नजूल प्रभारी/अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) प्रतापगढ़ आदित्य प्रजापति को नहीं है, नजूल सरकार की संपत्ति से कोई सरोकार
- सूबे के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित , मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ व अपर मुख्य सचिव राजस्व विभाग एवं अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग (गोपन) और सचिव- राजस्व परिषद् उत्तर प्रदेश लखनऊ से शिकायत करना ब्यर्थ। शासनादेश के बाद भी नजूल सरकार की भूमि का हो रहा धड़ल्ले से बैनामा। चौहद्दी और गाटा संख्या बदलकर हो रहा खेल, अधिकारी भी इस खेल में हैं, शामिल।
मंडलायुक्त, प्रयागराज व जिलाधिकारी, प्रतापगढ़ एवं ईओ, नगरपालिका परिषद् बेला- प्रतापगढ़ भी आँख मूंदकर कर रहे हैं, नौकरी
प्रतापगढ़ की सदर तहसील के राजस्व गाँव बेल्हाघाट (अंदर) की गाटा संख्या- 1011 मि. व गाटा संख्या- 1012 मि. नजूल सरकार की भूमि पर स्थित धर्मशाला को अवैध तरीके ढंग से गिराए जाने व नजूल सरकार पर क्रय-विक्रय के प्रतिबन्ध के बावजूद धर्मशाला की केयरटेकर की बेटी द्वारा सुनियोचित षड्यंत्र के तहत सरकारी नजूल सरकार की भूमि को विक्रय कर अन्यथा लाभांवित होने की नियत से नियम विरुद्ध ढंग से विक्रय किये जाने की शिकायत होने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी को न कुछ दिखाई दे रहा है और न कुछ सुनाई पड़ रहा है।
सामाजिक कार्यकर्त्ता है और समाज हित के लिए आवाज उठाने वाले के सामाजिक कार्यकर्त्ता रमेश तिवारी ने शिकायत किया है कि जनपद प्रतापगढ़ की तहसील सदर के राजस्व गाँव बेल्हाघाट (अंदर) मोहल्ला मकन्द्रूगंज की गाटा संख्या- 1011 मिलजुमला व 1012 मिलजुमला में स्थित मकान संख्या- 7 व 8 रकबा- 0.015 हेक्टेयर यानि 157.22 वर्गमीटर की रजिस्ट्री उप निबंधक कार्यालय- सदर प्रतापगढ़ में दिनांक- 13/03/2026 को श्रद्धा चौरसिया पुत्री विजय कुमार चौरसिया उर्फ़ विनय कुमार चौरसिया पत्नी पुनीत गुप्ता निवासी- 123/513 फैक्ट्री एरिया, फजलगंज, आर के नगर, कानपुर नगर द्वारा आकाश कुमार अग्रवाल पुत्र विनोद अग्रवाल निवासी- 104 मकंद्रूगंज, श्याम बिहारी गली, प्रतापगढ़ के हाथ कूट रचित दस्तावेज तैयार कराकर विभागीय साजिश से बिक्रय किया गया है।
उक्त विक्रय पत्र में पहला गवाह राजेश कुमार खंडेलवाल पुत्र रतन लाल खंडेलवाल, निवासी- 65 चौक, प्रतापगढ़ हैं व दूसरा गवाह के तौर पर विक्रेता श्रद्धा चौरसिया के पति पुनीत गुप्ता ने गवाही की है।उक्त भूमि गाटा संख्या- 1011 मिलजुमला व 1012 मिलजुमला नजूल सरकार भूमि है। उक्त भूमि की जो चौहद्दी विक्रय पत्र में दर्शायी गई है, वह चौक कचेहरी रोड़ पर स्थित लखनलाल चौरसिया धर्मशाला की है, जिसे बड़े सुनियोजित ढंग से पहले उसे ध्वस्त किया गया, ताकि उसका अस्तिव समाप्त हो सके और उसकी मालियत कम की जा सके। इस तरह प्रतापगढ़ के भूमाफियाओं की निगाह से प्रतापगढ़ शहर में बने धर्मशाला भी अब सुरक्षित नहीं हैं, बेल्हा के धरती पकड़ उसे भी खरीदने में संकोच नहीं कर रहें हैं।
प्रतापगढ़ नगरपालिका क्षेत्र में चौक कचेहरी रोड़ पर स्थित लखनलाल चौरसिया धर्मशाला को ध्वस्त करके उनके कथित उत्तराधिकारी श्रद्धा चौरसिया ने नगर के एक आभूषण कारोबारी आकाश अग्रवाल के हाथ बेंच दिया है। सराय एक्ट से संचालित किसी धर्मशाला का नियमतः बिक्रय नहीं किया जा सकता, परन्तु प्रतापगढ़ में सबकुछ संभव है। यहाँ चांदी का जूता मारकर कोई भी काम कराया जा सकता है। इस धर्मशाला को बेंचने में भी यही खेल खेला गया और चौक बजाजा रोड़ के लोग ही इस खेल में शामिल रहे। जिस भूमि पर उक्त धर्मशाला का निर्माण किया गया वह नजूल सरकार की भूमि है और वर्त्तमान में नजूल सरकार की भूमि पर क्रय-विक्रय पर यूपी सरकार ने रोक लगा रखी है, फिर भी उक्त नजूल सरकार की भूमि का बैनामा हो जाना, सम्पूर्ण ब्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है।
