आरएसएस के तथाकथित प्रचारक आलोक पाण्डेय ने पत्नी पूजा मिश्रा को जमीन विवाद में किया आगे
पूजा मिश्रा का भी है, विवादों से पुराना नाता ! सामान्य महिलाओं की तरह नहीं है, पूजा मिश्रा का इतिहास ! पूजा मिश्रा ने स्वयं स्वीकार किया कि उन्हें जमीन के बदले चाहिए करोङों रूपये…

जियो पेट्रोल पम्प के चल रहे है निर्माण कार्य में विघ्न डालते हुए जमीन को विवादित करके पेट्रोल पम्प के संचालक अभय प्रताप सिंह से धनादोहन करना चाहते हैं, तथाकथित प्रचारक आलोक पाण्डेय।
प्रतापगढ़। बैनामा धारक और शून्य हो चुके एग्रीमेंट के बल पर आलोक पाण्डेय और उनकी पत्नी पूजा मिश्रा के बीच विवाद बढ़ता देख जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन ने कराये जा रहे निर्माण कार्य को रोकवा दिया है। बैनामा धारक की बातों को सही माने तो तथाकथित प्रचारक आलोक पाण्डेय के पिता ने पहले ही ले रखा है, अभय प्रताप सिंह से लाखों रूपये।
प्रतापगढ़ के पट्टी तहसील के तरदहा गांव में जानबूझकर विवादित जमीन बनाकर पेट्रोल पंप के निर्माण को लेकर दो पक्षों में लगातार तनाव की स्थिति बढ़ती जा रही है। सूचना पर पहुंची पुलिस व प्रशासनिक टीम ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया और यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे।
जिस भूमि का विवाद है, उसकी गाटा संख्या- 103 है। जिसका सम्पूर्ण रकबा- 1.083 हेक्टेयर है, जिसमें से 3600 वर्ग मीटर का बैनामा अभय प्रताप सिंह द्वारा दिनांक- 18.08.2025 को लिया गया, जिसमें एग्रीमेंट धारक इंदु प्रकाश पाण्डेय गवाह हैं जो आलोक पाण्डेय के सगे चाचा हैं। उक्त बैनामे की दाखिल खारिज भी हो गई है।
ब्यवसायिक कार्य हेतु जमीन को भूमिधरी से कामर्शियल कराने के लिए SDM पट्टी की कोर्ट से धारा- 80 की कार्यवाही भी हो चुकी है। पेट्रोल पम्प स्थापित करने के लिए राजस्व विभाग सहित अन्य विभागों द्वारा NOC भी जारी हो गई है और भूमि पर बाउंड्री वाल का निर्माण भी हो गया है। फिर इतना सब होने के बाद अचानक आलोक पाण्डेय के द्वारा जमीन को विवादित करना का एक ही मकशद दिखता है कि वह अभय प्रताप सिंह से वास्तव में धनादोहन करना चाहते हैं।
वहीं तरदहा गांव निवासी आलोक पाण्डेय और उनकी पत्नी पूजा मिश्रा ने आरोप लगाया कि पट्टी-प्रतापगढ़ मुख्य मार्ग पर स्थित उनकी जमीन का मामला न्यायालय में विचाराधीन है और इस पर स्थगन आदेश भी जारी है। उनका कहना है कि उक्त जमीन उन्हें परिवार की इशारा देवी द्वारा रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के माध्यम से दी गई है। जबकि एग्रीमेंट प्राप्त कर लेने से किसी जमीन का स्वामित्व उसे नहीं प्राप्त हो जाता। यहाँ तो आलोक पाण्डेय के पिता के पक्ष में लिया गया एग्रीमेंट शून्य हो चुका है।
