उत्तरप्रदेशअपराधअलीगढ़ हैवानियत की हदे पार: दुष्कर्म के बाद बालक की हत्या कर पेट्रोल डालकर जलाया By Pratibha Rajdar Last updated Feb 21, 2026 104 अलीगढ़ के इगलास क्षेत्र में आठ माह पहले 11 वर्ष के बालक की दुष्कर्म (कुकर्म) के बाद हत्या में दोषी करार दिए गए मनोज उर्फ मोनी को ताउम्रकैद से दंडित किया गया है। साथ में 1.20 लाख रुपये अर्थदंड नियत किया गया है। यह निर्णय एडीजे विशेष पॉक्सो प्रथम अनिल कुमार तृतीय की अदालत ने सुनाया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना पिछले वर्ष 17 जून की दोपहर की है। गांव का 11 वर्ष का बालक अचानक दरवाजे पर खेलते समय गायब हो गया। काफी तलाशने पर जब बालक कहीं नहीं मिला तो 18 जून को बालक के पिता ने अनहोनी का अंदेशा जताते हुए अपहरण दर्ज कराया। मामले में सक्रिय हुई पुलिस को 19 जून में उसी गांव के मनोज उर्फ मोनी पर शक हुआ। जब उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू हुई तो पहले वह पुलिस को टहलाने लगा। बाद में पुलिस सख्ती पर उसने स्वीकारा कि वह बच्चे को बाइक पर गांव के बाहर बाजरा के खेत में ले गया। जहां दुष्कर्म (कुकर्म) किया। इस पर बालक बेहोश हो गया। तो इस डर में उसने बच्चे की गले में एक पट्टी बांधकर गला घोंटकर हत्या कर दी कि कहीं बात खुलने पर वह पकड़ा न जाए। बाद में गांव से फावड़ा, बोतल में पेट्रोल व नमक के दो पैकेट लेकर गया। जहां पड़ोसी गांव के प्रधान के खाली खेत में गड्ढा खोदकर शव उसमें रखकर पहले पेट्रोल डालकर जलाया। बाद में अधजला शव गलाने के मकसद से नमक डालकर गड्ढे में दबा दिया। इस खुलासे पर 20 जून की शाम पुलिस ने शव बरामद कर लिया। अगले दिन आरोपी को जेल भेजकर पोस्टमार्टम आदि की प्रक्रिया कराई गई। बाद में चार्जशीट दायर की। इसी मामले में सत्र परीक्षण में साक्ष्यों व गवाही के आधार पर दोषी मनोज उर्फ मोनी को दोषी करार देकर सजा सुनाई है। यह सजा सुनाई न्यायालय ने दोषी को अपहरण में सात वर्ष, हत्या में उम्रकैद, सबूत मिटाना में सात वर्ष व बालकों संग लैंगिक हमले में शेष प्राकृत जीवन तक के लिए सजा सुनाई है। खुद खाई व बालक को खिलाई थी भांग पुलिस के समक्ष मनोज ने यह बयान दिया था कि वह जब बालक को अपने साथ लेकर गया तो उसने उसे बातों में लगाकर भांग खिला दी थी। खुद भी भांग खाई थी। चूंकि वह बालक के बड़े भाई का अच्छा दोस्त था। इसलिए बच्चे ने भांग खा ली। नशे में उसने बालक के साथ दुष्कर्म किया। ये साक्ष्य बने सजा का आधार इस मामले में पुलिस विवेचना में सामने आया कि बालक जब दरवाजे पर खेल रहा था। तब एक अन्य बालक ने देखा कि मनोज उसे पेड़ की ओट से साथ चलने के लिए इशारा कर रहा है। बाद में मनोज उसे बाइक पर बैठाकर ले जाता है। इसके कुछ देर बाद वह गांव से फावड़ा ले जाते देखा गया, मगर बालक गायब था। यह गवाही बालक द्वारा दी गई। बालक गायब होने पर वह खुद उसकी तलाश कराता है। पुलिस को गलत जानकारियां देता है। इधर, खुलासे के बाद पुलिस ने मौके से बालक की चप्पल, मनोज का अंगोछा, पेट्रोल की खाली बोतल, माचिस, नमक का पाउच आदि बरामद किए। अंगोछा व कपड़ों पर मनोज के खिलाफ वैज्ञानिक साक्ष्य मिले। वहीं, कुल दस गवाह पेश किए गए। इसके अलावा बालक के डीएनए नमूनों का बालक के माता-पिता से मिलान हुआ है। अभियोजन ने मांगा था मृत्युदंड इस मामले में पैरवी कर रहे अभियोजन अधिवक्ता एडीजीसी महेश सिंह, रघुवंश शर्मा ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषी करार दिए गए मनोज के लिए मृत्युदंड की मांग की। मगर न्यायालय ने मामले में ताउम्रकैद से दंडित किया। बचाव पक्ष करेगा हाईकोर्ट में अपील इस मामले में बचाव पक्ष से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ज्ञानेंद्र चौधरी ने न्यायालय में पक्ष न सुने जाने की बात कहते हुए कहा है कि तथ्यों को दरकिनार किया गया है। अब वे इस मामले में हाईकोर्ट में अपील करेंगे। 104 Share