विधायक के साथ डीएम आवास पहुँची सौरभ विश्वकर्मा की विधवा, डेढ़ बीघे जमीन का मिला कागजात
प्रतापगढ़। चार दिन की लम्बी उठक पटक के बाद मृतक सौरभ विश्वकर्मा के परिअज्नो को लगने लगा कि उनके मामले में कहीं न कहीं राजनीत की जा रही है। उनके परिवार के कंधें पर बन्दूक रखकर फायर करने का काम कुछ लोग कर रहे थे। जातिवादी और पार्टवाद के दलदल में घिरा देख मृतक सौरभ विश्वकर्मा के परिजन को आभास हो गया कि उन्हें क्या करना चाहिए ?
इसलिए अब वह अपने और अपने परिवार की भलाई को समझते हुए आगे की दिशा तय करने में लग गए हैं। उसी कड़ी में मृतक सौरभ विश्वकर्मा के पीड़ित परिवार को जब विश्वनाथगंज विधायक जीत लाल पटेल ने हरसंभव मदद का आश्वासन दिया, तब पीड़ित परिवार उनकी बात पर यकीन करते हुए उनके साथ आज जिलाधिकारी प्रतापगढ़ से मिलने उनके कैम्प कार्यालय पहुँचा।
सत्तापक्ष के सहयोगी दल अपनादल एस के विधायक जीत लाल पटेल ने परिवार को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। विधायक पीड़ित परिवार को लेकर जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय से मिले और परिवार की समस्याओं को उनके समक्ष रखा। मुलाकात के दौरान पीड़ित परिवार को 1.5 बीघा पट्टे का पेपर विधायक जीत लाल पटेल और जिलाधिकारी की मौजूदगी में सौंपे जाने की जानकारी सामने आई।
विधायक ने कहा कि दु:ख की इस घड़ी में पीड़ित परिवार को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और आगे भी उनकी जरूरतों के अनुसार हरसंभव सहयोग किया जाएगा। सौरभ विश्वकर्मा प्रकरण को लेकर जिले में चल रही चर्चाओं के बीच विधायक की इस पहल को पीड़ित परिवार को राहत पहुंचाने वाला कदम माना जा रहा है। विधायक ने भरोसा दिलाया कि परिवार के हितों को लेकर वह आगे भी उनके साथ खड़े रहेंगे।
घटना के दिन से विश्वनाथगंज विधायक जीत लाल पटेल पीड़ित परिवार के साथ चट्टान की तरह खड़े रहे। इसबीच उन्हें कई बार असहज होना पड़ा, क्योंकि स्वजातीय नेता और विपक्ष के नेता लगातार मामले को घुमाकर उसका राजनीतिक लाभ लेना चाहते थे। मृतक सौरभ विश्वकर्मा के मृत होने का उन्हें गम कम था और अपनी राजनीतिक लाभ की चिंता अधिक थी। इसीलिये शासन व प्रशासन को वे लोग टारगेट कर रहे थे।
विश्वनाथगंज विधायक जीत लाल पटेल ने घटना पर दुःख जताते हुए कहा कि कुछ लोग अशांति फैलाने का भरसक प्रयास किये। परन्तु उनका प्रयास सफल न हो सका। घटना के बाद से पुलिस प्रशासन आरोपियों की धर पकड़ के लिए लगातार प्रयास कर रहा था। तीन गिरफ्तारियों के बावजूद विपक्ष के नेता शासन व प्रशासन पर सवाल उठाते रहे और चुनावी रणनीति के तहत विश्वकर्मा समाज का ठेकेदार बनना चाह रहे थे।