आर्य समाज चौक प्रतापगढ़ की संस्था में पूर्व पदाधिकारियों पर अदालत के आदेश से लाखों रूपये की वित्तीय हेराफेरीऔर घपले-घोटाले करने के विरुद्ध कोतवाली नगर में दर्ज हुई है, गंभीर धाराओं में रिपोर्ट
आर्य समाज चौक, प्रतापगढ़ की संस्था में प्रशासक विजय सिंह की शिकायत पर न्यायालय के आदेश पर कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कर पुलिस जांच शुरू कर दी है। कूटरचना, गबन, धोखाधड़ी और संस्था की संपत्ति के दुरुपयोग के आरोपों की पड़ताल शुरू हो गई है। कोतवाली नगर में दर्ज हुई गंभीर धाराओं में रिपोर्ट के बाद गिरफ्तारी के भय से आरोपी फरार हो गये हैं…

दस्तावेजों की जांच से खुल सकते हैं, कई राज…
प्रतापगढ़। आर्य समाज चौक, प्रतापगढ़ की संस्था में वित्तीय अनियमितताओं और कथित कूटरचना का गंभीर मामला सामने आया है। संस्था के प्रशासक विजय कुमार सिंह की शिकायत पर न्यायालय के आदेश से पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज किया गया है। शिकायत में पूर्व प्रधान राम कृपाल और पूर्व कोषाध्यक्ष राजेश खंडेलवाल समेत अन्य लोगों पर संस्था की धनराशि के कथित गबन, वित्तीय अभिलेखों में हेराफेरी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी और संस्था की संपत्ति का दुरुपयोग करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175 (3) के तहत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट महोदय जनपद प्रतापगढ़ के समक्ष वाद संख्या- 2092/26 विजय कुमार सिंह उम्र 65 वर्ष (प्रशासक आर्य समाज चौक प्रतापगढ़) सुत स्व हरिभवन सिंह, निवासी-मोहल्ला जोगापुर, थाना कोतवाली नगर जिला प्रतापगढ़ ने परिवाद दाखिल किया था। उक्त परिवाद में दो पदाधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। आरोपी नम्बर-1- रामकृपाल आर्य उम्र 75 वर्ष (पूर्व प्रधान भंग प्रबन्ध कार्यकारिणी आर्य समाज चौक प्रतापगढ़) सुत स्व रामदुलार, निवासी सिप्टैन रोड, थाना कोतवाली नगर, जिला-प्रतापगढ़ व आरोपी नम्बर-2-राजेश खण्डेलवाल उम्र 48 वर्ष (पूर्व कोषाध्यक्ष भंग प्रबन्ध कार्यकारिणी आर्य समाज चौक, प्रतापगढ़) सुत स्व रतनलाल निवासी-चौक बाजार, थाना-कोतवाली नगर, जनपद- प्रतापगढ़।

शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर ली न्यायालय की शरण…
आर्य समाज संस्था के बैंक खातों, किराये और संस्था की संपत्ति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। शिकायत के अनुसार, पूर्व पदाधिकारियों पर संस्था के बायलॉज का उल्लंघन कर आर्थिक गतिविधियां संचालित करने, बैंक खातों एवं वित्तीय दस्तावेजों में हेराफेरी करने और दुकानों के किराये से प्राप्त रकम का उचित हिसाब नहीं देने के आरोप हैं। प्रार्थना पत्र में संस्था की संपत्तियों, निर्माण कार्यों और वित्तीय लेन-देन में अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि संस्था के धन का इस्तेमाल नियमों के विपरीत किया गया तथा वित्तीय अभिलेखों और दस्तावेजों के माध्यम से कथित अनियमितताओं को छिपाने का प्रयास हुआ। मामले में लाखों रुपये की धनराशि से जुड़े लेन-देन और संस्था की संपत्ति के प्रबंधन पर सवाल उठाए गए हैं।
पूर्व प्रधान रामकृपाल व पूर्व कोषाध्यक्ष राजेश खण्डेलवाल पर आरोप है कि उन्होंने वित्तीय हेरा-फेरी व संस्था के महत्वपूर्ण दस्तावेज कार्यवाही रजिस्टर, कैशबुक, रसीदबुक, चेक बुक, बैंक खाता पासबुक में अपने पूर्व सहयोगी पदाधिकारियों की मिलीभगत से की गई सुनियोजित कूटरचना को छिपाने के लिए जबरन अपने पास रख लिया। संस्था रिकार्ड का प्रभार प्राची प्रशासक को नहीं दिया गया है।
