नजूल भूमि को हड़पने की इच्छा रखने वाले याचिकाकर्ता सुल्तान हसन को हाईकोर्ट से मिला 5 अक्टूबर तक स्थगनादेश

प्रतापगढ़। इलाहाबाद हाईकोर्ट खंडपीठ लखनऊ में दाखिल रिट याचिका- C नंबर – 9608 / 2026, याचिकाकर्ता सुल्तान हसन बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (प्रमुख सचिव, राजस्व, लखनऊ के माध्यम से) और 3 अन्य प्रतिवादी याचिकाकर्ता के वकील कामिनी सिंह प्रतिवादी के वकील C.S.C. कोर्ट नंबर- 8, माननीय जस्टिस जसप्रीत सिंह द्वारा उक्त प्रकरण की सुनवाई की गई। पहली सुनवाई इमरजेंसी बताते हुये दिनांक- 03/09/2026 को तत्काल प्रभाव से की गई।
याचिकाकर्ता दिनांक- 03/09/2026 के आदेश के अनुसार, मामले को 07/09/2026 को लिस्ट किया गया था और उसके बाद इसे दिनांक-08/09/2026 के लिए फिर से लिस्ट किया गया। मामले को लिस्ट करने का मुख्य उद्देश्य यह था कि सरकारी वकील (स्टैंडिंग काउंसिल) अपने निर्देशों को अपडेट कर सकें और कोर्ट की मदद कर सकें। आज भी, जो निर्देश उपलब्ध हैं, वे संबंधित मुद्दे का समाधान नहीं करते हैं। सरकार की तरफ से कोई पक्ष नहीं रखा गया।

इस प्रकार, दो स्पष्ट अवसर दिए जाने के बावजूद राज्य निर्देश अपडेट नहीं कर सका। इस संदर्भ में, कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील को सुना, जो दिनांक- 17/08/2026 के उस आदेश को चुनौती दे रहे हैं, जिसके तहत दिनांक- 23/06/2026 के आदेश को सही ठहराते हुए याचिकाकर्ता की अपील खारिज कर दी गई थी। याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त अवसर दिया गया, परन्तु याचिकाकर्ता कोर्ट को गुमराह करते रहे।
याचिकाकर्ता के वकील का कहना है कि याचिकाकर्ता लंबे समय से संबंधित जगह पर काबिज है। याचिकाकर्ता ने कोई निर्माण कार्य नहीं किया है। बल्कि, याचिकाकर्ता की बाउंड्रीवॉल के पास एक पुराना पेड़ खतरनाक हालत में था और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए याचिकाकर्ता ने उस दीवार की मरम्मत की थी। यहाँ भी याचिकाकर्ता ने झूठ बोला और कोर्ट को गुमराह किया है। जब कोर्ट को असलियत पता चलेगी तब कोर्ट अंतिम निर्णय कर सकेगी।

इसी दौरान, याचिकाकर्ता को कारण बताओ नोटिस मिला और याचिकाकर्ता ने अपना पक्ष बताते हुए जवाब भी दाखिल किया। यह तर्क दिया गया है कि मामले के उक्त पहलू की जांच किए बिना और अप्रासंगिक सामग्री को ध्यान में रखते हुए, विवादित आदेश पारित किए गए हैं। जबकि ऐसा नहीं है। याचिकाकर्ता द्वारा तथ्यों को छिपाया गया और कोर्ट को गुमराह किया गया। याचिकाकर्ता का रिहायशी न होते हुए नजूल भूमि की खाली पड़ी भूमि को अपना बताया गया।
यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता को पहले दो अलग-अलग रिट याचिकाओं (रिट- C नंबर- 6515/2026, जिसका निपटारा दिनांक- 19.06.2026 को हुआ) के ज़रिए इस कोर्ट में आना पड़ा था। इसके बाद याचिकाकर्ता ने फिर से रिट- C नंबर- 6840/2026 के ज़रिए इस कोर्ट के रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल किया, जिसका निपटारा 30.06.2026 को हुआ। याचिकाकर्ता ने अध्यक्ष / नियंत्रक, विनियमित क्षेत्र प्रतापगढ़ के यहाँ अपील दाखिल की।

इसके बाद, प्रतिवादियों को कानून के अनुसार अपील पर फैसला करना था, लेकिन वे फिर से बाहरी बातों से प्रभावित हुए और अपील खारिज कर दी। यह कहा गया है कि तोड़-फोड़ के उक्त आदेशों को अब याचिकाकर्ता के खिलाफ लागू करने की कोशिश की जा रही है, इसलिए अंतरिम सुरक्षा दी जानी चाहिए। स्टैंडिंग काउंसिल द्वारा सरकार का पक्ष न रखना सरकार के आदेशों के क्रियान्वयन को कमजोर करने वाला सिद्ध हो रहा है। ऐसा कार्य दुर्भाग्यपूर्ण है।
राज्य के विद्वान अतिरिक्त मुख्य स्थायी वकील का कहना है कि उन्हें जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय चाहिए। जो भी हो, राज्य को स्पष्ट रूप से दिनांक- 25/04/2026 की स्पॉट निरीक्षण रिपोर्ट रिकॉर्ड पर लानी होगी, जो उस कारण बताओ नोटिस का आधार थी, जो याचिकाकर्ता को जारी किया गया था। विनियमित क्षेत्र की तरफ से दिनांक- 25/04/2026 को सुल्तान हसन याचिकाकर्ता को नोटिस जारी की गई और अपना पक्ष रखने को कहा गया था।

कोर्ट का मानना है कि इसमें यह भी स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि क्या कारण बताओ नोटिस में याचिकाकर्ता को स्पष्ट और असंदिग्ध तथ्य बताए गए थे, जिनके संदर्भ में याचिकाकर्ता से जवाब मांगा गया था। इस तथ्य के अलावा, राज्य के प्रतिवादी जवाबी हलफनामा दाखिल कर सकते हैं। राज्य के प्रतिवादी नम्बर-1 व 2 की तरफ से आदेश तो पारित कर दिया गया, परन्तु हाईकोर्ट में पक्ष रखने के लिए सतर्कता नहीं बरती गई, जिससे याचिकाकर्ता को लाभ मिला।
प्रतिवादी नंबर-4 शिकायतकर्ता रमेश चन्द्र तिवारी को नोटिस जारी किया जाए। एक सप्ताह के भीतर कदम उठाए जाएं। इस मामले को 05/10/2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में सूचीबद्ध किया जाए। अंतरिम उपाय के तौर पर, यह आदेश दिया जाता है कि तोड़-फोड़ से संबंधित 17/08/2026 और 23/06/2026 के विवादित आदेशों का अमल रुका रहेगा। प्रतिवादी नंबर-4 शिकायतकर्ता रमेश चन्द्र तिवारी भी अब हाईकोर्ट में पक्ष रख सकेंगे।