पेपर लीक मामला : नकल माफियाओं के संरक्षक गिरफ्तार DIOS बृजेश बेहद दौलतमंद, प्रयागराज में आलीशान बंगला, जिसमें डीएम ने मारा छापा
नकल माफियाओं के संरक्षक गिरफ्तार डीआईओएस बृजेश मिश्र अकूत संपत्ति का मालिक है। उसके पास प्रयागराज में करोड़ों रुपये का आलीशान बंगला है। प्रयागराज में उनके बीएसए पद पर तैनाती के दौरान तत्कालीन डीएम आशीष कुमार गोयल ने भ्रष्टाचार के मामले में उसके आवास पर छापा मारा था। हालांकि वहां से कैश नहीं मिला था…

प्रयागराज। जनपद बलिया में इंटरमीडिएट परीक्षा में अंग्रेजी का पेपर लीक प्रकरण में गिरफ्तार डीआईओएस बृजेश मिश्र अकूत संपत्ति का मालिक निकला। सिविल लाइंस स्थित हनुमत निकेतन मंदिर के पास उसका करोड़ों रुपये कीमत का आलीशान बंगला भी है। खास बात तो यह है कि उसने यह बंगला प्रयागराज में वर्ष-2007 से वर्ष- 2009 तक बीएसए के पद पर तैनाती के दौरान ही खरीदा था। इस तैनाती के दौरान तत्कालीन डीएम आशीष कुमार गोयल ने भ्रष्टाचार के मामले में उसके आवास पर छापा मारा था। हालांकि वहां से कैश बरामद नहीं हुआ, लेकिन पूरे मामले में खूब किरकिरी हुई थी। जनपद प्रतापगढ़ में बीएसए रहे ब्रजेश मिश्र का तवादला प्रयागराज हुआ था तो प्रयागराज में रहने के बाद भी प्रतापगढ़ के कुछ चाटुकार पत्रकार उनकी टी-पार्टी में प्रयागराज तक दलाली करने पहुँच जाते थे। मीडिया को मैनेज करना कोई डॉ ब्रजेश मिश्र से सीखे। प्रतापगढ़ में डॉ ब्रजेश मिश्र फिर DIOS बनकर आये तो प्रबन्धक वाले एडेड शिक्षण संस्थाओं से अधियाचन न भेजने और प्रबंधकों से नियुक्ति करने के मामले में लाखों रूपये वसूले थे। बोर्ड परीक्षा के दौरान केंद्र बनाने के लिए भी लाखों रूपये की काली कमाई किया था।
बीएसए रहते पत्नी की अल्पसंख्यक विद्यालय में करा दी थी,नियुक्ति…
मूलतः बिहार प्रांत के रहने वाले ब्रजेश मिश्र की गिनती भ्रष्टतम और दागी छवि के अधिकारी के रूप में होती है। ब्रजेश मिश्र शिक्षा विभाग में अपने सांठगांठ के लिए भी जाने जाते हैं। प्रयागराज के अलावा प्रतापगढ़, हरदोई, जौनपुर में भी इनकी तैनाती रही। ब्रजेशमिश्र का नाम वर्ष- 2011 में भी सुर्खियों में उस समय आया था, जब उसकी पत्नी अन्विता की तैनाती प्रयागराज के अल्पसंख्यक विद्यालय (नूरजहां उच्चतर माध्यमिक विद्यालय) में 21 अप्रैल, 2011 को सहायक अध्यापक के पद पर हुई। इसके लिए बीएसए कार्यालय से 15 अप्रैल, 2011 को नियुक्ति पत्र जारी किया गया था। इस दौरान प्रयागराज के बीएसए ब्रजेश मिश्र ही थे। उन पर आरोप लगा था कि मनमाने तरीके से उन्होंने पत्नी की नियुक्ति कराई है। हालांकि, विद्यालय के प्रबंधक डा. अशफाक अहमद का कहना है कि यह बात सही है कि जिस समय अन्विता की नियुक्ति हुई थी, उनके पति ही बीएसए के पद पर कार्यरत थे, लेकिन नियुक्ति नियम और कानून के तहत की गई है। पद का अनुमोदन लिया गया था और दो अखबारों में विज्ञप्ति भी जारी हुई थी। कितने नीच और वेशर्म किस्म के अधिकारीगण होते हैं जो अपने मामले में मनमुताविक रिपोर्ट लगाकर अपने भ्रष्ट साथी अधिकारी का बचाव करते हैं ? एक बीएसए जिस जिले में तैनात हो उस जिले में उसकी पत्नी को प्रबंधकीय एडेड स्कूल में नौकरी नियमतः नहीं दी जा सकती। परंतु डॉ ब्रजेश मिश्र की पत्नी को नौकरी दी गई और जाँच में क्लीनचिट भी मिल गई।
जबकि प्रयागराज के अल्पसंख्यक विद्यालय (नूरजहां उच्चतर माध्यमिक विद्यालय) के प्रबंधक ने बचाव में कहा कि BSA प्रयागराज डॉ ब्रजेश मिश्र की पत्नी को जिस पद पर नौकरी दी गई, उस पद के लिए कई अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जिसमें से अंतिम रूप से तत्कालीन बीएसए डॉ ब्रजेश मिश्र की पत्नी अन्विता का चयन सहायक अध्यापक के पद के लिए किया गया था। इस मामले में गाजीपुर के शिवबचन पांडेय ने ब्रजेश मिश्र पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। शिव बचन गाजीपुर के गडार गांव के रहने वाले हैं। उनकी शिकायत पर बेसिक शिक्षा निदेशक प्रयागराज ने बीएसए से रिपोर्ट तलब की थी। इस प्रकरण में बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी का कहना है कि 15 अप्रैल, 2011 को तत्कालीन बीएसए ब्रजेश मिश्र द्वारा अन्विता की नियुक्ति का कोई अनुमोदन नहीं प्रदान किया गया है। इसके आधार पर उन्हें क्लीनचिट मिल गई थी। सच बात यह है कि ब्रजेश मिश्र हमेशा मलाईदार पदों पर तैनात रहे। हरदोई में बीएसए रहते हुए ब्रजेश मिश्र के पास डीआईओएस का भी चार्ज था। यहां मनमाने ढंग से बोर्ड परीक्षा के केंद्र बनाने और शिक्षक भर्ती मामले में भी वह फंसे थे। लेकिन अपनी ऊंची पहुंच और रसूख के चलते ब्रजेश मिश्र हमेशा ही शिक्षा विभाग में मलाईदार पदों पर रहे। बलिया में डीआईओएस पद पर तैनाती से पहले प्रयागराज में सहायक शिक्षा निदेशक पत्राचार के पद पर तैनाती थी। भ्रष्टाचार के आकंठ डूबे डॉ ब्रजेश मिश्र इस बार जनपद बलिया में धन कमाने के चक्कर में जेल की सलाखों के पीछे पहुँच गए हैं।