जिस इसरा देवी के एग्रीमेंट की बात आलोक पाण्डेय और उनकी पत्नी पूजा मिश्रा कर रही हैं, वह दिनांक- 01/01/ 1975 का है जो हरि प्रकाश, शिव प्रकाश, इंदु प्रकाश पाण्डेय नाबालिक संरक्षक पिता स्वयं श्याम बिहारी पाण्डेय से तय करके लिखा था। एग्रीमेंट की सभी शर्ते श्याम बिहारी पाण्डेय से हुई थी और उस समय हरि प्रकाश पाण्डेय की 8 से 9 वर्ष, शिव प्रकाश की उम्र 6 वर्ष और इंदु प्रकाश की उम्र 4 वर्ष थी।
एग्रीमेंट लिखे जाने के महज डेढ़ वर्ष बाद ही श्याम बिहारी पाण्डेय की मृत्यु 02/08/1976 को हो गई। इस तरह एग्रीमेंट लिखी किसी भी शर्त का पालन नहीं किया गया, जबकि शर्त की दसवीं धारा में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि पक्ष शर्तों से पाबंद रहेंगे। इस लिहाज से शर्तो का पालन न होने की दशा में एग्रीमेंट 02/08/1976 को ही शून्य हो गया है। फिर किस दशा में आलोक पाण्डेय और उनकी पत्नी पूजा मिश्रा उक्त भूमि पर अपना अधिकार पेश कर रहे हैं ?
तथाकथित प्रचारक आलोक पाण्डेय और उनकी पत्नी पूजा मिश्रा द्वारा कोर्ट से स्टे ऑर्डर प्राप्त होने का दावा भले कर रही हैं, परंतु उनने द्वारा अदालत का स्थगनादेश अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया। किसी भी जमीन को विवादित करने के लिए बहुत आसान तरीका होता है। कोर्ट में वाद दाखिल करके मामले को उलझा दो।
फिर तारीख पर तारीख लेते रहो और मौके पर यदि निर्माण कार्य हो तो कोर्ट में मामला विचाराधीन होने की प्रश्नोत्तरी देकर पुलिस से काम रोकवा देना ही जमीनी विवाद की असल हकीकत है। आरएसएस के तथाकथित प्रचारक आलोक पाण्डेय और उनकी पत्नी पूजा मिश्रा का आरोप है कि इशरा देवी ने उसी जमीन का बैनामा अभय सिंह उर्फ पप्पू के नाम कर दिया, जिसके चलते विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई।
उक्त जमीन पर जियो के पेट्रोल पम्प के निर्माण कार्य कई महीने से चल रहा था। बैनामा धारक अभय प्रताप सिंह से तथाकथित प्रचारक आलोक पाण्डेय की डील भी हुई थी। परंतु डिमांड अधिक बढ़ जाने की वजह से मामले में नया मोड़ आ गया। आरएसएस के तथाकथित प्रचारक आलोक पाण्डेय और उनकी पत्नी पूजा मिश्रा काम रोक कर अपनी डिमांड पूरी करने की जिद पर उतारू हो गए हैं। इसलिए दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और मौके पर हंगामे की स्थिति बन गई।
विवाद की सूचना पर कंधई थाना के प्रभारी इंस्पेक्टर आदित्य सिंह मय हमराह भारी संख्या में पुलिस बल के साथ विवादित स्थल पहुँचे। बाद में राजस्व विभाग की तरफ से नायब तहसीलदार भी मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों के दस्तावेजों की जांच की और अगली कार्रवाई तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश देते हुए किसी भी प्रकार के निर्माण पर रोक लगा दी।
वहीं आलोक पाण्डेय की पत्नी पूजा मिश्रा ने दूसरे पक्ष पर बाहरी लोगों को बुलाकर अवैध कब्जे का प्रयास करने का भी आरोप लगाया है। जबकि बैनामा धारक अभय प्रताप सिंह का कहना है कि आलोक पाण्डेय और उनकी पत्नी पूजा मिश्रा सिर्फ हमसे धनादोहन के लिए लगातार प्रयासरत हैं। बात न बनने पर आधारहीन आरोप लगा रहे हैं।