यह धर्मशाला चौक से कचेहरी रोड़ पर रतन मेडिकल स्टोर और किशन खंडेलवाल “पहलवान” के बीच में पड़ता था और यह तीन से चार मंजिल की शानदार इमारत रही, परन्तु खरीदने से पहले इसे ध्वस्त कर दिया गया, ताकि सरकारी मालियत को कम किया जा सका और धर्मशाला का अस्तित्व ही समाप्त हो जाये, जिससे उसका जिक्र बैनामा में न आये। समतल जमीन हो जाने के उपरांत उक्त बैनामा किया गया, जिसकी माप पूरब से पश्चिम 20 फिट, 6 इंच और उत्तर से दक्षिण 82 फिट, 4 इंच है। उक्त सम्पत्ति की सर्किल रेट 1 करोड़, 41 लाख 31 हजार है और प्रतिफल भी सेम लिखा गया है, जबकि सूत्रों से जो जानकारी मिली वह साढ़े तीन करोड़ रूपये में क्रय की गई है।
नगरपालिका के अभिलेख में भवन संख्या- 23 व भवन संख्या- 24 जो लखनलाल चौरसिया के नाम दर्ज रहा जो दिनांक- 30/05/1996 को नया भवन संख्या- 98 व भवन संख्या-99 को अध्यक्ष महोदय ने खारिज दाखिल करते हुए विशेषर दयाल, लखनलाल चौरसिया “विश्राम गृह” और संरक्षिका के रूप में राधा रानी पत्नी स्व लखनलाल चौरसिया का नाम अंकित किया गया। एक धर्मशाला के संचालन का बकायदा एक बायलाज होता है और उस बायलाज के अनुसार ही वह धर्मशाला संचालित होता है। धर्मशाला को नियमतः बेंचा नहीं जा सकता। धर्मशाला को संचालित करने के लिए एक केयरटेकर नियुक्त किया जाता है जो उसका संचालन और रख रखाव कर सके।
केयरटेकर को धर्मशाला बेंचने का अधिकार नहीं होता। वैसे ही विशेषर दयाल, लखनलाल चौरसिया “विश्राम गृह” और संरक्षिका के रूप में राधा रानी पत्नी स्व लखनलाल चौरसिया भी केयरटेकर रही, जिनको विक्रय का अधिकार कानूनन न कभी रहा और न आज है। शिकायत कर्ता ने आग्रह है कि उक्त विशेषर दयाल, लखनलाल चौरसिया “विश्राम गृह” और संरक्षिका के रूप में राधा रानी पत्नी स्व लखनलाल चौरसिया द्वारा विक्रीत की गई सम्पत्ति की विक्री नियम विरुद्ध हुई है। नजूल सरकार की गाटा संख्या- 1011 मिलजुमला व गाटा संख्या- 1012 मिलजुमला है, जिसके क्रय-विक्रय पर यूपी सरकार ने रोक लगा रखा है। परन्तु एक सुनियोचित षड्यंत्र के तहत सरकारी नजूल सरकार की भूमि को विक्रय कर अन्यथा लाभांवित होने के दुराशय से विक्रेता व क्रेता सहित दोनों हाशिया गवाहों ने ये कूट रचना और धोखाधड़ी का कार्य किया है।
विक्रय पत्र में सिर्फ आबादी की भूमि दिखाकर उसका बैनामा करा लिया गया, जबकि जिस स्थल की चौहद्दी बैनामा में दर्शायी गई है, वहाँ गाटा संख्या- 1012 मिलजुमला नहीं है। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी सहित सभी जिम्मेदार अधिकारियों को शिकायती पत्र दिनांक- 29/05/2026 को प्रेषित कर कड़ी कानूनी कार्यवाही की माँग की है। परंतु जिले में तैनात जिम्मेदार अधिकारी को ऐसे राज्य सरकार के हित वाले कार्य करने की फुर्सत ही नहीं है। तभी तो शिकयत करने के बावजूद कूट रचना करके सरकार को चूना लगाने वाले क्रय की गई नजूल सरकार की भूमि पर पहले बोरिंग करके समरसेबल पम्प स्थापित किये और अब निर्माण कार्य कराना शुरू किए हैं। जबकि इन जिम्मेदार अधिकारियों का कर्तब्य है कि राज्य सरकार में शासनादेश का कड़ाई से अनुपालन कराते और कूट रचना कर नजूल सरकार की संपत्ति का बैनामा लेने में शामिल सभी लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराते।