हत्या से लेकर फांसी की सजा तक,रामगोपाल मर्डर केस की टाइमलाइन

उत्तर प्रदेश के बहराइच के रामगोपाल हत्याकांड में गुरुवार को कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया और दोषी सरफराज को फांसी की सजा दी गई। इसके साथ बाकी 8 दोषियों को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई। करीब 14 महीने बाद रामगोपाल को न्याय मिला, जिसके बाद उसका पूरा परिवार भावुक हो गया। कोर्ट के फैसले पर परिवार ने कहा कि भगवान के घर में देर है, अधेर नही। अब बेटे की आत्मा को शांति मिलेगी। फैसला सुनते ही परिवार के सभी सदस्यों की आंखें भर आई। रामगोपाल के पिता कैलाश नाथ मिश्रा, जो पिछले चार दिनों से मेडिकल कॉलेज में भर्ती है। जानकारी मिलते ही भावुक हो गए। रामगोपाल की मां मुन्नी देवी भी खुद को संभाल नहीं पाई। उन्होंने कंपकंपाती आवाज और आंख से छलकते आंसू के साथ कहा कि आज उनके बेटे को न्याय मिल ही गया।

पुलिस ने इलाके में गश्त बढ़ा दी

रामगोपाल के बड़े भाई हरमिलन मिश्रा ने भी कोर्ट का धन्यवाद दिया और कहा कि कोर्ट ने उनके परिवार की उम्मीदों को पूरा किया है। अब वह भाई की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है। ताकि कोई तनाव न हो ।अधिकारियों का कहना है कि रातभर पेट्रोलिंग जारी रहेगी और बिना वजह की भीड़ जुटने नहीं दी जाएगी।

रामगोपाल की पत्नी रोली मिश्रा ने कहा कि वह शुरू से सिर्फ यही चाहती थीं कि पति के हत्यारों को फांसी मिले। कोर्ट ने उनकी ये मांग पूरी कर दी, जिसके लिए वह आभारी है। कोर्ट के इस फैसले को पीड़ित पक्ष के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। वहीं बचाव पक्ष का कहना है कि आत्मरक्षा के मामले की घटना को हत्या में दर्शाया गया। ये इंसाफ नहीं हुआ है। ऐसे मामलों की हाईकोर्ट मॉनिटरिंग करता है।

बेहोश हो गई सरफराज की बहन

गुरुवार को कोर्ट में जैसे ही सरफराज और बाकी 9 दोषियों को सजा दी गई तो एक तरफ खुशी के आंसू छलके, वहीं दूसरी तरफ सदमे से सरफराज की बहन बेहोश हो गई।अभियोजन पक्ष न्याय मिलने पर खुश था, लेकिन सरफराज का परिवार उसे फांसी की सजा मिलने के बाद उसके परिवार वाले फफक-फफक कर रोने लगे। यहां तक की सरफराज की बहन बेहोश भी हो गई।

सभी दोषियों पर अलग-अलग जुर्माना

सरफराज को फांसी की सजा के साथ जिन 9 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। उनमें अब्दुल हमीद, मोहम्मद फहीम, सैफ अली, मोहम्मद तालिब, जावेद खान, मोहम्मद जीशान, शोएब खान, ननकऊ और मारूफ शामिल है। इन सभी दोषियों पर अलग-अलग जुर्माना भी लगाया गया है। सरफराज पर 1.30 लाख, फहीम, सैफ अली, मारूफ अली, ननकऊ, जिशान, शोएब और फहीम पर 1.50 लाख, जावेद पर 1.20 लाख और तालिब पर 50 हजार पर जुर्माना लगाया गया।

मामले में 12 गवाहों की गवाही के बाद 21 नवंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। 9 दिसंबर को कोर्ट ने तीन आरोपियों को बरी कर दिया था। इनमें खुर्शीद, शकील और अफजल शामिल हैं। सरकारी अधिवक्ता प्रमोद सिंह ने 13 महीने 26 दिन में ट्रायल पूरा होकर फैसला आने को तेज न्याय का उदाहरण बताया था।

कब शुरू हुआ था पूरा मामला?

दरअसल, ये मामला पिछले साल शुरू हुआ था, जब महसी थाना क्षेत्र के महराजगंज इलाके में 13 अक्टूबर 2024 को दुर्गा प्रतिमा का विर्सजन हो रहा था। डीजे पर बजते गाने को लेकर विवाद शुरू हुआ था, जिसके बाद पथराव और फायरिंग की घटना हुई। इसी घटना में राम गोपाल मिश्रा को गोली लगी और उनकी मौत हो गई थी। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव बढ़ गया था। महसी क्षेत्र में दंगा शुरू हो गया था। हालात काबू करने के लिए कर्फ्यू तक लगाना पड़ा था।

घटना से सजा तक की पूरी टाइमलाइन

13 अक्टूबर 2024 को घटना हुई। इस घटना में रिपोर्ट भी 13 अक्टूबर 2024 को ही दर्ज कर ली गई थी। मामले की जांच शुरू की गई और पूरी होने पर 11 जनवरी 2025 को पुलिस ने लिखित चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। इसके बाद 18 फरवरी 2025 को आरोप तय किए गए. कोर्ट में सबूत, गवाह और दस्तावेज पेश करने की प्रक्रिया 4 मार्च 2025 से शुरू हुई और 26 सितंबर 2025 तक सभी साक्ष्य पेश कर दिए गए।

इसके बाद 4 अक्टूबर 2025 को आरोपी का बयान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के तहत दर्ज किया गया और उसी दिन फैसला सुरक्षित रखा गया। जिसमें 9 दिसंबर 2025 को आरोपी दोषी करार दिए गए और 11 दिसंबर 2025 को सजा सुनाई गई।

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