लालगंज सीएचसी के एक्सपायरी इंजेक्शन प्रकरण के बाद डीएम अभिषेक पांडेय ने सुखपाल नगर पीएचसी का किया औचक निरीक्षण

प्रतापगढ़। जिलाधिकारी अभिषेक पाण्डेय ने शनिवार दोपहर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुखपालनगर और प्राथमिक विद्यालय पूरे रायजू का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान चिकित्सक डॉ. शिवानी अनुपस्थित मिलीं। चिकित्सक की गैरहाजिरी को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों और विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति नहीं पाई गई।

पीएचसी सुखपालनगर में डीएम ने मरीजों से सीधे बातचीत की और उपचार तथा दवाओं की उपलब्धता के बारे में जानकारी ली। मरीजों ने बताया कि उन्हें बाहर से दवाएं नहीं लिखी जा रही हैं। इसके बाद उन्होंने पर्चा काउंटर का निरीक्षण किया, जहां बताया गया कि 100 से अधिक मरीजों की पर्चियां काटी जा चुकी हैं और दोपहर 2 बजे तक पर्चे बनाए जाते हैं।
जिलाधिकारी ने अस्पताल में भर्ती मरीजों से भी उनके उपचार की स्थिति जानी। उन्होंने प्रसव यूनिट का निरीक्षण कर प्रसव संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी ली। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लाभार्थियों को मिलने वाली धनराशि के संबंध में बताया गया कि यह राशि 10 से 15 दिन के भीतर उनके खातों में भेज दी जाती है। डीएम ने स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं की उपलब्धता, मरीजों को मिल रही सुविधाओं और चिकित्सकों की उपस्थिति समेत विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

लालगंज सीएचसी में एसडीएम की बेटी को कथित एक्सपायरी इंजेक्शन लगाए जाने के मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए तो अब प्रशासन ने स्वास्थ्य केंद्रों की हकीकत पर नजरें टेढ़ी कर दी हैं। शनिवार को जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुखपाल नगर में अचानक पहुंचकर व्यवस्थाओं की पड़ताल की। डीएम के औचक निरीक्षण से स्वास्थ्य केंद्र में अफरातफरी मच गई।
एक्सपायरी इंजेक्शन प्रकरण के ठीक बाद स्वास्थ्य केंद्र का यह औचक निरीक्षण कई सवालों के बीच प्रशासन की सक्रियता का संकेत माना जा रहा है। सवाल यह भी है कि यदि जिलाधिकारी के अचानक पहुंचने पर भी चिकित्सक गैरहाजिर मिल रही हैं तो सामान्य दिनों में स्वास्थ्य केंद्रों की निगरानी और उपस्थिति व्यवस्था कितनी प्रभावी है ? सूबे में आज भी स्वास्थ्य ब्यवस्था बेपटरी है। सरकार इतना धन स्वास्थ्य विभाग पर खर्च करती है, पर ब्यवस्था सही नहीं हो पा रही है।

एक तरफ मरीजों को सरकारी अस्पतालों में बेहतर और मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ दवाओं की गुणवत्ता, चिकित्सकों की मौजूदगी और मरीजों को मिलने वाली सेवाओं की लगातार निगरानी जरूरी है। लालगंज प्रकरण ने इस निगरानी की जरूरत को और गंभीर बना दिया है। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार को जब इतनी फुर्सत नहीं की वह मरीज को इंजेक्शन लगाने से पहले उसके एक्सपायरी डेट को चेक कर लें।
अब असली सवाल सिर्फ निरीक्षण का नहीं, कार्रवाई का है। जिलाधिकारी के निरीक्षण में सामने आई चिकित्सक की गैरहाजिरी पर क्या प्रभावी कार्रवाई होती है और स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाओं में कितना सुधार आता है, यह आने वाला समय बताएगा। देखना यह होगा कि लालगंज में सस्पेंड किये गये स्वास्थ्य कर्मियों को कितने दिनों में उन्हें बहाल किया जाता है ? चूँकि मामला लालगंज एसडीएम के बच्चे से जुड़ा हुआ है।