आधार पर थाना कंधई में सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर विधिक कार्रवाई की जा रही है। इस सम्बंध में अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी आलोक कुमार जी का बयान भी आ चुका है। घटना दोपहर 12 बजे की है। प्रवेश पटेल की मौत 4 से 5 बजे के बीच हो जाती है। मुकदमा लिखने का समय शाम 5 बजकर, 45 मिनट का है।
सवाल यह है कि घटना के बाद भी क्या कंधई पुलिस निष्क्रिय थी ? जब घटना की सूचना थाना कंधई को दी गई तब जाकर पुलिस घटना स्थल पर पहुँची थी। कंधई पुलिस के सारे मुखबिर हनीमून मनाने निकल गए थे। तभी तो इतनी बड़ी घटना की जानकारी उसे नहीं हुई।
जब पृथ्वीपाल पटेल कंधई थाना में तहरीर दिये तो उसके बेटे की मौत नहीं हुई थी। उसकी हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई थी। परंतु इलाहाबाद में इलाज के दौरान परिजनों के मुताविक शाम 4 से 5 बजे के बीच प्रवेश पटेल की मौत हो जाती है। जबकि कंधई थाने में दर्ज मुकदमें का समय 5 बजकर 45 मिनट दर्ज है। यानि कंधई पुलिस इतनी बड़ी घटना के बाद भी सक्रिय नहीं हुई।
जानलेवा घटना में गम्भीर रूप से घायलों के संपर्क में नहीं थी। यदि संपर्क में होती तो जानलेवा का मुकदमा लिखने के साथ जघन्य हत्या की घटना की धारा अवश्य जोड़ लेती। वहीं पुलिस की बातों पर यकीन करें तो कंधई थाना में मुकदमा दर्ज करने के बाद प्रवेश वर्मा की प्रयागराज में इलाज के दौरान मौत हुई।
घटना में घायल माँ प्रमिला नाबालिक बेटी प्रतिभा पटेल और नाबालिक बेटा प्रवेश पटेल व बेटा इंद्रेश पटेल का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा था। प्रवेश पटेल की अत्यंत नाजुक थी, जिसे कोहड़ौर CHC से लाने के बाद जिला अस्पताल प्रतापगढ़ से उसे सीधे प्रयागराज स्वरूप रानी हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया। एसआरएन प्रयागराज में उपचार के दौरान प्रवेश पटेल की मृत्यु हो जाती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रवेश पटेल को मोटरसाइकिल से गंभीर हालत में CHC कोहड़ौर क्यों ले जाया गया। फिर वहाँ से उसे एम्बुलेंस से जिला अस्पताल प्रतापगढ़ ले जाया गया। बुरी तरह घायलों को सीधे जिला अस्पताल प्रतापगढ़ क्यों नहीं ले जाया गया ? परिजनों के मुताविक यदि एम्बुलेंस का इंतजार किया जाता तो प्रवेश पटेल की मौत घटना स्थल यानि घर पर ही हो जाती।
अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी आलोक कुमार जी के अनुसार स्थानीय पुलिस द्वारा 03 अभियुक्त को हिरासत में लेकर विधिक कार्यवाही की जा रही है। वहीं पृथ्वीपाल के लड़के प्रवेश वर्मा की ईलाज के दौरान मौत हो जाने के बाद उसके घर पर ग्रामीणों की बड़ी तादात में भीड़ एकत्र हुई है। शव का पोस्टमार्टम प्रयागराज में ही होगा।
अपरान्ह 2 बजे के बाद ही प्रवेश पटेल का शव परिजन घर लेकर पहुंचेगे। फिलहाल घटना के बाद प्रवेश पटेल की मौत से कंधई पुलिस कुम्भकर्णी नींद से जाग गई है। पुलिस अधिकारी भी चौकन्ना हैं। रात में ही कई थानों की फोर्स मृतक प्रवेश पटेल के घर पर तैनात है।
सवाल उठता है कि पुलिस घटना से पहले क्यों सक्रिय नहीं होती ? जब फरियादी थाने अपनी फरियाद लेकर पहुँचते हैं और अपना दर्द बयां करते हैं तो यही पुलिस उसे डॉट कर थाने से भगा देती है। परंतु जब घटना घटित हो जाती है तो यही पुलिस घुटनो पर आ जाती है। आखिर क्यों ?