प्रतापगढ़ नगरपालिका में सिविल जेई उपलब्ध है तो PWD के JE पर ADM वित्त/राजस्व मेहरबान क्यों…???

निकाय में ‘सेटिंग-गेटिंग’ के सवालों ने पकड़ा जोर, प्रतापगढ़ में एक नगरपालिका और 18 नगर पंचायतो में 10 नगर पंचायतो के काम PWD से उधार के जेई अनिल जायसवाल से लिया जा रहा है, कार्य…
प्रतापगढ़। जिले की नगर पंचायतों में विकास कार्यों की गुणवत्ता, तकनीकी जांच और निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए जिम्मेदार तकनीकी अमले को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने नगर विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जेई अनिल जायसवाल को करीब 10 नगर पंचायतों का प्रभार सौंपे जाने की चर्चा है। यदि यह जानकारी सही है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर एक जेई एक साथ इतने नगर निकायों के तकनीकी कार्यों की प्रभावी निगरानी कैसे कर रहा है ?
मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि प्रतापगढ़ जिले की नगर पंचायतों में सड़क, नाली, इंटरलॉकिंग, जल निकासी, प्रकाश व्यवस्था, भवन निर्माण समेत लगातार तमाम विकास कार्य संचालित होते हैं। ऐसे में प्रत्येक कार्य की तकनीकी जांच, माप, गुणवत्ता परीक्षण और भुगतान से पहले आवश्यक सत्यापन की जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
एक जेई, लगभग 10 नगर पंचायतो की निगरानी करेगा अथवा अपने कमीशन का हिस्सा लेकर सिर्फ कागजी खानापूर्ति करेगा.₹। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि एक ही अभियंता को लगभग 10 नगर पंचायतों की जिम्मेदारी दी गई है तो क्या वह प्रत्येक निकाय में चल रहे विकास कार्यों का मौके पर जाकर नियमित निरीक्षण कर पाता है ?
★क्या प्रत्येक सड़क की गुणवत्ता देखी जाती है ?
★क्या नालियों और इंटरलॉकिंग कार्यों की तकनीकी जांच होती है ?
★क्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता का परीक्षण होता है ?
★क्या भुगतान से पहले मौके पर कार्य की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाता है ?
सबसे महत्वपूर्ण क्या इतने बड़े कार्यक्षेत्र को एक अधिकारी वास्तव में प्रभावी ढंग से संभाल सकता है ? इन सवालों का जवाब नगर विकास विभाग और जिला प्रशासन को सार्वजनिक रूप से देना चाहिए।
‘सेटिंग-गेटिंग’ की चर्चा क्यों ?
सूत्रों के अनुसार, जिले में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में नगर पंचायतों का प्रभार एक ही जेई के पास पहुंचने के पीछे क्या वजह है। हालांकि सेटिंग-गेटिंग अथवा किसी अनियमितता की पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इतनी बड़ी जिम्मेदारी एक व्यक्ति को दिए जाने की जानकारी ने चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है।
यदि विभाग के पास पर्याप्त तकनीकी स्टाफ उपलब्ध है तो फिर सवाल है कि जिम्मेदारियों का समान वितरण क्यों नहीं किया गया और यदि जेई की वास्तव में कमी है तो विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि जिले में स्वीकृत पद कितने हैं, वर्तमान में कितने जेई तैनात हैं और कितने पद रिक्त हैं…???
नगर पंचायतों के करोड़ों के काम, निगरानी पर सवाल…
नगर निकायों में विकास कार्यों पर सरकारी धन खर्च होता है। ऐसे में तकनीकी अधिकारी की भूमिका केवल फाइलों पर हस्ताक्षर करने तक सीमित नहीं हो सकती। सड़क की मोटाई से लेकर निर्माण सामग्री, कार्य की मात्रा और गुणवत्ता तक तकनीकी स्तर पर जांच की जिम्मेदारी होती है।
ऐसे में यदि एक अधिकारी को एक साथ लगभग 10 निकायों का प्रभार दिया गया है तो तकनीकी निगरानी की वास्तविक क्षमता और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है। प्रतापगढ़ जिले की आधिकारिक वेबसाइट पर पट्टी नगर पंचायत सहित नगर निकायों की जानकारी उपलब्ध है।
अब प्रशासन से चाहिए सीधा जवाब…
इस पूरे मामले में जिलाधिकारी और नगर विकास विभाग को निम्न बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
1. जेई अनिल जायसवाल की मूल तैनाती किस नगर निकाय में है ?
2. उन्हें किन-किन नगर पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है ?
3. लगभग 10 नगर पंचायतों का प्रभार देने का लिखित आदेश किस अधिकारी ने जारी किया ?
4. जिले में जेई के कितने स्वीकृत पद हैं और कितने पद रिक्त हैं ?
5. क्या विभाग में अन्य जेई उपलब्ध हैं ?
6. एक जेई द्वारा इतने निकायों की तकनीकी जांच के लिए विभाग ने क्या व्यवस्था बनाई है ?
7. पिछले एक वर्ष में इन नगर पंचायतों में हुए कार्यों के कितने स्थलीय निरीक्षण उक्त जेई द्वारा किए गए ?
8. कितने कार्यों की माप पुस्तिका और भुगतान से पहले तकनीकी सत्यापन किया गया ?
‘खेल’ है तो जांच में सामने आए, व्यवस्था है तो रिकॉर्ड में दिखे। यह मामला किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता और तकनीकी निगरानी की विश्वसनीयता का है।
यदि एक जेई को वास्तव में लगभग 10 नगर पंचायतों का प्रभार दिया गया है तो विभाग को आदेश सार्वजनिक करने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। यदि स्टाफ की कमी है तो उसका रिकॉर्ड सामने रखा जाए और यदि कोई विशेष प्रशासनिक व्यवस्था के तहत यह जिम्मेदारी दी गई है तो उसका आधार भी स्पष्ट किया जाए।
सवाल सीधा है, क्या प्रतापगढ़ में जेई की इतनी कमी है कि जिले की आधी से अधिक नगर पंचायतों की तकनीकी जिम्मेदारी एक ही जेई के कंधों पर डालनी पड़ी या फिर इस असामान्य व्यवस्था के पीछे कोई ऐसी प्रशासनिक कहानी है, जिसे फाइलों के बाहर आने की जरूरत है ?
जिले में स्थानीय निकायों (नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत आदि) के प्रभारी अधिकारी आमतौर पर अपर जिलाधिकारी (ADM) स्तर के अधिकारी होते हैं, जिन्हें जिला प्रशासन द्वारा प्रभारी अधिकारी (स्थानीय निकाय) के रूप में नामित किया जाता है।
मुख्य भूमिका: यह जिला स्तर पर शहरी स्थानीय निकायों के विकास कार्यों, प्रशासनिक बैठकों, और शासन के दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन की देखरेख करते हैं।
समग्र नियंत्रण: समग्र रूप से यह व्यवस्था जिलाधिकारी (DM) के मार्गदर्शन और नियंत्रण में कार्य करती है।
विशिष्ट निकाय स्तर: व्यक्तिगत निकायों (जैसे नगर पालिका या नगर पंचायत) के प्रशासनिक संचालन के लिए राज्य सरकार द्वारा अलग से अधिशासी अधिकारी (EO) नियुक्त किए जाते हैं।
विशेष पड़ताल जारी है। जिम्मेदारी से जुड़े दस्तावेज, आदेश और नगर पंचायतवार प्रभार की सूची सामने आने के बाद तस्वीर और साफ हो सकती है।