अंकिता भंडारी हत्याकांड: सत्ता, पैसा और ‘VIP सिस्टम’ के बीच कुचली गई एक बेटी को नहीं मिला न्याय

उत्तराखंड की पहाड़ियों से उठी एक चीख़, जिसने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया। नाम था, अंकिता भंडारी। एक साधारण परिवार की बेटी, जो नौकरी के सपने लेकर घर से निकली थी, लेकिन सत्ता, पैसे और कथित ‘VIP संस्कृति’ के दलदल में उसकी ज़िंदगी छीन ली गई…

कौन थीं, अंकिता भंडारी…?

अंकिता भंडारी, उम्र लगभग 19 वर्ष, पौड़ी गढ़वाल की रहने वाली थीं। वह ऋषिकेश के पास स्थित वनतरा रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर कार्यरत थीं। साधारण नौकरी, सीमित वेतन और बड़ी उम्मीदें, यही उसकी दुनिया थी।

घटना की शुरुआत: अचानक गुमशुदगी

18 सितंबर, 2022 को अंकिता अचानक लापता हो गई। परिजनों ने जब संपर्क करने की कोशिश की तो फोन बंद मिला। शुरुआत में इसे सामान्य गुमशुदगी बताया गया, लेकिन हालात जल्द ही संदिग्ध हो गए। पहले दिन से लेकर आज तक सामान्य गुमशुदगी सवालों के घेरे में है।

पुलिस पर उठे गंभीर सवाल

अंकिता के लापता होने के बाद पुलिस द्वारा जानबूझकर FIR दर्ज करने में देरी। पुलिस द्वारा रिज़ॉर्ट प्रबंधन पर शुरुआती नरमी। ‘VIP मेहमान’ की चर्चाओं को दबाने की कोशिश। इन सबने शक को और गहरा किया। जनता ने भी सवाल उठाना शुरू किया कि अंकिता भंडारी प्रकरण में क्या रसूखदारों को बचाने की कोशिश हो रही है ?

सबसे बड़ा खुलासा: ‘विशेष सेवा’ का दबाव

शुरुआत में ही जांच में सामने आया कि रिज़ॉर्ट प्रबंधन द्वारा अंकिता भंडारी पर कथित VIP मेहमानों को “विशेष सेवा” देने का दबाव बनाया गया था। अंकिता ने इसका विरोध किया। इसी विरोध ने उसकी जान ले ली। यह सिर्फ हत्या नहीं थी, यह इंकार करने की सज़ा थी जो अंकिता भंडारी को दी गई।

शव की बरामदगी: सच्चाई सामने आई

24 सितंबर, 2022 को अंकिता का शव चीला नहर से बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने साफ किया कि अंकिता की हत्या की गई। सबूत मिटाने के लिए शव नहर में फेंका गया। अक्सर ऐसे हत्याकांड में शव को ठिकाने लगाने के लिए अपराधी ऐसी ही चाल चलता है, परन्तु उसकी चाल अक्सर फेल हो जाती है और शव मिलने के बाद मामला परत दर परत स्वतः खुलने लगता है।

गिरफ्तारी और आरोप

तीन नाम सामने आए, जिनमें पुलकित आर्य रिज़ॉर्ट मालिक, प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से संबंध, दूसरा नाम “वनतरा रिज़ॉर्ट” का मैनेजर अंकित गुप्ता और तीसरा नाम  “वनतरा रिज़ॉर्ट” का कर्मचारी सौरभ भास्कर का नाम खुलकर सामने आया। तीनों पर हत्या और साजिश के गंभीर आरोप लगे। यक्ष प्रश्न यह है कि किस VIP मेहमानों को “विशेष सेवा” देने का दबाव रिज़ॉर्ट प्रबंधन पर था ? उस VIP के नाम का खुलासा आज तक न हो सका।

कोर्ट की लड़ाई और फैसला

करीब ढाई साल की सुनवाई, 97 गवाह, 500 से अधिक पन्नों की चार्जशीट और अंततः अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई।
फैसले ने यह साबित किया कि देर से ही सही, लेकिन न्याय ज़िंदा है। पर सवाल अब भी बाकी हैं। वो VIP कौन था, जिसका नाम आज भी सार्वजनिक नहीं हुआ ? क्या पूरे सच को जानबूझकर सीमित दायरे में रखा गया ? क्या रसूख और राजनीति ने जांच की दिशा तय की ? हाल के महीनों में वायरल वीडियो और बयान इन सवालों को फिर हवा दे रहे हैं।

अंकिता सिर्फ एक नाम नहीं, अंकिता अब एक प्रतीक है

कार्यस्थल पर महिलाओं की असुरक्षा का, सत्ता के दुरुपयोग का और उस व्यवस्था का, जहाँ ‘ना’ कहना अपराध बन जाता है। अंकिता भंडारी की केस ने साबित कर दिया कि अभी भी देश में न्याय पाने के लिए लड़ाई लड़ना आसान नहीं बल्कि कठिन तपस्या के समान है।

देश में जब तक VIP कल्चर का खात्मा नहीं हो जाता तब तक अपराध में संलिप्त VIP लोग इसका फायदा उठाते रहेंगे और वह कानून के साथ आँख मिचौली का खेल खेलते रहेंगे। इस लिए देश के सड़े हुए सिस्टम को बदलना होगा और अपराध में संलिप्त VIP लोगों के साथ किसी प्रकार की छूट देने से बचना होगा, तभी न्याय मिल सकेगा।

इसलिए अंकिता भंडारी वाले प्रकरण में अभी भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। उक्त प्रकरण में कथित VIP एंगल की स्वतंत्र जांच हो ! तभी अंकिता भंडारी के परिजनों को न्याय मिल सकेगा और अंकिता भंडारी की आत्मा को शांति मिल सकेगी। साथ ही जनमानस में कानून के प्रति आस्था में विश्वास बढेगा।

देश में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बने और यह सुनिश्चित करना कि अंकिता भंडारी जैसी किसी बेटी को फिर कभी इंसाफ के लिए सड़कों पर संघर्ष न करना पड़े। अंकिता भंडारी से पहले भी अनगिनत मामले प्रकाश में आये और जिस पर मीडिया ट्रायल हुआ, उसमें न्याय मिला अन्यथा उसे दफ़न कर दिया गया।

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