भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से जनपद प्रतापगढ़ में काला बाजारी चरम पर, एमआरपी रेट से अधिक दाम पर बेंचे जा रहे पान मसाला व गुटखे

प्रतापगढ़। भ्रष्टाचार और कालाबाजारी पर कठोर प्रहार करने वाली केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की योगी सरकार के दावों को उन्हीं के भ्रष्ट अधिकारी पलीता लगा रहे हैं। बजट पेश होते ही लगभग एक माह से राजश्री, कमला पसन्द, सिग्नेचर पान मसाला जैसा कोई भी गुटखा और सभी तरह के सिगरेट की कालाबाजारी का बड़ा खेल जारी है। थोक दुकानदारों में किसी प्रकार का कोई भय किसी में नहीं है।
पूरे जनपद में इस संगठित लूट पर जिला प्रशासन मौन है। जिला मुख्यालय से लेकर तहसील मुख्यालय पर पान मसाला, गुटखा और सिगरेट के थोक विक्रेताओं पर भ्रष्ट अधिकारियों ने खुली छूट दे रखी है कि एमआरपी से अधिक दामों पर सामानों की बिक्री करके थोक दुकानदार मालामाल हो जाए और उस लूट का हिस्सा उन्हें भी बंद लिफाफे में पहुँचा दिया जाए। ताकि उनकी संगठित लूट अनवरत जारी रह सके।
ब्यापारियों के इस सिंडिकेट में सिगरेट और पान मसाला व गुटखा बनाने वाली कम्पनियां व उनके स्टॉकिस्टों सहित थोक विक्रेताओं द्वारा फुटकर दुकानदारों को सामान एमआरपी से अधिक दामों में सामान बेंचा जा रहा है। उदारहण स्वरूप 100 से 200 रूपए प्रति बंडल और 50 रूपए प्रति पैकेट की लूट प्रतापगढ़ के समस्त व्यापारी पुराने रेट में रखे समान को बेंच कर कमा रहे हैं।
सच बात तो यह है कि किसी भी सामान पर प्रकाशित मूल्य से अधिक दाम में सामान को नियमतः नहीं बेंचा जा सकता। थोक ब्यापारियों के इस संगठित लूट पर प्रशाशन मौन है। जाहिर सी बात है कि जिला प्रशासन की चुप्पी इस बात का संकेत करती है कि इस संगठित लूट में उनका भी हिस्सा शामिल हैं। तभी स्टॉकिस्टों सहित थोक विक्रेताओं द्वारा खुलेआम की जा रही इस काली कमाई पर शासन व प्रशासन का डंडा नहीं चल सका।
चाय पान की दुकान पर दिनभर ग्राहकों और फुटकर दुकानदारों से एमआरपी से अधिक दाम वसूलने को लेकर विवाद होता है। कभी-कभी तो विवाद इतना बढ़ जाता है कि फुटकर दुकानदार सामान देने से पहले ही पैसे की डिमांड कर देता है। जैसे ही दुकानदार ग्राहक से धन की मांग करता है, वैसे ही विवाद प्रारम्भ हो जाता है। ग्राहक कहता है कि वह तो उतना ही दाम देगा जितना सामन में प्रिंट हुआ है।
वहीं फुटकर दुकानदार का कहना है कि जब उन्हें बढ़े हुए दामों में समान मिलता है तो वह भी उसी तरह दाम बढ़ाकर ग्राहकों को सामान बेंचने के लिए विवश हैं। इसमें उसकी कोई गलती नहीं है। इसमें पिस रहा है सिर्फ और सिर्फ ग्राहक। ऐसे स्टॉकिस्टों एवं थोक विक्रेताओं पर अभी तक नियम विरुद्ध एमआरपी से अधिक दाम लेकर सामान बिक्री करने के खिलाफ कोई कार्यवाही तो दूर किसी तरह का आश्वासन भी जिला प्रशासन द्वारा नहीं मिल सका है।
देखा जाए तो अकेले जनपद प्रतापगढ़ के स्टॉकिस्टों एवं थोक विक्रेताओं द्वारा अभी तक पुराने स्टॉक को एमआरपी से अधिक दामों में बिक्री करके करोड़ों रूपये का मुनाफा कमा चुके हैं। शासन-प्रशासन के नाक के नीचे सारा खेल हो रहा है। यक्ष प्रश्न यह है कि क्या योगी और मोदी सरकार के कानों तक इस संगठित लूट की भनक नहीं सुनाई दे रही है। यदि सरकार समय रहते इस संगठित लूट पर एक्शन न लिया तो सरकार के प्रति जनता में आक्रोश उत्पन्न होगा।
ये संगठित लूट यूपी के लगभग सभी 75 जनपदों में हो रही है। शासन को जिला प्रशासन के जरिये इस संगठित लूट पर तत्काल रोक लगाकर अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज करानी चाहिए और इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए। ताकि सरकार के दामन पर लग रहे दाग को धुला जा सके। साथ ही ग्राहकों के साथ हो रही इस संगठित लूट को रोका जा सके।