निर्मला नागपाल, जो अपने बच्चों की खातिर बन गई सरोज खान
साल- 1950 के दशक के अंत में निर्मला नागपाल एक बैकग्राउंड डांसर के रूप में भी काम किया। बाद में वह एक प्रसिद्ध कोरियोग्राफर बनीं और 2000 से अधिक बॉलीवुड गानों को कोरियोग्राफ किया। सरोज खान का असली नाम निर्मला नागपाल था।
फिल्मों में काम करने से पहले उनके पिता ने उनका नाम बदलकर सरोज खान रख दिया था, ताकि पुरानी सोच वाले परिवार और समाज को उनकी बेटी के फिल्मों में काम करने के बारे में सच्चाई का पता न चल सके। उन्होंने 13 साल की उम्र में अपने डांस गुरु सोहनलाल से शादी कर ली थी, जो उस समय 43 वर्ष के थे और पहले से ही शादीशुदा थे।
सरोज खान ने 1975 में फिल्म “मौसम” से एक कोरियोग्राफर के रूप में शुरुआत की, लेकिन उन्हें साल- 1988 में “तेजाब” फिल्म से पहचान मिली। उन्होंने माधुरी दीक्षित, श्रीदेवी और ऐश्वर्या राय जैसी अभिनेत्रियों के साथ काम किया। सरोज खान को “नच बलिए”, “उस्तादों के उस्ताद”, “नचले वे विद सरोज खान”, “बूगी-वूगी”, और “झलक दिखला जा” जैसे कई रियलिटी शो में जज के रूप में भी देखा गया था।
निर्मला नागपाल, जो अपने बच्चों की खातिर बन गई सरोज खान। और फिर बनी सेलेब्रिटी कोरियोग्राफ़र सरोज खान। आज निर्मला नागपाल के सरोज खान बनने की कहानी जानेंगे। सरोज उर्फ़ निर्मला उस वक्त तक तय कर चुकी थी कि उन्हें फ़िल्म इंडस्ट्री में ही अपना भविष्य बनाना है। क्योंकि वो तब तक फ़िल्म इंडस्ट्री में आ चुकी थी। इत्तेफाक से इसी दौर में साउथ के मशहूर डांस गुरू सोहन लाल और हीरा लाल बॉम्बे फिल्म इंडस्ट्री में भी काम करने आ गए थे।
दोनों भाईयों की इस जोड़ी ने साउथ फिल्म इंडस्ट्री में पहले ही अपना डंका बजा दिया था। वहीं बॉम्बे फिल्म इंडस्ट्री में भी आते ही इन दोनों का बढ़िया नाम हो गया। दोनों भाईयों की ये जोड़ी फ्लैट नंबर 9 नाम की एक फिल्म में भी डांस मास्टर की हैसियत से काम कर रही थी। निर्मला तय कर चुकी थी कि उन्हें फ़िल्म इंडस्ट्री में ही अपना भविष्य बनाना है। क्योंकि वो तब तक फ़िल्म इंडस्ट्री में आ चुकी थी।
इत्तेफाक से इसी दौर में साउथ के मशहूर डांस गुरू सोहन लाल और हीरा लाल बॉम्बे फिल्म इंडस्ट्री में भी काम करने आ गए थे। फिल्म के एक गाने में निर्मला भी हेलेन के साथ डांस परफॉर्म कर रही थी। मास्टर सोहन लाल, हेलन संग निर्मला को भी डांस स्टैप सिखा रहे थे। निर्मला की लर्निंग कैपेसिटी देखकर मास्टर सोहन लाल उनसे बड़ा इंप्रैस हुए। निर्मला को असिस्टेंट बना लिया।
