भाजपा के दिग्गज नेता राजेन्द्र प्रताप उर्फ मोती सिंह के सामने पट्टी विधानसभा से कांग्रेस ने सुनीता सिंह पटेल, सपा ने पूर्व विधायक राम सिंह पटेल एवं बसपा ने फूलचन्द्र मिश्र को बनाया अपना उम्मीदवार

सपा के उम्मीदवार की बाट जोह रही कांग्रेस ने कैबिनेट मंत्री मोती सिंह की राह किया आसान, पटेल विरादरी में सेंधामारी करने के लिए पटेल विरादरी से सुनीता सिंह पटेल को चुनावी मैदान में उतारकर गुरु प्रमोद कुमार ने शिष्य मोती सिंह के लिए एक बार फिर चुनावी वैतरणी पार कर लेने में मदद की परोक्ष रूप से चली है,चाल

प्रतापगढ़। जनपद प्रतापगढ़ की बात करें तो यहाँ सात विधानसभा क्षेत्र है और सात विधानसभा क्षेत्र में बाबागंज सुरक्षित को छोड़ दें तो छः विधानसभा ऐसी हैं, जिसमें कुंडा और रामपुरखास विधानसभा में जिले के दो दिग्गजों ने अपना सिक्का कई वर्षों से जमाया हुआ है। अब बची चार विधानसभा जहाँ पर उम्मीदवारी के लिए सभी दलों में मशक्कत करनी पड़ती है। वर्तमान में सबसे अधिक सत्ताधारी भाजपा और दूसरे नम्बर पर समाजवादी पार्टी में उम्मीदवारी को लेकर संघर्ष देखने को मिल रहा है। बसपा और कांग्रेस तो अपने-अपने उम्मीदवार घोषित कर चुके हैं और समाजवादी पार्टी भी रानीगंज, कुंडा और पट्टी में अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। जिले में चार विधानसभाओं सदर प्रतापगढ़ और विश्वनाथगंज जो भाजपा और अपना दल एस के गठबंधन में थी और यहाँ से गठबंधन दल ने चुनाव जीता था, परन्तु गठबंधन दल के एक विधायक डॉ आर के वर्मा चुनाव से पहले ही अपना दल एस को छोड़कर समाजवादी पार्टी में साईकिल की सवारी करने पहुँच गए हैं। इसलिए एक टिकट तो बदलना तय है।
 
अब बात रानीगंज और पट्टी विधानसभा की करते हैं, जहाँ पर भाजपा के विधायक हैं। पट्टी में भाजपा के दिग्गज नेता राजेंद्र प्रताप उर्फ “मोती सिंह” हैं तो रानीगंज विधानसभा में युवा विधायक अभय कुमार उर्फ “धीरज ओझा” हैं। दोनों नेता अपना टिकट पक्का मानकर क्षेत्र में बने हुए हैं, जबकि भाजपा अपने विधायकों का टिकट काटकर दूसरे उम्मीदवार पर भरोसा जता रही है। ऐसे में जब तक अधिकारिक तौर पर उम्मीदवारों की सूची भाजपा नहीं जारी करती तब तक उहापोह की स्थिति बनी हुई है। फिर भी पट्टी विधानसभा की बात करें तो यहाँ से विधायक राजेंद्र प्रताप उर्फ “मोती सिंह” को भाजपा उम्मीदवार मानकर यदि पट्टी विधानसभा के राजनैतिक भविष्य की समीक्षा की जाए तो अभी से ही दिलचस्प नजारा देखने को मिल रहा है। फिलहाल पट्टी विधानसभा की बात करें तो पट्टी में विगत 30 वर्षों से चुनावी परिणाम की तो विनर और रनर में मतों का अंतर बहुत कम मतों का रहा है। यानि रनर और विनर में काटें की टक्कर रहती है। कई बार तो मतगणना में ये अंतर ऊपर नीचे भी होता है। दो चुनाव में तो जीत और हार का अंतर महज 500 मतों के नीचे रहा है।
 
