फिल्मी अंदाज में 11 साल पहले प्रतापगढ़ में हुई थी इंस्पेक्टर अनिल कुमार की हत्या, अब आया फैसला

होटल वैष्णवी के मॉडल शॉप के सामने इंस्पेक्टर अनिल कुमार की हुई थी, रहस्यमयी तरीके से हत्या…
प्रतापगढ़। यूपी के प्रतापगढ़ जिले में 11 साल पहले शहर के बीचोंबीच एक होटल के नीचे रहस्यमय तरीके से इंस्पेक्टर अनिल कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इंस्पेक्टर अनिल कुमार मूलतः फैजाबाद जनपद के रहने वाले थे और उनकी तैनाती जनपद प्रतापगढ़ में थी। कुछ दिन पहले कोतवाली नगर में कोतवाल के पड़ से उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था।
एक हत्याकांड में कोतवाली नगर में कोतवाल रहे अनिल कुमार को पुलिस अधीक्षक ने सस्पेंड कर दिया गया था। जबकि मौत से पहले वह कोतवाली नगर के मकंद्रूगंज पुलिस चौकी पर बैठकर उस हत्याकांड में आरोपियों तक पहुँचने का दावा भी किया था। यही नहीं इंस्पेक्टर अनिल कुमार ने एक पत्रकार से व्हाट्सएप पर चैट से बातचीत में कई ऐसे राज शेयर किये थे, जो चौकाने वाले थे।
इंस्पेक्टर अनिल कुमार के साथ खाने के साथ शराब पीने वाला शख्स कौन था और घटना के बाद वह क्यों लापता हो गया…
इंस्पेक्टर अनिल कुमार की पत्नी ने कई सनसनीखेज आरोप लगाये और मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले गई। बहुत सारे सवाल उठाए। समाचार की कटिंग को भी अदालत में दाखिल किया था। इंस्पेक्टर अनिल कुमार की पत्नी ने कहा था कि उनके पति जब कोतवाली नगर प्रतापगढ़ में तैनात थे, उस समय उन्हें धमकी दी गई थी और वह घर आये तो बहुत असहज दिखे थे। बहुत कुरेदने पर बस यही बताये थे कि किसी तरह वह अब प्रतापगढ़ से अपना ट्रांसफर कराकर वहाँ से निकलना चाहते हैं। उन्हें अपनी जान का खतरा लग रहा है।
जनपद प्रतापगढ़ में इंस्पेक्टर अनिल कुमार की हत्या से पहले सीओ कुंडा जियाउल हक की हत्या हो चुकी थी और इंस्पेक्टर अनिल कुमार को वह घटना बार-बार याद आ रही थी। आख़िरकार वही हुआ जिसका इंस्पेक्टर अनिल कुमार को शंका थी। शाम का समय और वैष्णवी होटल में इंस्पेक्टर अनिल कुमार अपने एक साथी के साथ भोजन कर रहे थे, अचानक नीचे तेज-तेज आवाज होने लगी और आवाज सुनकर इंस्पेक्टर अनिल कुमार अपने साथी के साथ नीचे आ गए। इतने में गोली चलती है और वह गोली इंस्पेक्टर अनिल कुमार को जाकर लगती है और उनके साथ रहा युवक वहाँ से भाग निकला था।
तत्कालीन नगर कोतवाल रहे बलराम मिश्र पर क्यों उठे थे, सवाल…
कोतवाली नगर, प्रतापगढ़ में कोतवाल रहे बलराम मिश्र पर भी इस घटना को लेकर शंका जताई गई, परन्तु मामला आगे नहीं बढ़ सका। कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज हुआ और दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। पुलिस और सीबीआई की कहानी से इंस्पेक्टर अनिल कुमार की पत्नी संतुष्ट नहीं हुई और सुप्रीम कोर्ट में मामला लेकर पहुँची तो मामले की जांच कर रही सीबीआई उसमें अलग क्लू ढूढने लगी। सीबीआई ने बहुत दिनों तक इंस्पेक्टर अनिल कुमार की हत्या की जांच अपने तरीके से की और बहुत से लोगों के बयान भी लिए, परन्तु सीबीआई भी पुलिस की थ्योरी से अलग जांच न जा सकी।
11 साल बाद इंस्पेक्टर अनिल कुमार की रहस्यमयी मौत के मामले में सीबीआई कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। 2 मई, 2026 को लखनऊ स्थिति सीबीआई कोर्ट ने हत्या के दोषी जीशान खान को 10 साल के कारावास की सजा दी है। साथ ही 9 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि देश की सबसे बड़ी जाँच एजेंसी को एक हत्याकांड में आरोप पत्र देने और सीबीआई कोर्ट को फैसला सुनाने में 11 साल लग गए। यक्ष प्रश्न यह कि जब पुलिस की कहानी को ही सीबीआई ने मानकर जांच किया तो उसे इतना समय कैसे लग गया ? ऐसे में सीबीआई जांच की विश्वनीयता पर भी सवाल उठने लगा है।
होटल वैष्णवी के कमरे में भोजन कर रहे इंस्पेक्टर अनिल कुमार अचानक कमरे से नीचे मॉडल शॉप के पास किसके कहने पर गये थे…
मामला 19 नवंबर, 2015 का है, जब प्रतापगढ़ के होटल वैष्णवी के मॉडल शॉप में इंस्पेक्टर अनिल कुमार मृत पाए गए थे। शुरुआत में कोतवाली सिटी पुलिस स्टेशन में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। साल-2018 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के निर्देश के बाद जांच सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई ने औपचारिक रूप से 29 जून, 2018 को जांच अपने हाथ में ले ली। जांच में सीबीआई ने जीशान खान और बोचा उर्फ राजू सोनी का आरोपी तय किया और दोनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट ने 22 फरवरी, 2021 को मामले का संज्ञान लिया और 14 दिसंबर, 2022 को दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान, जीशान खान ने 4 अप्रैल, 2026 को आरोपों को स्वीकार करते हुए एक लिखित आवेदन प्रस्तुत किया। इसके बाद, 10 अप्रैल को जीशान के मामले को मुख्य कार्यवाही से अलग कर दिया गया और एक अलग केस दर्ज किया गया। अपने फैसले में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ने कहा कि दोषसिद्धि रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्य और आरोपी के इकबालिया बयान पर आधारित है। अदालत ने जीशान खान को 10 साल की कैद की सजा सुनाई और करीब 10 साल से अधिक समय से न्यायिक जांच के दायरे में चल रहे इस मामले का आंशिक रूप से निपटारा हो गया। सह आरोपी के खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही अभी जारी है।