मेरठ और मेरठ मुजफ्फरनगर पुलिस का ऑनलाइन ठगी का अनोखे सिंडिकेट का हुआ खुलासा, एक दरोगा सस्पेंड
पुलिस के काले कारनामों से एक बार फिर से दागदार हुई खाकी…
ख़ास बात..
- लिसाड़ीगेट पुलिस ने नोएडा के कारोबारी से वसूली की।
- फर्नीचर कारोबारी को हवालात में डालकर 4.72 लाख वसूले।
- दारोगा अंकित सागर पर लाखों रुपये वसूलने का आरोप।
- हेड कांस्टेबल नीरज और शादाब राव के खातों में रकम।
- रकम वसूली तक कारोबारी का iPhone दारोगा ने रखा।
- दारोगा आरिफ अली भी कारोबारी से वसूली में शामिल।
- आरिफ अली की पत्नी के खाते में 1 लाख भुगतान का दावा।
- DIG कलानिधि नैथानी से शिकायत के बाद दारोगा सस्पेंड।

कारोबारी को हवालात में बंधक बनाकर खाता अनफ्रीज करने के नाम पर उससे 4 लाख, 72 हजार रुपए की की गई वसूली
UP- मेरठ के लिसाड़ीगेट थाने की पुलिस ने नोयडा के एक कारोबारी को हवालात में बंधक बनाकर खाता अनफ्रीज करने के नाम पर उससे 4 लाख, 72 हजार रुपए वसूले गए। यह सारा पैसा पुलिसकर्मियों ने ऑनलाइन वसूला। थाने में वसूली के किरदार रहे दारोगा अंकित सागर और सिपाही नीरज, संरक्षण गद्दीनशीन थानेदार का रहा। इस वसूली की पटकथा मुजफ्फरनगर में तैनात दारोगा आरिफ अली ने रची थी।
यह काम करवाने की एवज में पुलिसकर्मियों ने अपने अधिकारियों को दो सोफे गिफ्ट करने की बात कही और उसके भी 72 हजार रुपए शाहिद से ऑनलाइन लिए गए। ये सारा घटनाक्रम मेरठ में हुआ। मेरठ/मुजफ्फरनगर पुलिस के 3 पुलिसकर्मियों ने यह कांड किया। मुजफ्फरनगर पुलिस ने सब इंस्पेक्टर आरिफ अली को सस्पेंड कर दिया है।
आरिफ इसी थाने पर तैनात रहा है और यहां के वसूली सिडिंकेट का बड़ा किरदार शादाब राव है। शादाब राव थाने के सामने ही विदेश में पैसा भेजने का कारोबारी है, उसके पास थाने की साइबर डेस्क की ईमेल आई़डी भी रहती है। यूपी पुलिस ने फर्जी कहानी बनाई कि नोएडा के फर्नीचर कारोबारी शाहिद चौधरी का बैंक खाता साइबर क्राइम में प्रयुक्त हुआ है। इसके बाद शाहिद का खाता फ्रीज कर दिया गया।

मुजफ्फनगर SSP ने दरोगा आरिफ को कर दिया है, सस्पैंड
दारोगा अंकित सागर थाने की साइबर डेस्क का प्रभारी है। आरोप है कि दारोगा आरिफ अली ने नोयडा में अपने परिचित कारोबारी शाहिद चौधरी के खिलाफ शादाब राव की मदद से एक फर्जी शिकायत कराई। लिसाड़ीगेट पुलिस चौधरी को उठा लाई। उसे हवालात में बंद रखा गया। रिहाई के बदले उससे 8 लाख रूपये मांगे गये।
आरोप है कि उससे 4.74 लाख रूपये की वसूली की गयी और पैसा शादाब राव से प्रोवाइड खातों में ट्रांसफर हुआ। पैसा मिलने तक चौधरी का आईफोन दारोगा सागर पर गिरवी रहा। दारोगा आरिफ इस मामले में बिचौलिया था। केस खत्म कराने का झांसा देकर आरिफ ने बहती गंगा में डुबकी लगाई और अपनी बीबी के खाते में एक लाख रूपये का ट्रांजिक्शन कराया।
वसूली की यह कहानी अगस्त के पहले हफ्ते की है। बेचारा पीड़ित और उसकी बीबी मारे-मारे जिले के अफसरों को शिकायत करते रहे। लेकिन अफसरों ने कोई एक्शन नही लिया। दो दिन पहले सबूतों के साथ DIG कलानिधि नैथानी से शिकायत हुई तो मेरठ-मुजफ्फरनगर पुलिस ने जांच शुरू की।
फिलहाल, मुजफ्फनगर SSP ने दरोगा आरिफ को सस्पैंड कर दिया है। मेरठ की पुलिस अभी जांच के जाल में उलझी है। शादाब राव लिसाड़ीगेट का बेताज बादशाह है। जो भी गद्दीनशीन रहता है कार से लेकर रूपया तक, हर साधन से सेवा की जाती है। मेरठ पुलिस के सब इंस्पेक्टर अंकित सागर और कांस्टेबल नीरज पर कार्रवाई होना बाकी है।
इस पूरे कांड में मेरठ के लिसाड़ी गेट थाने के सामने साइबर कैफे चलाने वाले शादाब राव की भूमिका संदिग्ध है। बैंक खाता फ्रीज करने और अनफ्रीज करने के ईमेल उसी के साइबर कैफे से हो रहे थे, जबकि यह काम पुलिस की सरकारी ईमेल से होता है। कुल मिलाकर मेरठ–मुजफ्फरनगर पुलिस के कुछ होनहार लोग ‘लूट’ का एक सिंडिकेट चला रहे थे।