
यूपी के कई जनपदों की पुलिस भी महाठग पर अब कर सकती है, बड़ी कार्यवाही…
देहरादून। उत्तराखंड पहले उत्तर प्रदेश का हिस्सा हुआ करता था और बाद में वाजपेयी की सरकार ने उत्तराखंड को नया राज्य बना दिया। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून बनाई गई। उत्तराखंड में चाहे जिसकी सरकार रही हो, वहाँ पर भी यूपी के हरफनमौला किस्म के लोग अपना सिक्का जमाने पहुँच जाते हैं। उत्तराखंड से राज बब्बर 14 मार्च 2015 से 25 नवंबर 2020 तक राज्यसभा सांसद रहे। सिने स्टार राज बब्बर भी महाठग प्रदीप कुमार गोयल के जाल में फंस गए।
साल-2015 से साल-2019 में महाठग प्रदीप कुमार गोयल भी सांसद निधि में गोलमाल करने के उदेश्य से उत्तराखंड के देहरादून गए और वहाँ कांग्रेस के राज्यसभा सांसद राज बब्बर से सम्पर्क किया जहाँ से उन्हें क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए सांसद निधि आवंटित हुई और उसी सांसद निधि में 37.50 लाख रूपये का घपला घोटाला करके प्रदीप कुमार गोयल वहाँ से भाग निकला। अपनी रसूख के बल पर प्रदीप कुमार गोयल लखनऊ में रहकर ठगी का काम करता रहा।
यूपी के कई जनपदों में प्रदीप कुमार गोयल एक फर्म बनाया जिसका नाम रखा इंडियन प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन कोऑपरेटिव लिमिटेड। उक्त फर्म का रजिस्ट्रेशन कराते समय उसका पता चौक बजाजा रोड़ प्रतापगढ़ रखा और स्वयं उसका महाप्रबंधक बना बैठा। प्रदीप कुमार गोयल बहुत ही शातिर और चालाक किस्म का ब्यक्ति है। उसे जब लगा कि वह अब अपने ही जाल में फंस चुका है तो उसने बहुत ही चालाकी के साथ अपने नाम की सम्पत्ति की बिक्री कर डाली।
प्रदीप कुमार गोयल एक सुनियोजित प्लान के मुताबिक पहले अपनी सम्पत्ति बेंची और उससे मिले धन से अपनी पत्नी व बच्चों के नाम सम्पत्ति खरीद दिए, ताकि सरकार महाठग प्रदीप कुमार गोयल से उसकी रिकवरी न कर सके। खुद को दिवालिया बताना, सीएम योगी की ज़ीरो टॉलरेंस नीति और यूपी पुलिस की जांच और कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए महाठग किस हद तक गिर सकता है, इसका एक सामान्य ब्यक्ति कल्पना भी नहीं कर सकता।
इसकी एक बानगी महाठग प्रदीप कुमार गोयल स्वयं है। इस महाठग पर कोई कानूनी प्रक्रिया का निर्धारण न हो सके और यह स्वयं को कानून के शिकंजे से बचाये रह सके, इसके लिए इसने एक बेहद शातिर चाल चली। इसने अपनी सारी काली कमाई और संपत्ति को अपनी पत्नी और बच्चों के नाम कर दिया और खुद को कागज़ों में दिवालिया घोषित कर दिया। पर जानबूझकर दीवालिया बन जाने से क्या महाठग पुलिस की कार्यवाही से बच निकलेगा ?
लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह सब बिना परिवार की मर्जी के संभव है ? ऐसा लगता है कि इस पर बेहद गहन जांच होनी चाहिए। यह सिर्फ एक इंसान का काम नहीं है, बल्कि इस महाठग के परिवार के सभी सदस्य इस ठगी के काले कारोबार में पूरी तरह से संलिप्त हैं। इन सभी के खिलाफ जांच होनी ही चाहिए। राजधानी लखनऊ, बरेली और गोरखपुर सहित दर्जनों जनपदों में महाठग की कारस्तानियों की कलई अब धीरे-धीरे खुलने लगी है।
पूरे उत्तर प्रदेश में इसके खिलाफ निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। जैसा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी हमेशा कहते हैं कि अपराधियों और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ हमारी नीति ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की है तो अब वक्त आ गया है कि इस नीति का चाबुक इस महाठग पर भी चले। सबसे अहम् सवाल यह है कि प्रदीप कुमार गोयल की कई फार्मों को ब्लैक लिस्टेड किया जा चुका है तो ये महाठग नई फर्म बनाकर उससे काम कैसे प्राप्त कर ले लेता है ?
ऐसा लगता है कि अगर इस केस की गहराई से जांच हुई, तो इसमें कई और बड़े लोगों की संलिप्तता सामने आएगी। बाकी सब कुछ जांच अधिकारियों की तफ्तीश पर निर्भर करता है। अब देखना यह होगा कि इस महाठग प्रदीप कुमार गोयल ने किन-किन राज्यों में ठगी का जाल बिछाया है और कहाँ-कहाँ सरकारी धन का गबन किया है ? इसका पूरा खुलासा अब उत्तर प्रदेश की पुलिस ही करेगी।