सिस्टम से फरियाद करके थक चुके स्वामीनाथ यादव अब हाईकोर्ट की शरण में, जल्द होगी तत्कालीन थानाध्यक्ष कोहड़ौर धनन्जय राय की तानाशाही की सुनवाई
दुष्कर्म के प्रयास का मुकदमा न लिखना पड़े, इसलिए पीड़िता के साथ मदद में थाने पहुँचे स्वामी नाथ यादव का तत्कालीन थानाध्यक्ष कोहड़ौर धनन्जय राय 22 मई, 2026 को पद का दुरुपयोग करते हुए झूठ बोलकर चालान किया था। जबकि तत्कालीन थानेदार धनन्जय राय द्वारा दुष्कर्म के प्रयास के प्रकरण में पीड़ित सुशीला देवी की तहरीर लेने के बाद आरोपी राजेश यादव उर्फ गभरू का शांति भंग में चालान करके उसे बचाया गया और पीड़िता को डराया व धमकाया गया। सहयोग में थाने पहुँचे स्वामी नाथ यादव को मारा पीटा गया और शांति भंग के चालान किया गया। फिर भी धनन्जय राय को सस्पेंड नहीं किया गया…

जनपद प्रतापगढ़ का थानाध्यक्ष कोहड़ौर, जहाँ तत्कालीन थानेदार धनन्जय राय की चलती थी, अपनी तानाशाही…
प्रतापगढ़। पीड़िता सुशीला देवी की शिकायत पर स्वयं जाँच अधिकारी बनकर स्वयं के ऊपर लगे आरोपो को थानेदार धनन्जय राय आला डालकर धुलाई कर रहे हैं। जबकि वाराणसी में एक महिला सिपाही द्वारा एक महिला फरियादी की थाना में पिटाई के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पिटाई का वीडियो वायरल होते ही उसे सस्पेंड कर दिया गया। वहीं प्रतापगढ़ के थाना कोहड़ौर में सुशीला देवी की तहरीर पर दुष्कर्म के प्रयास का मुकदमा नहीं दर्ज किया गया। बल्कि पीड़िता के साथ सहयोग में थाना पहुँचे स्वामी नाथ यादव का शांति भंग में किया चालान। ताकि दुष्कर्म के प्रयास का न दर्ज करना पड़े मुकदमा।
आईजी रेंज प्रयागराज अजय मिश्रा के यहाँ तैनात पीआरओ जब तत्कलीन थानाध्यक्ष धनन्जय राय से पूँछा कि सुशीला देवी का मुकदमा लिखा गया है या नहीं ? जिस पर तत्कालीन थानाध्यक्ष धनन्जय राय ने कहा कि न लिखा हूँ और न लिखूंगा मुकदमा। सहयोग में थाने गए स्वामी नाथ यादव का शांति भंग में चालान क्यों किया तो पुनः तत्कालीन थानाध्यक्ष धनन्जय राय ने दृढ़ता के साथ कहा कि स्वामी नाथ यादव थाने के अंदर अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहा था। इसलिए चालान किया था।

खुद पर शिकायत, खुद ही जांच अधिकारी, कोहड़ौर के तत्कालीन थानाध्यक्ष धंनजय राय पर लगे गंभीर आरोप…
