सिस्टम ही नहीं चाहता कि जनता की समस्या का समाधान समय पर हो जाये, अपनी पूँछ बनाये रखने के लिए की गई है, ऐसी ब्यवस्था
राजस्व टीम की तरफ से नायब तहसीलदार सिटी व नगरपालिका प्रशासन सहित सुरक्षा के लिए आई पुलिस टीम को भी किरायेदार के लड़के शारिफ ने झूठ और फरेब और कागजों के हेरफेर में उलझाकर बैरीकेडिंग होने से कर दिया मना, बैरीकेडिंग के लिए पहुँची टीम हुई वापस…

प्रतापगढ़ के कोतवाली नगर क्षेत्र फलमंडी गेट के सामने अति जर्जर व जीर्ण शीर्ण दुकान जिसकी छत 10 माह धराशाई हो गई थी, जिसके बाद से भवन स्वामी अपने किरायेदार को लगातार दुकान खाली करने के लिए कह रहा है, परन्तु दुकानदार दुकान खाली करने के बजे बजाय उसमें पन्नी डालकर दुकान का संचालन किया और अब बरसात में दुकान में पानी भर जाने के वजह से सब्जी मंडी में दूसरी दुकान किराये पर लेकर खोल दी है।
यदि किरायेदार अपनी दूसरी दुकान किराये के कमरे में खोल दिया है तो उसे स्वेच्छा से पुरानी दुकान जिसकी छत धराशायी हो गई है, उसे खाली कर देना चाहिए। पर दुकानदार के लड़के गुंडे व बदमाश किस्म के हैं और दुकान के मालिक से खाली की गई दुकान से अनाधिकृत रूप से किये गए कब्जे को खाली करने के लिए 10 लाख रूपये का गुंडा टैक्स मांग रहे हैं जो योगी सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
किरायेदार हलीम के चार लड़के आसिफ शारिफ, राही व कैफ अब दुकान के मालिक मतीन की दुकान पर जबरन गुंडई के बल पर आधी शटर गिराकर उसके नीचे तख्त लगाकर शटर को बंद होने से रोक रखे हैं और दुकान के सामने तख्त लगातार गिरी हुई छत का संचालन कर रहे हैं। दुकान में कोई सामान अब नहीं है, दुकान पूरी तरह से खाली हो चुकी है।
किरायेदार के लड़के शारिफ दुकान के मालिक मतीन के सबसे छोटे बेटे मोमिन से 10 लाख रूपये की डिमांड कर रहे हैं कि जब तक 10 लाख रूपये नहीं दोगे तब तक तुम्हारी दुकान खाली नहीं करेंगे। तुम चाहे जो कर लो ! एक किरायेदार के लफंगे लड़के इस तरह मकान मालिक के बेटे से 10 लाख की रंगदारी मांगते हों और उसकी शिकायत मकान मालिक जिला व पुलिस प्रशासन से करता रहे और उस पर कोई कार्यवाही न की जाये। फिर तो इसे जंगलराज मान लेना चाहिए।
इस बात की भी शिकायत भवन स्वामी मतीन ने सूबे के पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश, लखनऊ को शिकायती पत्र लिखकर किरायेदार (दुकानदार) की शिकायत की है। दुकान के स्वामी मतीन ने अपने शिकायती पत्र में यह भी एक ही परिवार के छः लोगों की मौत हो गई है। उसे डर है कि यदि जर्जर दुकान जमींदोज होती है तो जो जनहानि होगी, उसका जिम्मेदार कौन होगा ?
क्योंकि नगरपालिका उसे दिनांक-07/08/2026 को विधिक अंतिम नोटिस सिर्फ तीन दिनों के लिए जारी करके कहा कि इसे तीन दिवस के अंदर गिराने अथवा इसकी बैरीकेटिंग कराने का दायित्व भवन स्वामी का है। यदि इस बीच कुछ होता है तो उसकी जिम्मेदारी भवन स्वामी की होगी। ऐसी दशा में भवन स्वामी क्या करे, जब किरायेदार के लड़के अमादा फौजदारी हो रहे हों। ये तो जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और नगरपालिका प्रशासन के लिए भी शर्म की बात है।
इधर दुकानदार और उनके बदमाश लड़कों की अक्ल पर पर्दा पड़ा हुआ है। उन्हें सिर्फ 10 लाख रूपये की रंगदारी की पड़ी है। उन्हें जान की परवाह नहीं है। यदि उन्हें जान की परवाह होती तो वह जर्जर दुकान के बारजे के नीचे रात में न सोते। यही नहीं दिन में दुकान के बाहर जिस कदर ग्राहकों की भीड़ जमा होती है, उससे जर्जर भवन यदि दिन में जमीदोज होता है तो चंद मिनट में दर्जनों मौत होगी और इसका जिम्मेदार आखिर कौन होगा ?
