मेडिकल कॉलेज में सफाईकर्मी ने बीमार महिला से किया दुष्कर्म: 5 महीने की गर्भवती होने पर खुला राज ; डॉक्टर समेत 13 स्टाफ को हटाया गया
बीमार महिला के साथ सफाई कर्मचारी दुष्कर्म कर रहा था। वह मेडिकल कॉलेज में 9 महीने से भर्ती थी। इसका खुलासा तब हुआ, जब महिला रुटिन मेडिकल टेस्ट में 5 महीने की गर्भवती मिली। यह जानकारी मिलते ही मानसिक रोग विभाग के प्रमुख प्रो. एके मिश्रा ने 18 मार्च को सैफई थाने में एफआईआर कराई। पुलिस ने 19 मार्च को सफाईकर्मी रविंद्र कुमार को गिरफ्तार कर लिया। वह चेंजिग रूम में पीड़ित को लेकर जाकर दरिंदगी करता था। कॉलेज प्रबंधन ने विभाग प्रमुख एके मिश्रा को हटा दिया। मानसिक रोग विभाग के सभी 13 कर्मचारियों का ट्रांसफर दूसरे विभाग में कर दिया। 3 सदस्यीय टीम गठित कर 48 घंटे में रिपोर्ट मांगी है। पीड़ित महिला की निगरानी के लिए डॉक्टरों की टीम बनाई गई है।
सैफई सीओ रामगोपाल शर्मा ने कहा-
” मानसिक बीमार पीड़ित बोल-सुन नहीं सकती। उसके साथ कोई परिजन नहीं है। 24 जून 2025 को उसे मेडिकल कॉलेज में किसी शख्स ने भर्ती कराया था। तब से वह वहीं पर थी। जिस सफाई कर्मचारी ने यौनशोषण किया है। सीसीटीवी फुटेज मांगी गई है। कर्मचारियों और डॉक्टरों से पूछताछ की जा रही है।
मेडिकल में रेप की पुष्टि
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया- वह वार्ड में कपड़े बदलने के लिए बने कमरे (चेजिंग रूम) में इशारा कर पीड़ित महिला को बुलाता था। वहां उससे रेप करता था। वह पीड़ित के साथ 4-5 बार रेप कर चुका है।
गुरुवार रात पीड़ित का मेडिकल कराया गया। इसमें रेप की पुष्टि हुई। पुलिस का कहना है कि आरोपी का डीएनए टेस्ट कराने की तैयारी की जा रही है। कोर्ट से इसकी इजाजत मांगी जाएगी। ताकि ये स्पष्ट हो सकेगा कि महिला के गर्भ में पल रहा बच्चा उसका है या नहीं।
पेट बढ़ा हुआ देखकर हुआ शक
अस्पताल के कर्मचारियों ने दैनिक भास्कर को बताया- महिला मरीज का कुछ समय से पेट लगातार बढ़ रहा था। इससे डॉक्टरों को शक हुआ। जब जांच की गई तो गर्भवती होने की पुष्टि हुई। क्योंकि, वह 9 महीने से एडमिट थी, ऐसे में यह तय था कि मेडिकल कॉलेज में ही उसके साथ दरिंदगी हुई है।
मेडिकल कॉलेज की लापरवाही भी उजागर
मानसिक रोग विभाग के महिला वार्ड में कुल 15 बेड हैं। कर्मचारियों का कहना है कि इस वार्ड के बाहर लगे सीसीटीवी लंबे समय से खराब हैं। वार्ड के आसपास कोई सुरक्षा गार्ड भी नहीं रहता है। इसी का फायदा आरोपी ने उठाया।
तीन सदस्यीय टीम कर रही जांच
मेडिकल कॉलेज के प्रवक्ता शिवम झा ने बताया कि मानसिक रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने 18 मार्च 2026 को लेटर भेजकर मैनेजमेंट को मामले की जानकारी दी थी। आरोप आउटसोर्स के तहत तैनात एक सफाई कर्मचारी पर लगाया था, जिसके बाद तुरंत मामला पुलिस को सौंप दिया गया। मैनेजमेंट ने लापरवाही को देखते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार मिश्रा पर भी कार्रवाई की है। एक मेडिकल टीम गठित की है। यह टीम महिला की गर्भावस्था और स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जरूरी जांच और उपचार सुनिश्चित करेगी, ताकि उसे किसी प्रकार की दिक्कत न हो। पूरे मामले की जानकारी 19 मार्च को ही डीएम, इटावा को भेज दी गई है। साथ ही आंतरिक शिकायत समिति से भी रिपोर्ट मांगी गई है।
आरोपी रविंद्र के चार लड़के, पत्नी अलग रहती है
अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया- आरोपी रविंद्र शादीशुदा है। उसके 4 बच्चे हैं। पत्नी से विवाद है। वह उसे छोड़कर बच्चों संग किसी और के साथ रहती है। उसे एक ठेका कंपनी के माध्यम से अस्पताल में साफ-सफाई की ड्यूटी पर रखा गया था। वह कई महीने से मानसिक रोग विभाग में ही ड्यूटी कर रहा था।
अखिलेश बोले- ऐसे लोगों को नौकरी पर रखने वालों पर भी कार्रवाई हो
मामले पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार को दोषी ठहराया। उन्होंने एक्स पर लिखा- जब लाखों रुपए लेकर चाल-चरित्र की थोथी बात करने वाली भाजपा के स्वास्थ्य मंत्री के आर्थिक-साझेदार, बिना किसी जांच-पड़ताल और पुलिस वेरिफिकेशन के संविदा पर लोगों को रखेंगे तो ऐसे कुकृत्य तो होंगे ही। इसके लिए जो सबसे पहले दोषी है, कार्रवाई की शुरुआत उससे हो।