ADG जोन प्रयागराज और IG रेंज, प्रयागराज से पीड़ित स्वामी नाथ यादव ने तत्कालीन एसओ कोहड़ौर धनन्जय राय शिकायत की। तत्कालीन कोहड़ौर थानाध्यक्ष धनन्जय राय द्वारा बिना किसी अपराध के ही शांति भंग में चालान करना और चालान करने से पूर्व थाने के अंदर बने पुरुष बंदीगृह में बंदकर कई घंटों तक यातनाएं देने के खिलाफ कानूनी कार्यवाही किये जाने के संबंध में शिकायत की। परन्तु पुलिस महकमें के उच्चाधिकारियों ने पीड़ित स्वामीनाथ यादव की फरियाद नहीं सुनी तो मजबूर होकर स्वामी नाथ यादव अपनी फ़रियाद हाईकोर्ट इलाहाबाद, “खंडपीठ लखनऊ” के समक्ष याचिका दाखिल करने का निर्णय लिया। जल्द ही स्वामीनाथ यादव के मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।
पीड़ित स्वामी नाथ यादव पुत्र राम अभिलाषा यादव निवासी- लाखीपुर (बोझवा) थाना- कोहड़ौर, परगना व तहसील- पट्टी, जनपद- प्रतापगढ़ की मूल निवासी है। पीड़ित के पड़ोस में दिनांक- 20 मई की रात लगभग 1 बजे सुशीला देवी पत्नी अरविन्द यादव द्वारा हल्ला गुहार मचाया गया तो पीड़ित भी मौके पर पहुँचा तो सुशीला देवी ने बताया कि उसके साथ राजेश कुमार उर्फ गभरू बदनीयती से सोते समय उसकी चारपाई जिस पर मच्छरदानी लगी थी, उसे उठाकर उसका हाथ पकड़ लिया और मुँह दबाकर उसकी इज्ज़त के साथ जोर ज़बरदस्ती करने लगा।
सुशीला देवी ने बताया कि राजेश कुमार उर्फ़ गभरू द्वारा उसके साथ दूसरी बार ऐसा अपराध किया गया। सुशीला यादव का पति परदेश में रहता है और वह अपने दो नाबालिग बच्चों के साथ घर पर रहती है। रात में ही सुशीला देवी ने आपातकालीन सेवा UP112 पर फोन करके सूचना दिया। पुलिस आई और आरोपी को उठा ले गई। सुबह कोहड़ौर थाना पर पीड़िता को बुलाया गया था और उससे घटना के संबंध में तहरीर ली गई । घटना के दो दिन बाद सुबह जब सुशीला देवी के कहने पर पीड़ित उसकी मदद के लिए उसके साथ कोहड़ौर थाना पहुँचा तो उसे पुरुष बंदी गृह में बंद कर दिया गया। पीड़ित का मोबाइल, पर्स, घड़ी और रूमाल छीन लिया गया।
पीड़ित को पुरूष बंदी गृह में बंद कर तरह-तरह की यातनाएं अपरान्ह 3 बजे तक दिया गया, फिर उसका शांति भंग में चालान कर दिया गया। पीड़ित को बिना किसी अपराध के कोहड़ौर थाना में स्वयं तत्कालीन थानाध्यक्ष धनन्जय राय द्वारा उसके साथ ऐसा ब्यवहार किया गया, मानो वह कोई आतंकवादी हो। पीड़ित से तत्कालीन थानाध्यक्ष धनन्जय राय ने पूंछा था कि तुम किस पार्टी से जुड़े हो, पीड़ित ने जब बताया कि वह भाजपा की विचारधारा से प्रभावित रहता है तो तत्कालीन थानाध्यक्ष धनन्जय राय ने उसे माँ-बहन की गाली देते हुए बोले कि साले यादव होकर भाजपा की बात करते हो। तुम्हारे गाँव में तो अधिकतर यादव सपाई हैं, तुम कैसे भाजपाई हो ?
पीड़ित का शांति भंग की धारा- 170/126/135 बीएनएस एक्ट के तहत चालान कर दिया गया। पीड़ित दिनांक- 05/06/2026 को उप जिला मजिस्ट्रेट के यहाँ से अपनी जमानत की नक़ल निकलवाया तो उसे पढ़ने के बाद ज्ञात हुआ कि तत्कालीन थानाध्यक्ष धनन्जय राय महोदय द्वारा अपने चलानी रिपोर्ट में जो तथ्य दर्शाया है कि पीड़ित द्वारा अनावश्यक रूप से अकारण एफआईआर की मांग करना और हम पुलिस वालों द्वारा एफआईआर की प्रक्रिया समझाने पर भी एक पक्षीय स्वामी नाथ (पीड़ित) उपरोक्त मानने को तैयार नहीं था और अधिक उग्र होकर अमादा फौजदारी होने लगा।
जो आरोप प्रार्थी पर तत्कालीन थानाध्यक्ष धनन्जय राय महोदय द्वारा लगाया गया, वह असत्य है। चूँकि पीड़ित स्वय थाना कोहड़ौर गया था, उसे लाखीपुर (बोझवा) से गिरफ्तार नहीं किया गया था। वह पीड़िता सुशीला देवी के कहने पर उसकी मदद में स्वयं थाना कोहड़ौर गया था। संज्ञेय अपराध को रोकने व शांति ब्यवस्था बनाये रखने के मद्देनजर एकपक्षीय स्वामी नाथ (पीड़ित) को गिरफ्तारी से अवगत कराते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय व राष्ट्रीय मानवाधिकार योग के आदेशों निर्देशों का पालन करते हुए समय करीब 9:00 बजे शांति ब्यवस्था के दृष्टिगत गिरफ्तार किया गया।
तत्कालीन थानाध्यक्ष धनन्जय राय का उक्त कथन बिलकुल असत्य है। पीड़ित स्वयं थाना कोहड़ौर अपनी मर्जी से अपने पड़ोस के अरविंद यादव की पत्नी सुशीला देवी के सहयोग में उनके साथ गया था और वह किसी भी अनावश्यक रूप से अकारण एफआईआर की मांग नहीं किया। तत्कालीन थानाध्यक्ष धनन्जय राय के कहने पर ही सुशीला देवी ने तहरीर दी थी, उसी तहरीर के संदर्भ में प्रार्थी व पीड़िता सुशीला देवी एफआईआर की नकल देने की मांग की थी। सच तो यह है कि दिनांक- 22/05/2026 समय करीब 9:00 बजे थानाध्यक्ष धनन्जय राय जैसे ही पीड़ित व उसके साथ सुशीला देवी को थाना के अंदर आते देखा तो सार्वजानिक रूप से माँ-बहन की गाली देने लगे।
दोनों पर दबाव बनाने लगे कि दो दिन पूर्व दुष्कर्म के प्रयास की घटना में वह समझौता कर ले। जब तत्कालीन थानाध्यक्ष धनन्जय राय की बात सुशीला देवी नहीं मानी तो स्वामी नाथ यादव को पुरूष बंदीगृह में बंद कर दिया और अपरान्ह 3 बजे उसका शांति भंग में चालान कर दिया गया। पीड़ित का दोष यही है कि मानवतावश एक दुष्कर्म के प्रयास से घबराई महिला के साथ थाना चला गया था, जहाँ से उसका चालान कर झूठी कहानी बनाकर चालानी रिपोर्ट उप जिला मजिस्ट्रेट पट्टी के न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से पीड़ित अपनी जमानत कराया है और अपनी पीड़ा ब्यवस्था में बैठे सभी जिम्मेदारों के समक्ष ब्यक्त कर रहा है।
पीड़ित पुलिस अधीक्षक महोदय प्रतापगढ़ से भी मिलकर शिकायत की, जिस पर पुलिस अधीक्षक महोदय प्रतापगढ़ ने सीओ सिटी को जांच सौपी थी, परन्तु आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। पीड़ित कई बार सीओ सिटी के दफ्तर जाकर अपनी जांच रिपोर्ट के संबंध में जानकारी करना चाहा, परन्तु उसे सिर्फ जांच चल रही है। ये कहकर वापस कर दिया जाता है। पीड़ित जीविकोपार्जन के लिए मुंबई रहता है। पीड़ित न्याय पाने के लिए दर दर भटक रहा है। एक तरफ आम जनता के मन में पुलिस के प्रति अड़ियल और तानाशाही रवैया भूलने की सीख दी जाती है और बिना डरे और सहमें अपनी पीड़ा पुलिस के समक्ष कहने के लिए प्रेरित किया जाता है।
वहीं दूसरी तरफ कोहड़ौर थाना में तैनात रहे प्रभारी थानाध्यक्ष धनन्जय राय तानाशाह बनकर मनमानी करके आम जनता के मौलिक अधिकार का हनन कर रहे हैं। सिर्फ दिखाने के लिए कागजी कोरम में माननीय सर्वोच्च न्यायालय व राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के आदेशों निर्देशों का पालन कराया जाता है। ताकि स्वयं की बचत हो सके और सामने वाला पीड़ित पक्ष उसके सामने नतमस्तक बना रहे। तत्कालीन थानाध्यक्ष धनन्जय राय का एक फंडा है कि थाना कोहड़ौर में आने वाला भाजपाई नेता उन्हें काम के बदले रिश्वत नहीं देगा।
इसलिए मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के नेताओं को कोहड़ौर थाना में अधिक तवज्जों मिलती है और उन्हीं के सहारे तत्कालीन थानाध्यक्ष धनन्जय राय दिन रात धन कमाने में लगे रहते थे। पीड़ित की बातों पर यकीन न हो तो एक सप्ताह का सीसीटीवी फुटेज निकाल कर चेक किया जा सकता है। तत्कालीन थानाध्यक्ष धनन्जय राय की कार्यशैली से सरकार की बदनामी हो रही है और इसका सीधा असर आगामी विधानसभा चुनाव- 2027 में देखने को मिलेगा। एक थानाध्यक्ष के पद पर रहते हुए जिस तरह से तत्कालीन थानाध्यक्ष धनन्जय राय सपा के एजेंट की तरह कार्य कर रहे हैं, वह पुलिस सेवा नियमावली के विपरीत है और सामाजिक न्याय के खिलाफ है।
पीड़ित के साथ तत्कालीन थानाध्यक्ष धनन्जय राय द्वारा महज इसलिए शांति भंग की धारा- 170/126/135 बीएनएस एक्ट के तहत चालान कर दिया गया, ताकि पीड़ित डर जाए और दुष्कर्म के प्रयास के आरोपी पर कोई कार्यवाही न करना पड़े। पीड़ित के चालानी रिपोर्ट में तत्कालीन थानाध्यक्ष धनन्जय राय ने लिखा है पीड़ित की गिरफ्तारी उसके गाँव लाखीपुर (बोझवा) से की गई, जबकि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सेवा के तहत IGRS में की गई सुशीला देवी की शिकायत के निस्तारण में तत्कालीन थानाध्यक्ष धनन्जय राय द्वारा ने जांच आख्या में लिखा है कि पीड़ित थाना कोहड़ौर परिसर में आकर पुलिसकर्मियों से अभद्रता कर रहा था और अमादा फौजदारी हो रहा था।
तत्कालीन थानाध्यक्ष धनन्जय राय का इतना असर गिर गया कि वह एक पीड़ित पर आरोप लगा दिए कि वह थाना कोहड़ौर के अंदर असंसदीय भाषा बोल रहा था। इसलिए उसका शांति भंग में चालान करना पड़ा। एक थानाध्यक्ष को उसके थाना के अंदर कोई कैसे गाली दे सकता है ? यदि कोई भी ब्यक्ति किसी भी थाना के अंदर थानाध्यक्ष की मौजूदगी में गाली देता है तो उस ब्यक्ति का शांति भंग में चालान करने के बजाय थानाध्यक्ष को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए। पर ऐसे निर्लज्ज और निघर्घट लोग चुल्लू भर पानी में डूबकर मरने में भी अपनी तौहीनी समझते हैं। उन्हें डूब मरने के लिए नदी में “दह” खोजना पड़ता है।
धनन्जय राय स्वयं दो तरह का विरोधाभाषी आरोप लगा रहे हैं, जिससे स्पष्ट है कि पीड़ित के साथ धनन्जय राय द्वारा पद का दुरूपयोग करते हुए शांति भंग की धारा- 170/126/135 बीएनएस एक्ट के तहत चालान की कार्यवाही की गई है। पीड़ित ने सूब के मुखिया योगी आदित्यनाथ जी सहित अपर मुख्य सचिव गृह, डीजीपी व एडीजी, प्रयागराज से रजिस्टर्ड डाक से शिकायत किया और एसपी प्रतापगढ़ व आईजी प्रयागराज से मिलकर अपनी फरियाद की, परन्तु किसी तरह की राहत नहीं हुई। सिर्फ धनन्जय राय का स्थानांतरण कोहड़ौर थाना से मान्धाता थाना कर दिया गया । यही है देश का सड़ा हुआ सिस्टम जो सुधरने का नाम नहीं ले रहा है।