अक्षय प्रताप सिंह, एमएलसी उत्तरप्रदेशप्रतापगढ़ भानवी सिंह के साथ धोखाधड़ी का मामला, एमएलसी अक्षय प्रताप को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, याचिका खारिज By Pratibha Rajdar Last updated Mar 25, 2026 828 यूपी में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह और अन्य लोगों को एक आपराधिक मामले में राहत देने से इन्कार करते हुए याचिका खारिज कर दी। अदालत ने रघुराज प्रताप सिंह की पत्नी भानवी सिंह द्वारा लगाए गए धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज बनाने के आरोपों को गंभीर माना।यह आदेश न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने दिया। अक्षय प्रताप सिंह, रोहित कुमार सिंह, अनिल कुमार सिंह और रामदेव यादव ने विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए कोर्ट), लखनऊ के 18 फरवरी के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। संपत्तियों पर कब्जा करने को फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए भानवी सिंह ने आरोप लगाया था कि उनकी फर्म मेसर्स सारंग एंटरप्राइजेज की कीमती संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। उनके आधार पर संपत्तियों का ट्रांसफर किया गया। उन्होंने हजरतगंज पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच कराने की मांग की थी। दोबारा सुनवाई का निर्देश पहले मजिस्ट्रेट ने 19 अक्टूबर 2023 को एफआईआर दर्ज करने के बजाय मामले को परिवाद (शिकायत केस) के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया था। बाद में इस आदेश को चुनौती देने पर विशेष न्यायाधीश ने मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द कर मामले की दोबारा सुनवाई का निर्देश दिया। इसी आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी, लेकिन अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कोई राहत देने से इनकार कर दिया। समाचार 828 Share
संपत्तियों पर कब्जा करने को फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए भानवी सिंह ने आरोप लगाया था कि उनकी फर्म मेसर्स सारंग एंटरप्राइजेज की कीमती संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। उनके आधार पर संपत्तियों का ट्रांसफर किया गया। उन्होंने हजरतगंज पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच कराने की मांग की थी। दोबारा सुनवाई का निर्देश पहले मजिस्ट्रेट ने 19 अक्टूबर 2023 को एफआईआर दर्ज करने के बजाय मामले को परिवाद (शिकायत केस) के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया था। बाद में इस आदेश को चुनौती देने पर विशेष न्यायाधीश ने मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द कर मामले की दोबारा सुनवाई का निर्देश दिया। इसी आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी, लेकिन अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कोई राहत देने से इनकार कर दिया।