सोहन लाल की असिस्टेंट के तौर पर निर्मला को सबसे पहले वैजयंती माला को डांस सिखाने का मौका मिला। फिल्म थी कॉलेज गर्ल और वैजयंती के अपोज़िट फिल्म में शम्मी कपूर थे। शुरू में तो वैजयंती माला को यकीन ही नहीं हुआ कि उन्हें 12 साल की उम्र की एक लड़की से डांस सीखना होगा। शुरुवात में वो थोड़ा नाराज़ भी हुई। मगर जब सोहन लाल ने वैजयंती को भरोसा दिलाया कि लड़की बहुत टैलेंटेड है तो वो निर्मला से डांस सीखने को राज़ी हुई।
सोहन लाल के साथ आने के बाद निर्मला का फिल्म इंडस्ट्री में बढ़िया नाम होने लगा था। फिल्म इंडस्ट्री के बड़े लोग इन्हें जानने-पहचानने लगे थे। सोहन लाल के साथ इन्होंने कई बड़ी फिल्मों में असिस्टेंट डांस मास्टर की तरह काम करना किया था। एक बार मास्टर सोहन लाल को राज कपूर की फिल्म संगम के एक गीत की कोरियोग्राफी करने के लिए फिल्म की यूनिट संग यूरोप जाना पड़ा। जबकी इसी दौरान मास्टर सोहन लाल “दिल ही तो है” नाम की एक और फिल्म के लिए भी कोरियोग्राफी कर रहे थे।
मास्टर सोहन लाल के जाने के बाद “दिल ही तो है”, के प्रोड्यूसर ने निर्मला से कहा कि उन्हें अर्जेंटली अपनी फिल्म के एक गाने को तैयार करना है। इसलिए तुम इसकी कोरियोग्राफी करो। जब इनसे कहा गया कि घबराओ मत, तुम्हारी मदद के लिए डायरेक्टर पीएल संतोषी वहां मौजूद रहेंगे तो इनकी जान में जान आई और बाद में उनकी मदद से निर्मला ने बड़ी ही कुशलता से वो गाना कोरियोग्राफ भी कर दिया।
उस गीत के बोल थे, निगाहें मिलाने को जी चाहता है। ये गीत आज भी बहुत पसंद किया जाता है। मास्टर सोहन लाल के सम्पर्क में आने के बाद निर्मला ने अपना नाम बदलकर सरोज रख लिया था। सोहन लाल पहले से शादीशुदा हैं, सरोज उन्हें अपना दिल दे बैठी। एक दिन सरोज और सोहन लाल ने शादी भी कर ली। शादी के बाद सरोज एक बेटे की मां बनी। बेटे का नाम उन्होंने राजू रखा। उनको एक बेटी भी हुई। लेकिन छोटी उम्र में ही उनकी वो बेटी दुनिया छोड़ गई।
सोहन लाल से ही सरोज को तीसरी बेटी भी हुई, जिसका नाम उन्होंने कुक्कू रखा। सोहन लाल से सरोज का रिश्ता उस वक्त टूट गया, जब उन्होंने सरोज के बच्चों को अपना नाम देने में असमर्थता जताई। सोहन के लिए सरोज के बच्चों को नाम देना मुसीबत मोल लेना जैसा ही था। एक दिन आपसी सहमति से सरोज और सोहन लाल ने अपनी राहें जुदा कर ली।
कुछ महीनों बाद सरोज की मुलाकात रोशन खान नाम के एक बिजनेसमैन से हुई। रोशन खान भी पहले से शादीशुदा थे और 2 बेटियों के पिता थे। रोशन खान ने ही एक दिन सरोज को शादी के लिए प्रपोज़ किया था। सरोज ने रोशन खान से इस शर्त पर शादी कर ली कि उनके दोनों बच्चों को वो अपना नाम देंगे। इस तरह सरोज बन गई सरोज खान। जीवन में कई ऐसे मोड़ आते हैं, जहाँ से ब्यक्ति के विचार और जीवन के उदेश्य बदल जाते हैं। निर्मला के साथ भी ऐसा ही हुआ।