नगरपालिका परिषद् बेला प्रतापगढ़ की अंतिम विधिक नोटिस देने और स्वयं अधिशासी अधिकारी राकेश कुमार और नगरपालिका की टीम के स्थलीय निरीक्षण करने और दुकान खाली करने एवं दुकान के बाहर की चौकी लगाकर क्षति ग्रस्त भवन के नीचे दुकान करने एवं रात्रि में सोने से स्पष्ट मना करने के बाद भी दुकानदार के गुंडे लड़के नहीं मान रहे हैं।
भवन स्वामी नगरपालिका प्रशासन, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन एवं मंडल के मंडलायुक्त व जोन व रेंज में तैनात एडीजी व आईजी से शिकायत की, परन्तु अभी तक उसे सिर्फ इधर से उधर टहलाया जा रहा है। अपनी जवाबदेही और जिम्मेदारी से मुक्त होने के लिए भवन स्वामी मतीन देश की राष्ट्रपति महोदया, देश के पीएम और केन्द्रीय गृहमंत्री व सूबे के मुखिया व राज्यपाल महोदया सहित मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव गृह (गोपन), राजस्व विभाग, आपदा विभाग, आवास विकास विभाग, नगर विकास विभाग के मुखिया को भी रजिस्टर्ड डाक से प्रार्थना पत्र दिया है, परन्तु देश का सिस्टम सच में सड़ चुका है।
इसीलिये देश की सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सिस्टम सड़ चुका है। सिस्टम में साफ़ सफाई की आवश्यकता है। अभी तक सिस्टम की साफ़ सफाई नहीं हुई और उसमें अब तो सड़ांध की बू भी आने लगी है। देश की ब्यवस्था इतनी बिगड़ चुकी है कि घटना से पहले जिम्मेदार पदों पर बैठे अफसर कुछ करने को तैयर ही नहीं होते और कभी अफसर तैयार भी हो जाते हैं तो उनके नीचे बैठे जिम्मेदार जिनके कन्धों पर अफसरों के आदेश की क्रियान्वयन की जिम्मेदारी होती है, वह लोग तो फरियादी को अपनी इतनी परिक्रमा करवा लेते हैं कि फरियादी की चप्पल घिस जाती है और उसका काम फिर भी नहीं होता।
फरियादी थक हारकर बैठ जाता है और जब घटना घटित होती है तो जिम्मेदारी और जवाबदेही के लिए फिर तलाश शुरू होती है और सबसे कमजोर ब्यक्ति को जिम्मेदार बनाकर उसके गले में घंटी पहनाकर उसे घटना का कुसूरवार बना कर अपना दामन बचाने का काम किया जाता है। मृतकों के परिजनों को कुछ धनराशि देकर उनके आंसुओं को पोंछने का कार्य सरकार भी कर देती है।
ताजा उदहारण फलमंडी के सामने खान मार्किट का है, जिसके भवन स्वामी अपनी दुकान नम्बर- 1 के जर्जर होने की शिकायत साल-2023 से करते चले आ रहे हैं और नगरपालिका प्रशासन व तहसील प्रशासन सहित पुलिस प्रशासन सिर्फ एक दूसरे पर कार्यवाही की जिम्मेदारी डालकर मामले का निराकरण कराकर उसे जिन्दा रखे हुए है।
अभी कोई जनहानि हो जायेगी तो सबसे पहले भवन स्वामी को जिम्मेदार मानकर उसके ऊपर मुकदमा तक लिख दिया जायेगा। जबकि मकान मालिक तीन सालों से लगातार जिम्मेदारों को शिकायती प्रार्थना पत्र दे रहा है और जिम्मेदार उस कागज को अपने अधीनस्थों को जांच कर आवश्यक कार्यवाही किये जाने के लिए निर्देशित कर रहे हैं। एक छोटे से कार्य का निस्तारण कराने में सड़ा हुआ सिस्टम अभी तक बुरी तरह फेल साबित हुआ है।