अलीगढ़उत्तरप्रदेश दो सिर और चार हाथ-पैर वाले बालकों को देख मां की मौत, दोनों नवजात स्वस्थ By Pratibha Rajdar Last updated Mar 21, 2026 611 दो सिर और चार हाथ-पैर वाले धड़ से जुड़े हुए जुड़वा बच्चों को जन्म देकर उनकी मां सदमे आ गई। हालत बिगड़ने पर उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजनों के अनुसार जुड़वा बच्चे बालक हैं और स्वस्थ हैं। ऑपरेशन थियेटर में सभी अचंभित रह गए यूपी के अलीगढ़ स्थित सासनी गेट के बिहारी नगर निवासी आकाश कुमार ने पत्नी नीरू को प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल में 17 मार्च को भर्ती कराया। दोपहर में उनकी हालत खराब होने पर चिकित्सक ने ऑपरेशन करने के लिए कहा। परिजनों की मंजूरी के बाद स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मेघा ने ऑपरेशन के बाद बच्चे का जन्म कराया। नवजात को देख ऑपरेशन थियेटर में सभी अचंभित रह गए। पैदा हुए जुड़वा बच्चे धड़े से जुड़े हुए हैं, उनके दो सिर और चार हाथ-पैर हैं। यह देख कर मां सदमे में पहुंच गई। दोनों बच्चे हैं स्वस्थ जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. मो. तैय्यब खान ने बताया कि धड़ से जुड़े जुड़वा बच्चों को देखकर मां पोसपार्टम साइकोसिस (प्रसव के बाद होने वाली दुर्लभ मानसिक स्थिति) से सदमे में आ गई। उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें उसी दिन रात में जेएन मेडिकल कालेज रेफर किया गया, मगर परिजन क्वार्सी स्थित मां वैष्णो हॉस्पिटल ले गए। वहां पर महिला का उपचार शुरू हुआ। पति आकाश कुमार ने बताया कि वहीं पर उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। शव लाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया, जुड़वा बच्चे स्वस्थ हैं। इस कारण होते हैं दुर्लभ बच्चे जिला महिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. चंचल वार्ष्णेय ने बताया कि जब एक ही फर्टिलाइज्ड एग दो अलग-अलग भ्रूणों में विभाजित होता है, तो जुड़वा बच्चे आकार लेते हैं। यदि भ्रूणों का विभाजन निषेचन के लगभग 13 से 17 दिनों के बाद भी पूरा नहीं होता है, तो बच्चे जुड़े हुए रह जाते हैं। समाचार 611 Share
दोनों बच्चे हैं स्वस्थ जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. मो. तैय्यब खान ने बताया कि धड़ से जुड़े जुड़वा बच्चों को देखकर मां पोसपार्टम साइकोसिस (प्रसव के बाद होने वाली दुर्लभ मानसिक स्थिति) से सदमे में आ गई। उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें उसी दिन रात में जेएन मेडिकल कालेज रेफर किया गया, मगर परिजन क्वार्सी स्थित मां वैष्णो हॉस्पिटल ले गए। वहां पर महिला का उपचार शुरू हुआ। पति आकाश कुमार ने बताया कि वहीं पर उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। शव लाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया, जुड़वा बच्चे स्वस्थ हैं। इस कारण होते हैं दुर्लभ बच्चे जिला महिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. चंचल वार्ष्णेय ने बताया कि जब एक ही फर्टिलाइज्ड एग दो अलग-अलग भ्रूणों में विभाजित होता है, तो जुड़वा बच्चे आकार लेते हैं। यदि भ्रूणों का विभाजन निषेचन के लगभग 13 से 17 दिनों के बाद भी पूरा नहीं होता है, तो बच्चे जुड़े हुए रह जाते हैं।