प्रतापगढ़ के विनियमित क्षेत्र में सैय्याबाँध सीताराम धाम के बगल घोषित ग्रीन लैंड में कराया जा रहा है, अवैध निर्माण कार्य
विनियमित क्षेत्र के अवर अभियंता की भूमिका संदिग्ध, भूमाफियाओं से मिलकर अवैध कार्य कराने का लगता रहता है, आरोप…
प्रतापगढ़ शहरी क्षेत्र का विस्तार तो हो गया परन्तु शहरी क्षेत्र से जुड़े नए क्षेत्र की जमीनें पर भूमाफियाओं की गिद्ध रूपी निगाहें टकटकी लगाये रहते हैं और मौक़ा पते ही उस पर जबरन कब्ज़ा करके उसे अपना बना लेते हैं और उस पर निर्माण तक कर लेते हैं। कभी-कभी तो भूमाफियाओं द्वारा ऐसी जमीनों को जानबूझकर खरीद लिया जाता है और बाद में सेटिंग-गेटिंग करके उसे अच्छे दामों में बेंच लिया जाता है। ऐसे में फंसता है एक आम आदमी जिसे किसी प्रकार की कोई जानकारी नहीं होती। फिर वह अधिकारियों के यहाँ सुबह शाम दरबार करने के लिए मजबूर हो जाता है।
शहर के दक्षिणी क्षेत्र में प्रयागराज-अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग- 330 पर सीताराम धाम जो तहसील सदर के राजस्व अभिलेखों में सैय्याबाँध पर एन एच के पश्चिम दिशा में सीताराम धाम के बगल नाले पर जबरन नियम विरुद्ध निर्माण कार्य कराया जा रहा है। जबकि यह क्षेत्र ग्रीन लैंड के रूप में विनियमित क्षेत्र में दर्ज है। फिर भी विनियमित क्षेत्र के जेई उमेश यादव की मिलीभगत से उक्त अवैध निर्माण कराया जा रहा है। विनियमित क्षेत्र का चार्ज एसडीएम सदर के पास रहता है और वह नियत प्राधिकारी के तौर पर विनियमित क्षेत्र में कार्य करते हैं।
जेई पर आश्रित होते हैं, एसडीएम सदर ! SDM सदर ही विनियमित क्षेत्र के होते हैं, नियत प्राधिकारी
विनियमित क्षेत्र में बिना मानचित्र स्वीकृति कराये कोई भी निर्माण कार्य कराना संभव नहीं होता, परन्तु रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के इस दौर में सबकुछ संभव है। नियम विरुद्ध तरीका अपनाते हुए ग्रीन लैंड में मानचित्र को स्वीकृति प्रदान करना और उस स्वीकृति का हथियार बनाकर नियम विरुद्ध निर्माण कर लेना भी कोई अतिश्योक्ति नहीं। ऐसा करके अधिकरियों द्वारा अपने ही कार्यों पर सवालिया निशान लगवाते हैं। आज यदि ये नियम विरुद्ध निर्माण कार्य सम्पन्न करा लिया जाता है और बरसात में पानी भरता है और गाँव डूबते हैं तो इसका जिम्मेदार कौन होगा ?
पूर्वाधिकारियों द्वारा विनियमित क्षेत्र से सैय्याबाँध के पास ग्रीन लैंड घोषित होने की वजह से वहां की भूमि पर मानचित्र स्वीकृत नहीं किये जाते थे और अवैध तरीके से निर्माण कार्य की सूचना पर उसका निर्माण कार्य रोकवा दिए जाते थे। पूर्व चेयरमैन नगरपालिका स्व हरि प्रताप सिंह सैयाबांध के पास दो दर्जन से अधिक गाँव के पानी को रोकर नाले को बन्द कर काफी बड़े भूभाग में निर्माण कार्य किया गया तो उसे ध्वस्त कराने का आदेश हुआ और मामला आज भी अदालत में पेंडिंग है। एक बार तत्कालीन एसडीएम सदर संजय खत्री ने जेसीबी से जलभराव होने पर अवैध निर्माण को तोड़वा दिया था। उनके जाने के बाद हरि प्रताप सिंह उसे फिर से बन्द करा दिया।