क्रिसमस सेलिब्रेशन में धर्मांतरण का शक, ईसाई समुदाय और हिंदूवादी संगठनों के बीच हुई मारपीट
जबलपुर में क्रिसमस कार्यक्रम के दौरान धर्मांतरण के आरोपों को लेकर ईसाई समुदाय और हिंदूवादी संगठनों में विवाद व मारपीट हुई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। फिलहाल धर्मांतरण के आरोपों की जांच जारी है।जबलपुर में क्रिसमस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान धर्मांतरण के आरोपों को लेकर ईसाई समुदाय के लोगों और हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं के बीच जमकर विवाद और मारपीट हो गई। यह घटना कटंगा क्षेत्र में हवाबाग कॉलेज के पीछे स्थित चर्च और कम्युनिटी हॉल परिसर की है, जहां घंटों तक तनावपूर्ण हालात बने रहे।
हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि दिव्यांग बच्चों को भोजन के बहाने गुपचुप तरीके से धर्मांतरण के उद्देश्य से बुलाया गया है। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले तीखी बहस हुई जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। आरोप है कि हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने कई लोगों के साथ मारपीट की। वहीं बचाव में ईसाई समुदाय से जुड़े लोगों ने भी लात-घूंसे चलाए।
चर्च के पदाधिकारी ने दी सफाई
घटना की सूचना मिलते ही गोरखपुर, गढ़ा ओर केंट पुलिस मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद दोनों पक्षों को काबू में किया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर भीड़ को हटाया और दोनों पक्षों को समझाइश दी। मौके पर मौजूद लोगों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। चर्च पदाधिकारी पीटर ने धर्मांतरण के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम केवल क्रिसमस के अवसर पर बच्चों को भोजन कराने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। उनका कहना है कि किसी भी प्रकार का धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास नहीं किया गया और लगाए गए आरोप निराधार हैं।
हिंदूवादी संगठनों का आरोप
वहीं, हिंदूवादी नेता सुमित सिंह ठाकुर ने कहा कि उन्हें सूचना मिली थी कि दिव्यांग बच्चों को भोजन के नाम पर लाकर धर्मांतरण किया जा रहा है। जब संगठन के कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम के लिए अनुमति पत्र मांगा तो कोई स्पष्ट दस्तावेज नहीं दिखाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चों की धार्मिक मान्यताओं को भ्रमित करने का प्रयास किया गया है, जो गंभीर विषय है और इसकी जांच होनी चाहिए।
धर्मांतरण के आरोपों की जांच
इस पूरे मामले पर सीएसपी एमडी नागोटिया ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची थी। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि संस्था का दावा है कि उन्होंने विद्यालय प्रशासन से अनुमति लेकर बच्चों को बुलाया था, लेकिन संबंधित दस्तावेज अभी पुलिस को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। दस्तावेज मिलने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल धर्मांतरण के आरोपों की जांच की जा रही है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में पुलिस सतर्क है।