भूमाफियाओं की निगाह से प्रतापगढ़ में धर्मशाला भी सुरक्षित नहीं, बेल्हा के धरती पकड़ उसे भी खरीदने में नहीं कर रहें हैं, संकोच

प्रतापगढ़ नगरपालिका क्षेत्र में चौक कचेहरी रोड़ पर स्थित लखनलाल चौरसिया धर्मशाला को ध्वस्त करके उनके कथित उत्तराधिकारी ने नगर के एक आभूषण कारोबारी के हाथ बेंच दिया…
बेल्हा के इस धर्मशाला को प्रतापगढ़ के नगरपालिका परिषद् बेला प्रतापगढ़ के अध्यक्ष रहे स्व लखनलाल चौरसिया ने अपने जीवनकाल में बनवाया था और उस दौर में प्रतापगढ़ में होटल नहीं हुआ करते थे तो प्रतापगढ़ में आने वाले यात्री इसी धर्मशाला में आकर रुकते थे। धर्मशाला का निर्माण कराने वाले लखनलाल चौरसिया जी आरएसएस से जुड़े थे और उनके यहाँ भारत रत्न और देश के प्रधानमंत्री रहे पंडित अटल बिहारी वाजपेयी जी आकर ठहरते थे l लखनलाल चौरसिया जी के बेटे नहीं थे और बेटियां ही थी, पर उन्होंने कभी नहीं सोचा रहा होगा कि उनके कथित उत्तराधिकारी उनकी ये विरासत भी बेंच खायेंगे।
सराय एक्ट से संचालित किसी धर्मशाला का नियमतः बिक्रय नहीं किया जा सकता, परन्तु प्रतापगढ़ में सबकुछ संभव है। यहाँ चांदी का जूता मारकर कोई भी काम कराया जा सकता है। इस धर्मशाला को बेंचने में भी यही खेल खेला गया और चौक बजाजा रोड़ के लोग ही इस खेल में शामिल रहे। जिस भूमि पर उक्त धर्मशाला का निर्माण किया गया वह नजूल सरकार की भूमि है और वर्त्तमान में नजूल सरकार की भूमि पर क्रय-विक्रय पर यूपी सरकार ने रोक लगा रखी है, फिर भी उक्त नजूल सरकार की भूमि का बैनामा हो जाना, सम्पूर्ण ब्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है।

सर्किल रेट 1 करोड़, 41 लाख 31 हजार है, जिस पर लगी है, 9 लाख, 89 हजार, 200 रूपये स्टाम्प ड्यूटी…
ये धर्मशाला चौक से कचेहरी रोड़ पर रतन मेडिकल स्टोर और किशन खंडेलवाल “पहलवान” के बीच में पड़ता था और यह तीन से चार मंजिल की शानदार इमारत रही, परन्तु खरीदने से पहले इसे ध्वस्त कर दिया गया, ताकि सरकारी मालियत को कम किया जा सका और धर्मशाला का अस्तित्व ही समाप्त हो जाये, जिससे उसका जिक्र बैनामा में न आये। समतल जमीन करने के उपरांत उक्त बैनामा किया गया जिसकी माप पूरब से पश्चिम 20 फिट, 6 इंच और उत्तर से दक्षिण 82 फिट, 4 इंच है। उक्त सम्पत्ति की सर्किल रेट 1 करोड़, 41 लाख 31 हजार है और प्रतिफल भी सेम लिखा गया है, जबकि सूत्रों से जो जानकारी मिली वह साढ़े तीन करोड़ रूपये में क्रय की गई है।
विक्रय पत्र में विक्रेता के रूप में श्रद्धा चौरसिया पुत्री विजय कुमार चौरसिया उर्फ़ विनय कुमार चौरसिया पत्नी पुनीत गुप्ता निवासी- 123/513 फैक्ट्री एरिया, फजलगंज, आर के नगर, कानपुर नगर और क्रेता आकाश कुमार अग्रवाल पुत्र विनोद अग्रवाल निवासी- 104 मकंद्रूगंज, श्याम बिहारी गली, प्रतापगढ़ द्वारा कराया गया है। पहला गवाह राजेश कुमार खंडेलवाल पुत्र रतन लाल खंडेलवाल, निवासी- 65 चौक, प्रतापगढ़ हैं व दूसरा गवाह के तौर पर विक्रेता श्रद्धा चौरसिया के पति पुनीत गुप्ता ने गवाही की है।