नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी है। मामले में अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी। UGC मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने के साथ ही 19 मार्च तक जवाब मांगा है, नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाई है। वहीं याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि यूजीसी ने भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है।
CJI ने कहा- शैक्षणिक संस्थानों में भारत की एकता झलकनी चाहिए
ये नियम 13 जनवरी, 2026 को नोटिफाई किए गए थे, जिनका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव (खासकर SC, ST और OBC के खिलाफ) को रोकना है। जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा केवल SC, ST और OBC सदस्यों के खिलाफ भेदभाव तक सीमित है।
इससे सामान्य वर्ग के लोगों को सुरक्षा या शिकायत निवारण तंत्र से बाहर रखा गया माना जा रहा है। झूठी शिकायतों के खिलाफ कोई दंड का प्रावधान नहीं है (2012 के नियमों में था, लेकिन 2026 में हटा दिया गया), जिससे गलत इस्तेमाल की आशंका है।हमें पता है क्या हो रहा है। सुनिश्चित करें कि खामियां दूर की जाएं। हम इसे लिस्ट करेंगे।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने UGC के नए 2026 पर सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण की है, टिप्पणी
यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने इन विवादित नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। इस फैसले का भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने स्वागत किया है।
सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, “क्या हम उल्टी दिशा में चल रहे हैं ?” मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने नए नियमों की सार्थकता और उनके सामाजिक प्रभाव पर कड़े सवाल खड़े किए। कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां निम्नलिखित हैं:
जातिविहीन समाज का लक्ष्य: CJI ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत ने एक जातिविहीन समाज बनाने की दिशा में जो प्रगति की है, क्या ये नए नियम हमें वापस उसी पुरानी दिशा में ले जा रहे हैं ?
नए आदेश तक साल- 2012 के नियम रहेंगे लागू
हॉस्टल का पृथक्करण: कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा SC/ST छात्रों के लिए अलग हॉस्टल बनाने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक संस्थानों में भारत की एकता और विविधता झलकनी चाहिए, न कि विभाजन। आरक्षण के भीतर आर्थिक बदलाव: कोर्ट ने टिप्पणी की कि आरक्षित समुदायों के भीतर भी अब एक बड़ा वर्ग समृद्ध हो चुका है, इसलिए सुविधाओं का आवंटन केवल जातिगत आधार पर अलग-अलग करके नहीं किया जाना चाहिए।
भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी की ओर से सुप्रीम कोर्ट एवं केंद्रीय कैबिनेट मंत्रालय से पुनः समीक्षा की उठाई थी, मांग
सुप्रीम कोर्ट के इस स्थगन आदेश पर भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के संस्थापक एके बिंदुसार ने प्रसन्नता व्यक्त की है। पुनः समीक्षा की मांग: एके बिंदुसार ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट और केंद्रीय कैबिनेट मंत्रालय से यूजीसी कानून की पुनः समीक्षा करने की पुरजोर मांग उठाई थी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को सामाजिक न्याय और एकता की जीत बताते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के प्रति सवर्ण समाज के लोग अपना आभार प्रकट किया है और धन्यवाद ज्ञापन किया।
देशभर में विरोध का रहा माहौल
यूजीसी के इन नए नियमों को लेकर केवल कानूनी गलियारों में ही नहीं, बल्कि सड़कों पर भी विरोध देखा जा रहा है। देश भर के विश्वविद्यालयों में सवर्ण जाति के छात्र इन नियमों को भेदभावपूर्ण बताते हुए कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। आम नागरिकों का मानना है कि ऐसे नियम सामाजिक समरसता को बिगाड़ सकते हैं और शैक्षणिक वातावरण में विभाजन पैदा कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब केंद्र सरकार और यूजीसी को इन नियमों के प्रारूप पर दोबारा विचार करना होगा। फिलहाल, अगले आदेश तक कोई भी नया नियम लागू नहीं होगा, जिससे उन छात्रों को बड़ी राहत मिली है जो इसे अपनी शैक्षणिक स्वतंत्रता और सामाजिक एकता के खिलाफ मान रहे थे। UGC के नए कानून को लेकर इस बार नागरिक बहुत असंतोष देखा गया।