आर्य प्रतिनिधि सभा के निर्देशानुसार आन्तरिक जाँच में गम्भीर वित्तीय भ्रष्टाचार के दस्तावेजी साक्ष्य लिखित बयान प्राप्त होने पर पता चला कि भंग प्रबन्ध समिति के पदाधिकारियों से मिलीभगत कर पद का दुरूपयोग कर विरुद्ध बाईलाज पूर्व प्रधान ने नवनिर्मित मार्केट के निर्माण हेतु किराये पर लेने वाले इच्छुक आर्य सामाजियों से भूतल की प्रति दुकान हेतु किसी से 15,00000/- (पन्द्रह लाख रुपया) व किसी से 10,00000/- (दस लाख रुपया) तथा प्रथम तल की दुकान हेतु किसी से रुपया 5,00000/- (पाँच लाख) व किसी से रुपया 3,00000/- (तीन लाख) कुल 1,99,40,000 /- (एक करोड निन्यावे लाख चालीस हजार रुपया) नगद प्राप्त किया है।
संस्था बाईलाज का उल्लंघन कर पूर्व प्रधान रामकृपाल व पूर्व कोषाध्यक्ष राजेश खण्डेलवाल ने अपने तत्कालीन सहयोगी पदाधिकारियो के साथ मनमर्जी से नगद धनराशि व्यय करके निर्माण कराया। संस्था बाइलाज व आयकर अधिनियम का उल्लंघन कर संस्था के खाते में जमा करके आय व्यय नही किया और न ही किसी को रसीद दिया। नगद आय व्यय में हेरा-फेरी व दस्तावेजो में कूटरचना कर लगभग 50,00000/- (पचास लाख रुपया) का गबन करने का अपराध किया गया है।
पूर्व कोषाध्यक्ष राजेश खण्डेलवाल पर आरोप है कि उन्होंने धार्मिक संस्था के दान धनराशि में हेरा-फेरी करके नगद रुपया 30,00000/-संस्था के बैंक खाते में जमा न कर अपने पदाधिकारियों की कूटरचित सहमति बताकर पंजाबी मार्केट चौक में व्यापारी के यहां जमा किया। जिसमें से जाल-फरेब करके स्वयं 700000/- रुपया गबन करने का गम्भीर अपराध किया है। उक्त दोनो अभियुक्तों ने मन्दिर परिसर में विगत अपने 4 वर्षों के कार्यकाल में अस्थाई दुकाने हाट बाजार लगवाकर मासिक किराया का लगभग 20,00000/- रुपया बिना रसीद दिये दुकानदारों से नगद प्राप्त कर संस्था के खाते में जमा नहीं किया। हेराफेरी करके गबन करने का गम्भीर अपराध किया है।
संस्था बाइलाज का उल्लंघन कर बिना अधिकार अभियुक्तगण ने पूर्व पदाधिकारियों से साजिश कर स्वयं को संस्था का स्वयंभू मालिक घोषित कर प्रतिनिधि सभा की भ्रामक कूटरचित अनुमति बताकर अन्तरंग सभा में साजिशन प्रस्ताव पारित कर बाइलाज के विरूद्ध स्वयं अपनी पत्नी, पुत्र व अपने नाम से नवनिर्मित दुकानों का रजिस्टर्ड किरायानामा निबन्धित कराकर गम्भीर अपराध किया है। साथ ही धार्मिक संस्था में अभियुक्तगण द्वारा किये गये रू0 7700000/- के गबन, जालसाजी व दस्तावेजो व अभिलेखों में कूटरचना के खुलासे तथा संस्था अभिलेख गायब करने के गम्भीर अपराध करने का आरोप है।
प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि मामले की शिकायत पुलिस अधिकारियों से किए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय के आदेश के बाद कोतवाली नगर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर उपनिरीक्षक राहुल कुमार को विवेचना सौंपी है।
अब पुलिस के सामने बैंक खातों, रजिस्टरों, किराये की प्राप्तियों, संस्था की संपत्तियों और अन्य वित्तीय अभिलेखों की जांच की चुनौती है। विवेचना में यह स्पष्ट होगा कि धनराशि का लेन-देन किन परिस्थितियों में हुआ और शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य उपलब्ध हैं ?
फिलहाल सभी आरोप पहले पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ़ के समक्ष शिकायती प्रार्थना पत्र देकर लगाए गए। पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ़ ने पहले शिकायत की जाँच सीओ सिटी आशुतोष मिश्र से कराई और संतुष्ट न होने की दशा में अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) आलोक कुमार द्वारा भी जाँच कराई गई, परन्तु जाँच रिपोर्ट आने और मुकदमा लिखे जाने में हो रहे विलम्ब के कारण शिकायतकर्ता ने न्यायालय में सीधे परिवाद दाखिल कर मुकदमा लिखे जाने की मांग की।
न्यायालय ने कोतवाली नगर से रिपोर्ट तलब की और मुकदमा लिखने का आदेश दिया। न्यायालय के आदेश पर कोतवाली नगर में मुकदमा लिखा गया। दर्ज मुकदमें की सत्यता पुलिस विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।