सपा नेता संदीप विश्वकर्मा पर जानलेवा हमला का प्रयास व एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज हुआ मुकदमा, बड़बोले नेताजी पर पुलिस ने कसा शिकंजा
प्रतापगढ़। जनपद के लीलापुर में हुए संविदाकर्मी सौरभ विश्वकर्मा हत्याकांड के मामले में गायघाट पोस्टमार्टम हाउस पर संवेदना व्यक्त करने पहुंचे सपा नेता इंजीनियर संदीप विश्वकर्मा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एक इंजीनियर भी नेता हो सकता है। अब इंजीनियर तो पढ़ा लिखा होता है। वह जाहिल और गंवार जैसी बातें नहीं करता।
शव की सौदागरी करने वाले लोग समाज के लिए नासूर से कम नहीं। इंजीनियर संदीप विश्वकर्मा का ब्यवहार कहीं से जनप्रतिनिधि वाला नहीं रहा। वह पुलिस अधिकारियों को अर्दब में लेकर नौकर तक कह डाला। मानो पुलिस के अधिकारी उनके घर के सच में नौकर हैं।
बताया जा रहा है कि अविनाश सरोज की तहरीर पर नगर कोतवाली प्रतापगढ़ में संदीप विश्वकर्मा के खिलाफ हत्या के प्रयास, एससी-एसटी एक्ट समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। अब तो वही कहावत याद आ रही है कि चौबे गए छब्बे बनने और दुबे बनकर लौट आये। नेताजी आये थे सहानुभूति के लिए, पर नेतागिरी का भूत सवार हुआ तो मुकदमा लेकर वापस आ गये।
वहीं, मौके पर सपा नेता संदीप विश्वकर्मा की अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी बृजनंदन राय से भी कहासुनी हुई थी। एक वीडियो में संदीप विश्वकर्मा द्वारा दावा किया जा रहा है कि उन्होंने अपर पुलिस अधीक्षक को वहां से भगा दिया था। सपा नेता इंजीनियर संदीप विश्वकर्मा की ओछी हरकतें निंदनीय रही। उनकी भाषा बहुत ही घटिया किस्म की रही। संवेदना में लोग ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं करते।
अब मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने सपा नेता पर शिकंजा कस दिया है। मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। वैसे सपा नेता संदीप विश्वकर्मा कभी मृतक का रिश्तेदार बताते तो कभी शुभचिंतक। पर उनकी भाषा शैली उत्तेजना फैलाने वाली रही। संवेदना और सहानुभूति से नेताजी का वास्ता कम दिख रहा था। बस अपनी नेतागिरी कैसे चमके इसका उन्होंने भरपूर ध्यान रखा। नतीजा अब उनके सामने है।