आधुनिकता की चकाचौंध और घर परिवार सहित रिश्तेदारों के चक्कर में आरएसएस प्रचारक भटक चुका है, अपना रास्ता

आरएसएस प्रचारक दिल्ली रहते हुए अपने घर और अपने भाई-बहन एवं माता-पिता की सुविधाओं का रखता है, पूरा ख्याल…
प्रतापगढ़। आरएसएस से जुड़कर घर परिवार व नात रिश्तेदार को मालामाल करने और उनकी जायज व नाजायज समस्याओं के ठेकेदार बने जय प्रकाश गौतम की चर्चा इन दिनों बेल्हा से लेकर दिल्ली तक में हो रही है। मध्य प्रदेश के दमोह जिला के सगोड़ी के रहने वाले जय प्रकाश गौतम जो आरएसएस के प्रचारक हैं और चार भाईयों एवं दो बहनों में जय प्रकाश गौतम तीसरे नम्बर का स्थान रखते हैं।
दोनों बहनों की शादी प्रतापगढ़ के कंधई थाना के नावलपुर एवं रामपुर में किये हैं। बड़ी बहन रमा पाण्डेय जिनकी शादी अनिल कुमार पाण्डेय के साथ 90 के दशक में हुई थी और दूसरी बहन की शादी सुमन की शादी रामपुर में मनोज कुमार उपाध्याय के साथ हुई है। बड़े भाई विजय गौतम सतना मैहर के पास रंगोली में सपरिवार रहते हैं और दो भाई गजेन्द्र गौतम और मंजू गौतम अपने पिता रामराज गौतम के साथ दमोह जिला के सगोड़ी में रहते हैं।
आरएसएस के प्रचारक जय प्रकाश गौतम संघ से जुड़े और अविवाहित होने की वजह से वह प्रचारक बनकर पूरे परिवार की ब्यवस्था में दिन रात लग गये। परिवार वाले बड़े दीन हीन दशा में जीविकोपार्जन करते रहे, सो जय प्रकाश गौतम को जैसे ही मौका मिला, वह एक सूत्रीय कार्यक्रम में जुट गये। आरएसएस के प्रचारक बनते ही जय प्रकाश गौतम को धन कमाने का जो जूनून सवार हुआ, वह काबिले तारीफ रहा।
सबसे पहले जय प्रकाश गौतम अपने परिवार की दीन हीन दशा में परिवर्तन लाने का काम किया। फिर अपनी बड़ी बहन रमा पाण्डेय की तरफ उनका ध्यान गया, क्योंकि ये वही रमा पाण्डेय थी, जिनके घर जय प्रकाश गौतम सहित उनके अन्य भाई महीनों आकर अपना समय अपनी गरीबी में बिताया करते थे। इसलिए जब जय प्रकाश गौतम को मौका मिला तो वह अपनी बड़ी बहन रमा पाण्डेय की गंभीर लाइलाज बीमारी का इलाज दिल्ली व मुम्बई तक करने में लाखों रूपये ब्यय करके कराने में संकोच नहीं किया।
बड़ी बहन रमा पाण्डेय की गंभीर लाइलाज बीमारी से लम्बा इलाज होने के बाद भी उन्हें बचाया न जा सका और उनकी असमय में मौत हो गई। फिर भी जय प्रकाश गौतम अपने बड़े बहनोई अनिल पाण्डेय के असाध्य रोग का इलाज करवाने में पीछे नहीं हटे। यही नहीं एक भांजी मनीषा पाण्डेय की शादी का भी पूरा खर्जा जय प्रकाश गौतम ही उठाये थे। भांजा पुष्पेन्द्र पाण्डेय उर्फ पंकज की पढ़ाई और लिखाई का खर्चा भी जय प्रकाश गौतम ही उठाते रहे। बड़े भाई विजय गौतम की बेटी की पढ़ाई का पूरा खर्चा भी जय प्रकाश गौतम उठाते हैं। परन्तु यक्ष प्रश्न यही कि इतनी बड़ी कमाई एक प्रचारक कैसे करता होगा ?
ये सब यहाँ इसलिए चर्चा करना पड़ रहा है, क्योंकि एक प्रचारक अपने पद और पॉवर का कितना बड़ा फायद उठा सकता है ? ताजा मामला बड़ी बहन रमा पाण्डेय जो तीन साल पहले दिवंगत हो गई हैं, उनके घर में दो परिवार के बीच संघ के बड़े पदाधिकारियों सहित प्रतापगढ़ के गड़वारा विधानसभा के पूर्व विधायक बृजेश मिश्र “सौरभ” को साथ लेकर थाना कंधई के नावलपुर गाँव पहुंचकर पट्टी तहसील के राजस्व अधिकारियों एवं पुलिस अधिकारियों को प्रभाव में लेते हुए अपने बहनोई अनिल कुमार पाण्डेय के भतीजे मनोज कुमार पाण्डेय के घर का रास्ता रोककर उस पर दीवाल खड़ी कराकर हमेशा के लिए बंद करा दिए और उनका एक साल तक रास्ता रोक रखा था।
भतीजा मनोज कुमार पाण्डेय और उसका परिवार जब अपने रास्ते के लिए अड़ गए तो एक साल बाद अब जाकर घर से पश्चिम तरफ ताल में से रास्ता बनाया जा सका, जिसके लिए तहसीलदार पट्टी और चौकी प्रभारी विजहरा एवं ग्राम प्रधान सहित पूर्व विधायक बृजेश मिश्र “सौरभ” भी नावलपुर जाकर रास्ते का निराकरण कराए। वजह आरएसएस के प्रचारक जय प्रकाश गौतम द्वारा अपने पद का बेजा इस्तेमाल रहा। जय प्रकाश गौतम पूर्व विधायक बृजेश मिश्र “सौरभ”के बाएँ तरफ खड़े हैं और कंधे पर एक तौलिया डाले हुए हैं। पद और पॉवर का बेजा इस्तेमाल के लिए आरएसएस प्रचारक जय प्रकाश गौतम की जितनी तारीफ की जाए, वह कम होगी।
बात यह नहीं कि एक आरएसएस प्रचारक अपने परिवार और रिश्तेदार से संबंध न रखे, सवाल वही कि एक आरएसएस प्रचारक अपने पद और पॉवर का बेजा इस्तेमाल करके जय प्रकाश गौतम की तरह धनार्जन करके परिवार और रिश्तेदार को मालामाल करेगा तो जाहिर सी बात है कि आरएसएस की साख ख़राब होगी और जनता में उसका गलत प्रभाव पड़ेगा। ऐसे में आरएसएस प्रचारकों की निष्ठा पर सवाल उठाना लाजिमी है और इससे बचने के लिए आरएसएस मुख्यालय नागपुर को ऐसे प्रचारकों पर निगाह बनाये रखनी चाहिए, ताकि कोई प्रचारक अपने पद और पॉवर का दुरूपयोग न कर सके और लूट खसोट का हिस्सा न बने।