कभी जिले की रामपुरखास विधानसभा जो कांग्रेस की गढ़ मानी जाती है, वहाँ जीत और हार का अंतर बहुत अधिक हुआ करता था। कांग्रेस के प्रमोद कुमार तो लगातार 40 सालों तक एक ही विधानसभा और एक ही सिम्बल से चुनाव जीतकर रामपुरखास विधासभा का नाम वर्ड की गिनीज बुक तक में दर्ज करा दिया। अब वह अपनी रामपुरखास विधानसभा को अपनी बड़ी पुत्री अराधना मिश्रा उर्फ मोना को अपना राजनैतिक उत्तराधिकारी नियुक्त कर उन्हें वहाँ की कमान सौंप दी है और वर्ष-2014 के उप चुनाव और वर्ष-2017 के आम चुनाव से वही रामपुरखास से विधायक हैं। हालाँकि रामपुरखास में भी धीरे-धीरे जीत और हार का अन्तर कम होता गया और अब वहाँ भी बसपा, सपा और भाजपा से उम्मीदवारी के लिए कई दिग्गज ताल ठोकने से परहेज नहीं करते। जबकि पहले इसी दल के नेताओं के मन में यह बात घर कर गई थी कि रामपुरखास, कुंडा और बाबागंज में शहीद होने के लिए अपना नाम कौन लिखाये ? परन्तु धीरे-धीरे हालात बदलते गए और इन दिग्गज नेताओं के खिलाफ भी लोग ताल ठोकने के लिए कुलाचे मारने लगे।
 
रामपुरखास और पट्टी विधानसभा की बात करें तो दोनों विधानसभाओं के दिग्गज प्रमोद कुमार और मोती सिंह गुरु चेले हैं। कभी मोती सिंह को प्रमोद कुमार कांग्रेस से एमएलसी तक बनाया था। इसलिए दोनों नेता आज भी एक दूसरे के खिलाफ जो बयान देते हैं, वह सोच विचार कर एक मर्यादा में ही देते हैं। अभी हाल ही में भाजपा सांसद स्नाग्म लाल गुप्ता और प्रमोद कुमार के बीच सांगीपुर ब्लॉक परिसर में मारपीट के मामले में भी मोती सिंह अंतर्मन से प्रमोद कुमार के ही पक्ष में रहे। मोती सिंह ऑफ द रिकार्ड सांसद संगम लाल गुप्ता की ही खिंचाई करते थे। उनका कहना था कि शेर की मांद में जाकर ललकारोगे तो शेर निकलेगा तो वही करेगा जो सांगीपुर में हुआ। इसके पीछे राजनीतिक फायदे की बात एक दूसरे नेता में निहित रहती है। पट्टी विधानसभा में कांग्रेस से अपने मन का उम्मीदवार जो मोती सिंह को चुनावी लाभ दिला सके और एक तरह से वोट कटवा बनाकर सपा का नुकसान पहुँचा सके। मोती सिंह की राह आसान करने के लिए राजनैतिक गुरु प्रमोद कुमार ने कांग्रेस पार्टी से अपना दल एस में सक्रिय रहीं पूर्व जिला पंचायत सदस्य सुनीता सिंह पटेल को कांग्रेस पार्टी का प्रत्यासी बना दिया। अब सुनीता पटेल जितना वोट पटेल विरादरी का काट सकेंगी उतना लाभ मोती सिंह को होगा और सपा उम्मीदवार राम सिंह पटेल का होना तय माना जा रहा है।
 
कैबिनेट मंत्री मोती सिंह को सबसे अधिक खतरा पट्टी विधानसभा में यादव और पटेल यानि कुर्मी विरादरी से रहता है। इसलिए मोती सिंह चाहते हैं कि कांग्रेस पट्टी से किसी यादव और पटेल में से ही अपना उम्मीदवार बनाये।इसलिए मोती सिंह कभी भी प्रमोद कुमार के खिलाफत नहीं करते। यही कार्य मोती सिंह भी प्रमोद कुमार के लिए रामपुरखास विधानसभा में भाजपा उम्मीदवार के लिए सूत्रधार का कार्य करते हैं। इसलिए दोनों नेता एक दूसरे के पूरक माने जाते हैं। रामपुरखास की बात करें तो यहाँ भाजपा के बड़े नेता जनसभा भी करने से परहेज कर जाते हैं।राजनीति में इतनी अच्छी सेटिंग और तालमेल आज के दौर में कोई कर सकता है तो वह मोती सिंह और प्रमोद कुमार जैसे रणनीतिकार ही कर सकते हैं। यही स्थिति कुंडा और बाबागंज में रही। अभी तक कुंडा और बाबागंज में सपा का समर्थन से राजा भईया और उनके समर्थक विनोद सरोज चुनाव जीतते रहे। परन्तु इस बार अखिलेश यादव ने कुंडा और बाबागंज की गणित बिगाड़ने की पूरी रणनीति तैयार कर दी है। कुंडा से राजा भईया के कभी करीबी रहे गुलशन यादव को समाजवादी पार्टी का उम्मीदवार बनाकर राजा भईया की चुनावी राह में काँटा बिछाने का कार्य किया है। बाबागंज और रामपुरखास में अखिलेश यादव इस बार जिताऊ और दमदार उम्मीदवार की तलाश में हैं। इसलिए दिग्गजों की सीट भी इस बार सुरक्षित नहीं रह गई है।

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