khulasaindia news network: नई दिल्ली। देश में भ्रष्टाचार उखाड़ फेंकने के मुद्दे से जनान्दोलन करके राजनीति में अपनी धमक ज़माने कके लिए आम आदमी पार्टी का गठन करके राजनीति में भूचाल लाने वाले अरविन्द केजरीवाल और उनके सहयोगी मनीष सिसौदिया ने दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुए और दिल्ली में कुछ अलग करने का ढिढोरा पीटा शिक्षा नीति और शराब नीति सहित स्वास्थ्य नीति में अमूलचूर्ण परिवर्तन करने का दावा किया गया।
आम आदमी पार्टी के नेताओं को जिस तरह भ्रष्टाचार और घपले घोटाले करने का आरोप लगातार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन और राज्य सभा सांसद संजय सिंह को दिली विधानसभा चुनाव होने से पहले जेल में रखा गया था और बाद में एक एक करके अदालत से सब जमानत पर तिहाड़ जेल से बाहर निकले और विधानसभा चुनाव में शिकस्त खाकर विपक्ष में बैठने के लिए मजबूर हुए।
अब बात करते हैं कि दिल्ली की सत्ता पर आसीन भाजपा के नेताओं और मुख्यमंत्री समेत देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की। जब दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार थी और मुख्यमंत्रीअरविन्द केजरीवाल थे तब उन पर बहुत सरे आरोप भाजपा के यही नेता लगाया करते थे। अब जब अरविन्द केजरीवाल और उनकी पार्टी सत्ता में नहीं है तो भाजपा के नेताओं के मुंह में ताला लग गया है। अब उनकी बोलती बंद है।
फिलहाल सवाल तो बनता है कि दिल्ली में सत्ता भाजपा के हाथ में है और घोटाले के सभी फाइलें भी भाजप सरकार के हाथ में होगी। लेकिन अब कहां है, वो सारे घोटाले के सबूत भाजप सरकार क्या कोर्ट में पेश कर पाएगी ? अगर ऐसा कोई सबूत हैं तो इन चारों नेताओं को जेल डालनें में इतनी देरी क्यों या फिर दिल्ली विधानसभा चुनाव जीतने के लिए यह सब हंगामा किया गया था। यदि यह सब अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के सारे नेताओं को बदनाम करने का प्रोपेगंडा रचा गया था।