Hathras_lok_sabha_seat: हाथरस में सिर्फ 55.36 फीसदी मतदान हुए हैं, जो साल-2019 के चुनाव से 6 फीससी मतदान कम हुआ है
हाथरस सुरक्षित लोकसभा सीट पर प्रत्याशियों से ज्यादा पार्टी नेतृत्व का चेहरा हावी नजर आया। सपा-बसपा के अपरिचित चेहरों के बीच भाजपा प्रत्याशी एवं प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री अनूप वाल्मीकि प्रभावी दिखे। सपा के जसवीर वाल्मीकि और बसपा के हेमबाबू धनगर पार्टी के परंपरागत वोटबैंक तक सीमित नजर आए। कम मतदान प्रतिशत भाजपा के लिए चिंता की बात है।
हाथरस की बात करें तो इस बार हाथरस में सिर्फ 55.36 फीसदी मतदान हुए हैं जो साल-2019 के चुनाव से कम हैं। आम चुनाव-2019 में हाथरस में 61.76 फीसदी मतदान हुए हैं। यानि तीन फीससी मतदान कम हुआ है। यानि 6 फीससी मतदान कम हुआ है। मतदान कम होने की वजह न तो चुनाव आयोग समझ पा रहा है और न ही राजनीतिक दल। जनता में चुनाव के प्रति आकर्षण नहीं दिख रहा है।
साल- 2014 में यूपीए-2 के खिलाफ लोगों में नाराजगी थी और नरेंद्र मोदी पर मुख्य फोकस था। वहीं साल- 2019 में पुलवामा और सर्जिकल स्ट्राइक की वजह से एक नेशनल प्राइड के मुद्दे को लेकर उत्साह था, लेकिन इस बार कोई लहर नहीं दिख रही है। हालांकि ऐसा भी नहीं है कि बीजेपी के लिए लोग वोट नहीं कर रहे हैं, लेकिन पिछले दो चुनावों की तरह नहीं है।